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माफ करो शिवराज ……….!, नजरअंदाज होने लगे मामा

भोपाल 2 फरवरी 2019 । कार्यकर्ताओं और मंत्रियों की अनदेखी कर अपने चहेते दो अधिकारियों के बल पर अपना राजपाट चलाने वाले मामा को अब उन्हीं की तर्ज पर उनकी पार्टी भी नजर अंदाज करने लगी है। हमेशा पार्टी आला कमान की प्रदेश की सूची में नंबर वन रहने वाले मामा का नाम सरककर नीचे आ गया है।
बिनाका गीत माला के गीतों की तरह अब उनका नाम पहले नंबर से सरककर १३ वें क्रम पर आ गया है। नंबर वन पर केन्द्रीय मंत्री मुन्ना भैय्या का नाम आ गया है, वहीं दूसरी पायदान पर प्रभात झा पहुंच गये हैं। तीसरे स्थान पर कैलाश विजयवर्गीय का नाम है। यह लिस्ट लोकसभा चुनाव हेतु संचालन को बनी है।

मजे की बात यह है कि मामा यानी शिवराज का नाम लिस्ट में उनके अधीन रहे ४ मंत्रियों से भी नीचे हैं। अब तो ऐसा लग रहा है कि शिवराज के लिये भाजपा वाले ही कहने लगे हैं कि माफ करो शिवराज, हमारा नेता……..?

दोनों नेत्रियां भाजपा की फिर भी हो गई जूतम पैजार, थप्पड़ों और गालियों से गूंजा महापौर का निवास
मध्यप्रदेश विधान सभा चुनावों में मिली हार के बाद भाजपा में कुछ भी सही नहीं चल रहा है। हर रोज़ कोई न कोई घटना राजनीतिक गलियारों में चर्चा की वजह बन रही है। ताज़ा कांड भोपाल महापौर आलोक शर्मा के निवास पर हुआ है, जिसमें भाजपा के वर्तमान सांसद आलोक संजर, जिला अध्यक्ष सुरेंद्र नाथ,वरिष्ठ अशोक सैनी सहित तमाम कार्यकर्ता जमा थे।

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा चुनाव के मद्देनजर महापौर आलोक शर्मा के निवास पर एक बैठक रखी गई थी। जिसमें भोपाल उत्तर में विधान सभा से अपनी किस्मत आजमाने वाली फातिमा रसूल सिद्दीक़ी और अग्रसेन मंडल अध्यक्ष रुक्मणि मालवीय भी मौजूद थीं। अचानक फातिमा ने रुक्मणि से बहस करना शुरू कर दी। उनका आरोप था कि विधान सभा चुनाव में उनको जान बूझकर हरवाया गया है। इसलिए रुक्मणि को पार्टी से बाहर निकाला जाए। अब रुक्मणि क्यों पीछे रहतीं उन्होंने भी कह दिया कि कल से पार्टी में आए लोग अपना काम करें न कि किसी पर आरोप लगाएं।

बस इतना सुनना था कि फातिमा ने रुक्मणि को थप्पड़ जड़ डाला। फिर क्या था कार्यकर्ताओं में भी आपस में जूतम पैज़ार चालू होना ही था। यहां तक तो सब ठीक था पर इतना रायता फैलने के बाद फातिमा के पति देव क्यों पीछे रहते। बंदे ने सीधा सीधा चक्कू निकाल के सबको डराना शुरू कर दिया। अब ये सब कोई अकेले में बंद कमरे में नहीं हो रहा था, बल्कि वहां पर भाजपा के महापौर, जसवंत सिंह हाड़ा, सुरेश आर्य जैसे दिग्गज मौजूद थे। मामला इतना बढ़ गया कि वहां मौजूद नेताओं ने बीच बचाव करके मामला निपटवाया, जंग की आंधी बढ़ भी सकती थी।

भाजपा में वैसे तो कहा जाता है कि अनुशासित पार्टी है लेकिन जिस तरह से सीनियर नेताओं के होने के बावजूद नेताओं के आपस में लड़ाई झगड़े सामने आ रहे है,वो भाजपा के अनुशासन की पोल खोलने के लिए काफी है। अभी कल ही नेताओ के आपस में संवाद हीनता न होने की वजह से ही रामलाल ने नेताओ से मुलाक़ात की है और आज ये कांड सामने आ गया।

वैसे तो ये मामला निपट गया पर जिस तरह भाजपा नेताओ कि आपसी खींचतान के चर्चे मीडिया की सुर्खियों में बने रहते है, उससे तो यही लगता है कि भाजपाइयों की आपसी लड़ाई में कहीं लोकसभा चुनाव में भाजपा की लुटिया न डुबो दे।

