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भारतीय सेना में शामिल हुई स्वदेशी ‘धनुष’ तोप

नई दिल्ली 9 अप्रैल 2019 । देश में बनी धनुष तोप के सोमवार को सेना में शामिल होते ही भारतीय सेना को ‘देसी’ बोफोर्स मिल गई. ‘देसी’ बोफोर्स के रूप में प्रसिद्ध बहुप्रतिक्षित धनुष 155/45 कैलिबर गन प्रणाली निश्चित रूप से सेना की मारक क्षमता में वृद्धि करेगी. धनुष बंदूक प्रणाली 1980 में प्राप्त बोफोर्स पर आधारित है और कथित भ्रष्टाचार के कारण इसकी खरीद को लेकर विवाद हुआ था.

के-9 वज्र और एम-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोप के बाद धनुष के सेना में शामिल होने से एक अंतराल के बाद मोदी सरकार के अंतर्गत तोपखाने में हथियारों को शामिल किए जाने को बढ़ावा मिला है. के-9 वज्र एक स्व-चालित दक्षिण कोरियाई हॉवित्जर और एम-777 अमेरिका से प्राप्त अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोप है. धनुष को बोफोर्स की तर्ज पर जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है. सेना ने स्वदेशी बंदूक उत्पादन परियोजना का सक्रिय रूप से समर्थन किया है और 110 से अधिक धनुष तोपों का ऑर्डर दिया है.

धनुष का सफर
साल 2000 में आयुध निर्माणी कानपुर (ओएफसी) ने बोफोर्स की बैरल अपग्रेड करने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को दिया था। फैक्टरी ने देश में पहली बार सात मीटर लंबी बैरल बनाई, जिसे 2004 में सेना ने मंजूरी दी। बैरल पास होते ही तोप बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके बाद 2011 में बोफोर्स तोप की टेक्नोलॉजी और भारत में इसे बनाने की मंजूरी देने के लिए स्वीडन की कंपनी ने 63 महीने का वक्त मांगा। इस बीच ओएफसी ने भी तोप बनाने का प्रस्ताव सेना को दिया। सेना ने 18 महीने का वक्त दिया था। ओएफसी, फील्ड गन और डीआरडीओ ने रिकॉर्ड समय में बेहतर नई तोप बनाकर सेना को सौंप दी।

धनुष एक नजर में
– बैरल का वजन 2692 किलो
– बैरल की लंबाई आठ मीटर
– रेंज 42-45 किलोमीटर
– दो फायर प्रति मिनट में
– लगातार दो घंटे तक फायर करने में सक्षम
– फिट होने वाले गोले का वजन 46.5 किलो

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