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NDTV के लिए बजी खतरे की घंटी, जब सामने आई ये रिपोर्ट

मीडिया समूह ‘एनडीटीवी’ (NDTV) की आर्थिक स्थिति इन दिनों कुछ अच्छी नहीं चल रही है। 30 सितंबर 2019 को समाप्त हुई तिमाही और छह महीनों के अन-ऑडिट (un-audit) वित्तीय परिणामों पर नजर डालें तो पता चलता है कि कंपनी को कुल 10.16 करोड़ और इस अवधि में1.17 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है।

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी की जितनी संपत्ति है, उससे लगभग 88.92 करोड़ रुपए ज्यादा तो देनदारियां हो गई हैं। ‘एनडीटीवी’ की ऑडिटिंग करने वाली फर्म ‘BSR & Associates LLP’ की रिपोर्ट बताती है, ‘कंपनी के लिए यह काफी चिंता की बात है। हालांकि, प्रबंधन का कहना है कि अनिश्चितता की स्थिति को दूर करने के लिए कंपनी की ओर से कुछ कदम उठाए गए हैं।’

इस ब्रॉडकास्टर की वित्तीय स्थिति के बारे में सीए मनीष मल्होत्रा का कहना है, ‘कंपनी की वर्तमान संपत्ति में कमी हो रही है और पिछले तीन महीनों की बैलेंस शीट के अनुसार कंपनी की देनदारियां बढ़ी हैं। ऑपरेटिंग कॉस्ट और सैलरी बढ़ने के साथ ही कंपनी की आय में कमी के कारण इसके प्रॉफिट में कमी आई है। कंपनी ने नुकसान दर्ज किया है और यदि ऐसा जारी रहा तो कंपनी को अपनी ऑपरेशनल कॉस्ट यानी परिचालन लागत को कम करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

मल्होत्रा के अनुसार,’पिछली वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के मुकाबले इस वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के ग्रॉस रेवेन्यू में करीब 28 प्रतिशत की कमी आई है और इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही की तुलना में यह करीब 38 प्रतिशत कम है।‘ उनका कहना है, ‘इस वित्तीय वर्ष के कुलछमाही रेवेन्यू को देखें तो पिछले वित्तीय वर्ष की छमाही के मुकाबले 13388 लाख रुपए से घटकर यह 11811 लाख रुपए रह गया है।’

इससे पहले एनडीटीवी’ उस समय चर्चाओं में आया था, जब ‘भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड’ (SEBI) ने ‘एनडीटीवी’ के प्रमोटर्स प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय पर मैनेजमेंट में दो साल तक कोई भी पद लेने पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही दोनों पर दो साल के लिए प्रतिभूति मार्केट (securities market) से जुड़े रहने पर भी रोक लगा दी गई थी। इनके खिलाफ व्यापारिक नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में यह कार्रवाई की गई थी। इससे पहले 14 मार्च 2018 को तीनों प्रमोटर्स- प्रणॉय रॉय, राधिका रॉय और ‘आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड’ (RRPR Holdings Pvt. Ltd) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

इस मामले में 26 अगस्त 2017 और दिसंबर 2017 को शिकायतें मिलने के बाद सेबी की ओर से मामले का जांच की गई थी। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि ‘आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड’, ‘एनडीटीवी’ के प्रमोटर्स और डायरेक्टर प्रणॉय रॉय व राधिका राय ने ‘भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड’ (सेबी) अधिनियम 1992 के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। इसके साथ ही एनडीटीवी के शेयरहोल्डर्स द्वारा लोन एग्रीमेंट के बारे में दी गई जानकारी में भी नियम-कायदों का पालन नहीं किया गया है। इस बारे में ‘एनडीटीवी’ प्रमोटर प्रणॉय राय से संपर्क किया है, पर फिलहाल उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है।

वरिष्ठ पत्रकार मधु त्रेहान ने अचानक लिया ये बड़ा फैसला
वरिष्ठ पत्रकार मधु त्रेहान ने ‘न्यूजलॉन्ड्री डॉटकॉम’ के साथ अपना सात साल पुराना सफर खत्म करने का फैसला लिया है। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसकी जानकारी देते हुए उन्होंने लिखा है कि अब वह अपने परिवार के साथ समय बिताना और कुछ नया करना चाहती हैं। ‘न्यूजलॉन्ड्री’ की सर्वेसर्वा मधु ने अपने जीवन के 50 साल पत्रकारिता को दिए हैं। उल्लेखनीय है कि वह ‘इंडिया टुडे’ के एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी की बहन हैं और मैगजीन की संस्थापक संपादक भी रही हैं।

अपने विदाई संदेश में मधु ने लिखा है, ‘लगभग 50 साल की पत्रकारिता के बाद अब कुछ नया करने का समय है। मैं फ्रीलांसर के तौर पर लिखती रहूंगी, लेकिन फिलहाल मैं अपने परिवार के साथ कुछ वक्त बिताना चाहती हूं। मैं ‘न्यूजलॉन्ड्री’ के एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी मैनेजिंग एडिटर रमन किरपाल को सौंपती हूं।’

गौरतलब है कि मधु त्रेहान ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। न्यूयॉर्क में रहने के दौरान वह संयुक्त राष्ट्र के प्रेस विभाग से जुड़ीं और फिर साप्ताहिक अखबार ‘इंडिया अब्रॉड’ के संपादक की भूमिका निभाई। 1975 में भारत लौटने पर उन्होंने अपने पिता वीवी पुरी के साथ मिलकर ‘इंडिया टुडे’ मैगजीन की शुरुआत की। हालांकि, 1977 में वह अपने भाई अरुण पुरी को मैगजीन की जिम्मेदारी सौंपकर वापस न्यूयॉर्क चली गईं। 1986 में अपनी वापसी पर उन्होंने भारत की पहली विडियो मैगज़ीन ‘न्यूजट्रैक’ लॉन्च करके तहलका मचा दिया।

मधु त्रेहान ही एकमात्र ऐसी पत्रकार हैं, जिन्होंने 1994 में मुंबई बम धमाके के दोषी याकूब मेनन का इंटरव्यू लिया था। मधु कई किताबें भी लिख चुकी हैं। फरवरी 2012 में उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर डिजिटल मीडिया में कदम रखा और ‘न्यूजलॉन्ड्री डॉटकॉम’ की स्थापना की। तभी से वह इसके एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी संभाल रहीं थीं।

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