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स्वामी स्वरूपानंद बोले : हनुमान को दलित कहना अपमानजनक, वे तो इस जाती के थे

जबलपुर। 2 दिसंबर 2018 ।  भाजपा की मंशा राममंदिर के निर्माण को लेकर ईमानदारीपूर्ण नहीं है। वह तो सिर्फ 2019 के आगामी लोकसभा चुनाव में लाभ हासिल करने के लिए एक हथकंडे के रूप में इस मुद्दे को उछाल रही है। हनुमानजी के बारे में रामचरित मानस में आया है कि कांधे मूज जनेऊ साजे, इसका सीधा सा अर्थ है कि वे ब्राह्मण थे न कि दलित। यह आरोप शुक्रवार को प्रेस कॉफ्रेंस में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने लगाया।शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि कायदे से राममंदिर को लेकर संसद को एक प्रस्ताव बनाकर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। जिसके आधार पर राममंदिर निर्माण के रास्ते की बाधा को समाप्त किया जाए। लेकिन भाजपा ऐसा न करके राममंदिर की बात कहकर जनता को सिवाय भ्रमित करने के और कुछ नहीं कर रही है। यहां तक कि अध्यादेश लाए जाने की बेतुकी बात भी समय-समय पर सामने आती रहती है। जबकि राममंदिर के मुद्दे पर अध्यादेश किसी भी दृष्टि से प्रासंगिक नहीं होगा। ऐसा इसलिए भी क्योंकि रामलला के लिए 67 एकड़ भूमि पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है।शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने यहां तक कहा कि जिस ढांचे को बाबरी मस्जिद कहकर ढहाया गया, वह बाबरी मस्जिद थी ही नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि ध्वस्त निर्माण में मंगलकलश और हनुमानजी के चित्र वाली नक्काशी सहित कई अन्य सबूत मिले, जो वहां पहले से हिन्दू धर्मस्थल होने का प्रमाण दे रहे थे। इसके बावजूद भाजपा-आरएसएस सहित उनसे जुड़े हिन्दू संगठनों ने राजनीतिक लाभ के लिए बाबरी का हल्ला मचाया। ऐतिहासिक सत्य यह है कि अयोध्या में कभी बाबर पहुंचा ही नहीं तो फिर बाबरी मस्जिद भला कहां से बन गई?शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने 3 हजार करोड़ फूंककर सरदार वल्लभभाई पटैल का विशालकाय पुतला बनाए जाने के रवैये की निंदा की। साथ ही कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार सिर्फ पुतले बना सकती है मंदिर नहीं। इसीलिए भाजपा राममंदिर के स्थान पर सरयू किनारे भगवान श्रीराम का भी विशालकाय पुतला बनाने की योजना बना चुकी है।शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हनुमान को दलित संबोधित किए जाने के रवैये की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि त्रेतायुग में दलित शब्द था ही नहीं। सबसे पहले गांधी ने वंचित वर्ग को हरिजन कहकर पुकारा और बाद में मायावती ने दलित शब्द इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इस दौरान उनके निजी सचिव सुबुद्घानंद, ब्रह्मचारी चैतन्यानंद, राजेन्द्र शास्त्री और मनोज सेन सहित अन्य शिष्य मौजूद रहे।

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