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आतंकी धमकी को ठेंगा, प्रतिदिन 500 ट्रक सेब निकल रहा कश्मीर से

नई दिल्ली 26 सितम्बर 2019 । आतंकी धमकियों के बावजूद लगभग 500 ट्रक प्रतिदिन घाटी से दूसरे राज्यों के बाजारों के लिए निकल रहे हैं। इससे उन बागवानों को बड़ी राहत मिल रही है जो पाबंदियों के कारण सेब की फसल को लेकर चिंतित थे। स्थानीय बाजार के जानकार बता रहे हैं कि सरकारी एजेंसी नेफेड की खरीदारी से बागवानों को बड़ा सहारा मिला है। वह कहते हैं कि सरकार के आग्रह पर यदि नेफेड ने सेब खरीदने की पहल नहीं की होती तो उन्हें काफी नुकसान होता। सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य ने भी राहत दी है। दूसरी ओर आतंकवादी अपना खौफ बनाए रखने के लिए लगातार धमकियां दे रहे हैं। इससे चालू वर्ष के सितंबर माह में सेब के व्यवसाय में लगभग 30 हजार टन की कमी आई है। पिछले वर्ष सितंबर तक व्यापारियों ने 80 हजार टन सेब का व्यापार किया था। इस वर्ष यह आंकड़ा 50 हजार से नीचे है। इसका कारण है कि आतंकी न सिर्फ बाग मालिकों को धमका रहे हैं बल्कि पिटाई करने के साथ बाहर फल ले जाने वाले ट्रकों को आग भी लगा दे रहे हैं। लगातार धमकियां दे रहे आतंकी
दक्षिण कश्मीर के उग्रवाद प्रभावित शोपियां जिले के एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह इस बारे में पुलिस को लगातार संदेश भेज रहे हैं। व्यापारी ने बताया कि उसने रात के समय यहां से ट्रक में सेब लादकर नई दिल्ली ले गया और वहां उसे बिक्री करने के बाद 60 हजार रुपये की आमदनी हुई। लेकिन घर लौटने पर तीन आतंकवादियों ने उससे संपर्क कर कहा कि वह एक विकल्प चुन ले। या तो उसके ट्रक को आग लगा दी जाए अथवा वह पैर में गोली खाने के लिए तैयार रहे। अंतत: आतंकियों ने उसके ट्रक को आग लगा दी। अब ट्रक की मरम्मत में डेढ़ लाख रुपये खर्च होंगे। व्यापारी ने कहा कि इस घटनाक्रम ने उसे डरा दिया है। अब तक 40 घटनाएं सामने आईं
दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि सितंबर के मध्य तक आतंकी धमकियों और पिटाई की कम से कम चालीस घटनाएं सामने आ चुकी हैं। मस्जिदों के तय समय पर खोल रहे हैं दुकान
श्रीनगर के सिविल लाइंस इलाके के जवाहर नगर बाजार के एक व्यवसायी रियाज वानी ने कहा, हम स्थानीय मस्जिदों से जो समय तय किया गया उसके हिसाब से सुबह दुकान खोलते हैं और नौ बजे बंद कर देते हैं इसके बाद शाम को छह बजे दुकान खोल कर रात में 10 बजे बंद कर रहे हैं।

कश्मीर को दहलाने के लिए आतंकियों का नया प्लान, इस तरह साजिश रच रहा मसूद अजहर

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने और कश्मीर में इसे मिल रहे जनसमर्थन से हताश आतंकी संगठन ने अब नई साजिश रची है। उसने जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान के मंसूबों को पूरा करने के लिए एक नया मुखौटा वारिस-ए-शौहदा सक्रिय किया है। इस गुट में शुरुआत में 50 खूंखार आतंकी भर्ती किए गए हैं।

इसकी कमान जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर के पास नहीं, बल्कि उसके भाई मुफ्ती रऊफ असगर के पास है। क्योंकि मसूद अजहर फिलहाल बीमार है। सूत्रों ने बताया कि जैश द्वारा तैयार किए गए नए गुट में अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादियों की भर्ती की जा रही है। इन जिहादियों को पाकिस्तान के बहावलपुर में, जहां जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय है, के पास बने दो ट्रेनिंग कैंपों मरकज-ए-सुभान अल्लाह और मरकज उस्मान-अली के अलावा पेशावर में 12 अगस्त से विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।

इनके साथ कश्मीरी आतंकी संगठन अल उमर मुजाहिदीन के 30 से 40 आतंकी भी शामिल हैं। यह वह आतंकी हैं, जिन्हें इसी साल की शुरुआत में मुश्ताक लटरम ने अफगानिस्तान स्थित अलकायदा के कैंप में भेजा था। डाउन-टाउन श्रीनगर के रहने वाले मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ लटरम को भारत सरकार ने कंधार हाईजैक के दौरान मसूद अजहर के साथ ही रिहा किया था।

अस्पताल से ही वीडियो कांफ्रेंस कर रहा मसूद अजहर

जैश-ए-मोहम्मद का नया गुट मौलाना मसूद अजहर के दिमाग की ही उपज है। वह इस गुट की गतिविधियों की लगातार निगरानी कर रहा है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर उसका भाई और करीबी मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर ही जैश-ए-मोहम्मद की जिहादी गतिविधियों का संचालन कर रहा है। बीमार अजहर अस्पताल से ही जिहादियों की नई फौज को फोन पर या फिर वीडियो कांफ्रेंस के जरिए ही संबोधित कर रहा है।

जम्मू कश्मीर की संवैधानिक स्थिति में बदलाव के बाद पाकिस्तानी सेना ने जब कश्मीर में अपने जिहादी मंसूबों को गति देने के लिए उससे संपर्क किया था तो उसने सबसे पहले अपने सभी प्रमुख साथियों की रिहाई और बालाकोट कैंप को फिर से बहाल करने की शर्त रखी थी। इसके बाद उसने अपने भाई को रावलपिंडी में आइएसआइ द्वारा आयोजित बैठक में भाग लेने भेजा था।

सूत्रों के मुताबिक जैश का नया संगठन जब भी कार्रवाई करेगा, उसकी जिम्मेदारी जैश नहीं लेगा। क्योंकि पाक, दुनिया को दिखाना चाहता है कि कश्मीरी आतंकी ही जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले कर रहे हैं।

जैश ने पाकिस्तान के विभिन्न शहरों वाबी खैबर पख्तूनख्वा और चरसादा में भर्ती भी की है। इसके अलावा नए गुट के आतंकियों को कश्मीर में धकेलने के साथ ही पहले से तैयार करीब 85 आतंकियों को अलग-अलग गुटों में बांटा है।

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