अनियमितताओं के चलते छिंदवाड़ा महापौर को कारण बताओ नोटिस भेजा
छिन्दवाड़ा नगरपालिक निगम की महापौर श्रीमती कांता योगेश सदारंग को अब सरकारी नोटिस का सामना करना पड़ेगा। यह नोटिस कांता योगेश को अनियमितताओं के आरोप पर आर्थिक क्षति की वसूली और महापौर पद से हटाने के संबंध में दिया गया है। यह नोटिस महापौर द्वारा मप्र नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 25 में महापौर को दी गयी शक्तियों तथा निहित कर्त्तव्यों का पालन नहीं किये जाने पर दिया गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा दिये गये नोटिस में नोटिस प्राप्ति के 15 दिन में जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय कार्यवाही करने का उल्लेख किया गया है।

छिंदवाड़ा नगर निगम के लिए गठित जांच दल ने अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी है। इसके बाद राज्य सरकार ने गुरुवार को छिंदवाड़ा की महापौर कांता योगेश सदारंग को पद से हटाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। यह कारण बताओ नोटिस गुरुवार को ही छिंदवाड़ा की महापौर कांता योगेश सदारंग को थमा भी दिया गया। नोटिस में छिंदवाड़ा की महापौर पर परिषद की नियमित बैठकें नहीं कराने तथा निगम की दुकानों के सामने के कॉरीडोर को बेचने का आरोप है।

रामलाल को दिग्गजों पर नहीं भरोसा, राकेश सिंह से कहा नई टीम तैयार करो

दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर ही पिएगा, कुछ यही हाल भाजपा आलाकमान का नजर आता है। इसलिए ही संगठन के महामंत्री रामलाल ने प्रदेश अध्यक्ष को साफ कह दिया कि पार्टी अब लोकसभा में कोई रिस्क नहीं लेने वाली, जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में या परफार्मेंस में कमजोर है सबको बदल डालो।

बता दें की अभी हाल में संपन्न हुए विधान सभा चुनावों में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा है, हालांकि भाजपाइयों ने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, पर जनता है कब मूड बदल जाए कुछ नहीं कह सकते। कब जनता अर्श से फर्श पर ला पटके कोई सटीक नहीं जानता। इसी लिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आगामी लोकसभा में कोई चांस नहीं लेना चाहता। भाजपा के संगठन महा मंत्री रामलाल ने इसी वजह से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह को फ्री हैंड दिया है, ताकि वो लोकसभा से पहले अपनी टीम तैयार कर सकें।

पिछले विधान सभा चुनाव में जिन नेताओं और पदाधिकारियों ने पार्टी के विरोध में काम किया है, उन पर ये गाज गिरना तय है, साथ ही साथ जिन नेताओं के एरिया में पार्टी कमजोर हुई है उनको भी बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। बुधवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने बैठक में आए जिलाध्यक्षों औऱ प्रदेश पदाधिकारियों को इसके संकेत दे दिए हैं। भइया अब और नहीं, अब हटने के लिए अपने आप को तैयार कर लो, ताकि बाद में हटाने पर कोई दिक्कत न हो।

लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी ज़मीनी स्तर पर अपने आप को मजबूत करना चाहती है, इसी लिए राकेश सिंह को सात दिनों में अपनी टीम बनाने के लिए रामलाल ने निर्देशित किया है। जिस भी नेता का परफार्मेंस खराब होगा उनको साइड करके, नए लोगों को मौका दिया जा सकता है, जिससे कि पार्टी को मजबूती मिल सके और पार्टी में मौजूद गुटबाजी खत्म हो सके।

बैठक में रामलाल ने कहा कि आपस कि सारी लड़ाइयों को भूल कर सारे नेताओं को एक होना होगा क्यूंकि विधान सभा में भाजपा जारी नहीं है बस कांग्रेस जीती है। यदि किसी को आपस में कोई शिकायत भी है तो वो लिखकर या अकेले में बात करें। जनता के बीच सकारात्मक माहौल बनाए ताकि आने वाले लोकसभा में विधान सभा जैसा हाल न हो। बाकी ये तो समय ही जानता है कि भाजपा कि अंदरुनी गुटबाजी खत्म होती है या यूं ही सड़कों पर आती रहेगी, जिससे राजनीतिक हलकों में चटखारे लेकर सुनी ओर सुनाई जाती रहेगी।

उन्होंने आगे कहा कि हमें सभी 29 लोकसभा सीटें जीतना है, इसलिए जमीन पर सकारात्मक वातावरण बनाएं। एकजुटता दिखाएं। हार का ठीकरा कोई अपने ऊपर नहीं बल्कि, दूसरे के ऊपर ही फोड़ता है।

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