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RSS के गढ़ में BJP की हालत खराब, इन 66 सीटों पर मंडरा रहा है खतरा

नई दिल्ली 29 अक्टूबर 2018 । चौथी पारी के लिए आतुर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए इस बार नए चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में है। इस स्थिति को उज्जैन में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिनिधि सभा ने पहले ही भांप लिया था। भाजपा नेताओं को इसे लेकर वर्ष की शुरुआत में ही संघ की और से आगाह कर दिया गया था। यही स्थिति वर्तमान में निर्मित हो गई है। 66 में से कई स्थानों पर भाजपा की स्थिति न निगलने और न उगलने के हालात में आ गई है।

मप्र में मालवा-निमाड़ को भाजपा एवं संघ का गढ़ माना जाता है, इस क्षेत्र में संघ की मजबूत पकड़ है, लेकिन आगामी चुनाव में 66 में से भाजपा की वर्तमान 56 सीटों पर बड़े उलटफेर की स्थिति सामने आ रही है। इसी के चलते सबसे ज्यादा टिकटों की कटौती संघ के गढ़ मालवा-निमाड़ में होगी, जहां भाजपा के पास 66 सीटों में से 56 सीट हैं। इनमें से करीब 25 विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं। साथ ही मध्यभारत क्षेत्र में भी विधायकों के टिकट काटने पर मंथन चल रहा है।

साल की शुरुआत जनवरी माह के प्रारंभ में उज्जैन में संघ के प्रतिनिधि सभा की बैठक भारत माता मंदिर के लोकार्पण अवसर पर हुई थी। इस बैठक के बाद संघ की और से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को आगाह करने की जानकारी सामने आई थी। प्रतिनिधि सभा में जो फीडबैक सामने आया था वह समाज के हर वर्ग की और से आए प्रतिनिधियों ने दिया था। उसी आधार पर संघ ने भाजपा के अगेवानों को तत्काल ही चेता दिया था।

विधानसभा चुनाव का आगाज होने के बाद भाजपा और संघ पदाधिकारयों के बीच हुई गोपनीय बैठक में लगभग तय है कि मालवा और निमाड़ का गढ़ बचाने के लिए इस बार आधे से ज्यादा मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जाएं। खासकर अपराधिक छवि के विधायकों की तो हर हाल में छुट्टी होना है। मालवा में 37 एवं निमाड़ में 29 विधानसभा सीट हैं। यानी इस क्षेत्र में 66 विधानसभा सीट हैं, जिनमें से 56 सीट भाजपा के कब्जे में हैं, जबकि कांग्रेस के पास महज 9 सीट हैं।

इसी तरह मध्यभारत भी संघ का प्रांत हैं। जिसमें भोपाल, ग्वालियर-चंबल संभाग आते भी आते हैं। इस भोपाल होशंगाबाद में 36विधानसभा सीटों में से 29 भाजपा एवं 6 कांग्रेस के पास हैं। इसी तरह ग्वालियर-चंबल में 34 सीटों में से 20 सीट भाजपा एवं 12 सीट कांग्रेस के पास हैं। संघ एवं भाजपा के सर्वे में इन क्षेत्रों में पार्टी की हालत भी खराब है। ऐसे में यह तय किया गया कि कार्यकर्ता एवं जनता की नाराजगी दूर करने के लिए ज्यादा से ज्यादा विधायकों के टिकट काटे जाएंगे।

मालवा में सबसे ज्यादा खतरा
उज्जैन संभाग की 29 सीटों में से 28 सीटों पर भाजपा का कब्जा है। सिर्फ मंदसौर जिले की सुवासरा सीट पर कांग्रेस के हरदीपसिंह डंग ने कांग्रेस पक्ष से मोर्चा संभाल रखा है।श्री डंग क्षेत्र में काफी वजुद रखते हैं।यही एक मात्र सीट कांग्रेस के पास है। इस क्षेत्र में भाजपा को आधी सीटें खोने का खतरा है। ऐसे में विवादित और दागी चेहरों को बदला जाना तय है। साथ ही ऐसे विधायक, जिनकी सर्वे रिपोर्ट खराब आई है, उनका भी टिकट कटना है।

टिकट चयन में संघ का रहेगा दखल
मालवा-निमाड़ में नए चेहरों को टिकट देने में संघ की रिपोर्ट की अहम भूमिका रहेगी। हालांकि संघ की ओर से किसी नेता विशेष के नाम पर जोर नहीं दिया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के प्रवास के दौरान संघ अपनी रिपोर्ट दे चुका है। शाह के दखल के बाद ही मप्र भाजपा ने संघ की रिपोर्ट पर अमल करना शुरू किया है। इस क्षेत्र में संघ ने जमीनी स्तर पर काम करना भी शुरू कर दिया है।

कलेक्टर ने खुद को दी क्लीन चिट,कहा-कार्रवाई करना जरूरी था
मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में दशहरे के चल समारोह में पुलिस और हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प और लाठीचार्ज के मामले में विदिशा कलेक्टर ने खुद को क्लीन चिट दी है।

विवाद के बाद हिंदू उत्सव समिति ने चुनाव आयोग से एसपी और जिला कलेक्टर को हटाने की मांग करते हुए शिकायत की थी। आयोग ने पूरे मामले पर कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी थी। कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह ने चुनाव आयोग को पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट भेज दी है।

आयोग के सौंपी रिपोर्ट में कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि हादसा विभिन्न आयोजकों के गुटों के बीच हुई लड़ाई से हुआ है। इन आयोजकों के कई गुट हैं जिसके चलते इनमें अच्छे रिश्ते नहीं है। इनके खराब रिश्तों का इतिहास ग्वाह है। घटना वाली दिन भी यही हुआ था। सनातन हिंदू उत्सव समिति, हिंदू जागरण मंच, राष्ट्रीय फुले ब्रिगेड और अन्य गुटों में झड़गा हुआ। इनमें से ज्यादातर कार्यकर्ता नशे में थे और एक दूसरे पर फंड के गलत इस्तेमाल को लेकर आरोपल लगा रहे थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि विसर्जन वाले दिन रात 10 बजे के बाद जब डीजे सिस्टम बंद करने के लिए कहा गया तो कुछ ने आदेश माना जबकि कुछ कार्यकर्ता और आयोजक प्रशासन के साथ झगड़ा करने लगे। जिला प्रशासन और पुलिस ने हालातों को बिगड़ने से बचाने की कोशिस की लेकिन आयोजकोंं के कुछ गुट हंगामा करने लगे और उन्होंने पूजा पंडाल के साथ तोड़ फोड़ शुरू करदी।

कार्रवाई करना जरूरी था

हालातों पर काबू पाने के लिए पुलिस ने हल्का बल उपयोग किया। उन्होंने रिपोर्ट में कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करना जरूरी थी।

गौरतलब है कि 19 अक्टूबर को दुर्गा विसर्जन के चल समारोह में पुलिस और हिन्दू उत्सव समिति के लोगों के बीच विवाद हो गया था। पुलिस ने आचार संहिता का हवाला देते हुए हिन्दू उत्सव समिति के मंचों के माइक बंद करा दिए थे। इधर माइक से झांकी समितियों के नाम एनाउंस नहीं होने से नाराज कार्यकर्ताओं ने दो जगह मंच तोड़ दिए। जिसके बाद पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाई थी। इसमें कार्यकर्ताओं के अलावा झांकी देखने आए लोग भी घायल हो गए थे।

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