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मोदी सरकार की चुनावी सौगातों से खजाने पर पड़ेगा 1 लाख करोड़ रुपये का बोझ

नई दिल्ली 19 जनवरी 2019 ।  आम चुनाव को देखते हुए केंद्र सरकार लोक-लुभावन घोषणाओं को हरी झंडी दे सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार किसान और गरीब आदमी मोदी सरकार की प्राथमिकता में हैं. कई मीडिया हाउस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि मोदी सरकार इस वर्ग को खुश करने के लिए बिना ब्याज के लोन, प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डायरेक्ट कैश ट्रांसफर, गरीबों के खाते में न्यूनतम पैसा भेजने संबंधी योजनाओं को लागू कर सकती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो देश की अर्थव्यवस्था पर 1 लाख करोड़ रुपये का बोझ बढ़ सकता है.

अर्थव्यवस्था पर बढ़ेगा बोझ
रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अगर सरकार ब्याज-मुक्त लोन देती है तो उसके ऊपर 12,000 करोड़ रुपये बोझ आएगा. हालांकि, इतने पैसों से कुछ नहीं होगा.

सरकार को इसके अलावा 40,000 करोड़ रुपये अलग-अलग स्कीमों के लिए भी खर्च करने होंगे. वहीं, निजी और कॉमर्शियल टैक्स में कटौती भी सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचा सकती है. इससे सरकार को करीब 25,000 करोड़ के राजस्व में कमी होगी.

सरकार किसानों के खाते में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 2000-4000 रुपये भेजने वाली स्कीम शुरू कर सकती है. यह स्कीम बहुत खर्चे वाली है लेकिन काफी फायदेमंद भी साबित हो सकती है.

सरकार कर सकती है बड़ी घोषणाएं
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पिछले साल पांच राज्यों के हुए विधानसभा चुनाव में तीन अहम राज्यों को अपने हाथ से गंवा बैठी है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह किसानों का गुस्सा था क्योंकि सरकार उनकी लागत के हिसाब से फसल की कीमत मुहैया नहीं करा पा रही थी.

इस चुनाव ने निजी तौर पर पीएम मोदी की अजेय छवि को काफी नुकसान पहुंचाया. इसीलिए कई मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि सरकार किसानों को राहत देने के लिए कई बड़ी घोषणाओं का ऐलान 1 फरवरी से शुरू होने वाले बजट में कर सकती है. हालांकि, अभी इस पर कोई निश्चित फैसला नहीं किया गया है. लेकिन, सूत्रों का कहना है कि सरकार डायरेक्ट फंड ट्रांसफर और ब्याजमुक्त कर्ज देकर किसानों का दिल जीतने की कोशिश करेगी.

छोटी कारोबारियों के लिए हो चुकी हैं बड़ी घोषणाएं
मोदी सरकार ने छोटे कारोबारियों को जीएसटी के दायरे से बाहर कर दिया है. सरकार मानती है कि इससे लोगों की आय बढ़ेगी और वे व्यक्तिगत रूप वाले टैक्सों का भुगतान करेंगे.

सामान्य वर्ग के कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने के बाद सरकार कॉलेजों में सीटों की संख्या भी बढ़ाने जा रही है. हालांकि, मोदी सरकार की इस पहल को विपक्षी दल चुनावी स्टंट बता रहे हैं.

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