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लॉक डाउन का सख्ती से पालन करायें, स्क्रीनिंग व सेम्पलिंग में तेजी लाएं : मंत्री डॉ. मिश्रा

भोपाल 9 मई 2020 । लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा गृह मंत्री. डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने उज्जैन में कोरोना संक्रमण के रोकथाम के लिये निर्देशित किया कि प्रशासन लॉक डाउन का पालन सख्ती से कराना सुनिश्चित करवायें। उन्होंने कोरोना संक्रमित हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों में स्क्रीनिंग व सेम्पलिंग के कार्य में तेजी लाने के निर्देश भी दिये। डॉ. मिश्रा आज वीडियो कॉलिंग से उज्जैन के जन-प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ कोरोना संक्रमण के बचाव व रोकथाम की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने उज्जैन कलेक्टर को राशन के पर्याप्त बंदोबस्त करने और जनसेवकों की पास संबंधी समस्याओं का त्वरित निराकरण के निर्देश दिये।
समीक्षा के दौरान क्षेत्रीय सांसद श्री अनिल फिरौजिया ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों से राशन वितरण की व्यवस्था सुदृढ़ करवाने की बात कहीं। विधायक श्री पारसचन्द्र जैन ने बताया कि आर्डी गार्डी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने की आवश्यकता है, जिससे कोरोना संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित किया जा सके। विधायक श्री मोहन यादव ने बताया कि कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के स्थानांतरण से व्यवस्थाओं में सुधार होगा। कलेक्टर श्री आशीष सिंह के आने के बाद से राहत सामग्री वितरण कार्य में तेजी आई है। विधायक श्री बहादुर सिंह चौहान ने आशा व्यक्त की कि उज्जैन में कोरोना रिकवरी रेट जल्द ही ठीक हो जायेगा। विधायक श्री रामलाल मालवीय ने जन-प्रतिनिधियों के साथ जिला प्रशासन की आपदा प्रबंधन की बैठक करवाने का अनुरोध किया। विधायक श्री मुरली मोरवाल ने बड़नगर एसडीएम को लॉक डाउन का पालन सख्ती से कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया।

अरबिंदो अस्पताल में फिलहाल कोरोना का उपचार नहीं

उज्जैन।जिला प्रशासन ने अरबिंदो हास्पिटल में 100 बेड आरक्षित करने का जो दावा किया हे,फिलहाल उसमें दम नहीं है। राज्य शासन का अरबिंदो प्रशासन से कोई अनुबंध अभी तक नहीं हुआ है। जब तक अनुबंध नहीं होगा,वहां मरीज भेजकर उपचार करवाना संभव नहीं है।
इस संबंध में अपर कलेक्टर क्षितिज सिंघल से चर्चा की गई तो उन्होने बताया कि शासन ने यह स्थिति बना ली है कि अरबिंदो में 100 बेड आरक्षित रखवाएं जाएंगे। लेकिन जब तक अनुबंध नहीं होता,अरबिंदो में किसी कोरोना मरीज को सीधे उपचार के लिए भेजना संभव नहीं है। उन्होने बताया कि गंभीर केस तो पूर्व में भी भेजे गए।

लेकिन कोरोना पॉजीटिव्ह मरीज मिलने पर उसे फिलहाल आर डी गार्डी मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा या फिर माधवनगर अस्पताल। इस प्रश्न पर कि शहर के अन्य निजी अस्पतालों में क्या कोरोना का उपचार करवाया जा सकता है ? उन्होने कहाकि जब तक पॉजीटिव्ह नहीं आ जाता,तब तक। जैसे ही पॉजीटिव्ह आएगा, संबंधित निजी अस्पताल उसे माधवनगर या आर डी गार्डी मेडिकल कॉलेज भेजेंगे। वहां से इंदौर रैफर करने पर ही अरबिंदो की सोचेंगे। उन्होने बताया कि अरबिंदो के साथ अनुबंध होने के बाद तय होगा कि आर डी गार्डी मेडिकल कॉलेज के लिए क्या लाईन होगी।

फिर इंदौर से 1000 सैंपल अहमदाबाद भेजें
कोरोनावायरस पर नियंत्रण पाने के लिए जैसे ही सैंपल लेने का काम बढ़ाया गया वैसे ही एक बार फिर इंदौर की व्यवस्था ढेर होती हुए नजर आने लगी है। सरकार लाख वादों के बाद भी इंदौर में जांच के लिए पर्याप्त किट नहीं भेज पा रही है ।

इसके परिणाम स्वरूप इंदौर से एक बार फिर 1000 सैंपल जांच के लिए अहमदाबाद भेजना पड़े हैं।कोरोना इंदौर के सबसे ज्यादा प्रभावित हो जाने के बाद यह निष्कर्ष निकल कर सामने आया था कि यहां पर अब सैंपल की संख्या को ज्यादा से ज्यादा बढ़ा दिया जाए। जितने ज्यादा सैंपल लिए जाएंगे और जांच की जाएगी उतनी ही तेजी से कोरोना पर नियंत्रण संभव हो पाएगा ।अब तक जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के द्वारा किए गए कामकाज के कारण कोरोना बहुत ज्यादा नियंत्रित होता हुआ नजर आने लगा है।

पिछले 2 दिनों से प्रशासन के द्वारा स्वास्थ विभाग को निर्देशित करते हुए इंदौर में लिए जाने वाले सैंपल की संख्या को बढ़ा दिया गया है। राज्य सरकार की ओर से हमेशा यह दावा किया जा रहा है कि इंदौर में हर दिन 1200 सैंपल की जांच करने की व्यवस्था मेडिकल कॉलेज में हो गई है।अब जब पिछले 2 दिनों से ज्यादा सैंपल लिए जा रहे हैं तो हकीकत भी उजागर होकर सामने आना शुरू हो गई है । अब भी मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन बमुश्किल 500 सैंपल की जांच हो पा रही है । इंदौर से लिए जा रहे सैंपल जांच के बगैर ही इकट्ठा हो रहे हैं । हालात कितने खराब है इसका अंदाजा तो इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 2 दिनों में ही 1000 सैंपल जांच के लिए इकट्ठा हो गए हैं।

अब इस सैंपल को जांच के लिए अहमदाबाद की प्रयोगशाला में भेजा गया है। वहां से आज रात या कल तक इन सेंपल रिपोर्ट प्राप्त होगी।इस बारे में पूछे जाने पर मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ ज्योति बिंदल ने बताया कि ऑटोमेटिक मशीन के कीट मौजूद ना होने के कारण हम दावे के जितनी सैंपल की जांच नहीं कर पा रहे हैं ।

यही कारण है कि हमें सैंपल को जांच के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कल इंदौर में 742 सैंपल की जांच हुई, जिसमें बुरहानपुर खंडवा खरगोन टेंपल भी शामिल है। उनका कहना है कि जब किट अवेलेबल नहीं है तो फिर ऑटोमेटिक मशीन से जांच करने का काम आखिर किस तरह से किया जा सकता है।

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