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बहुत चिंताजनक है अर्थव्यवस्था की हालत : मनमोहन सिंह

नई दिल्ली 2 सितम्ब 2019 । नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) अर्थव्यवस्था की हालत को ‘बहुत चिंताजनक’ बताते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को सरकार से अनुरोध किया कि वह ‘बदले की राजनीति’ को छोड़े और अर्थव्यवस्था को मानव-रचित संकट से बाहर निकलने के लिए सही सोच-समझ वाले लोगों से संपर्क करे। उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी में जल्दबाजी को मानव रचित संकट बताया है।

कांग्रेस नेता का कहना है कि यह आर्थिक नरमी मोदी सरकार के चौतरफा कुप्रबंधन की वजह से है। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘वर्तमान में अर्थव्यवस्था की हालत बहुत चिंताजनक है। पिछली तिमाही में जीडीपी की वृद्धि मात्र पांच प्रतिशत तक सीमित रहना नरमी के लम्बे समय तक बने रहने का संकेत है। भारत में तेजी से वृद्धि की संभावनाएं हैं लेकिन मोदी सरकार के चौतरफा कुप्रबंधन के कारण यह नरमी आयी है।’’ सिंह ने कहा कि देश के युवा वर्ग, किसान, खेतीहर मजदूर, उद्यमी और वंचित तबके को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत इस रास्ते और आगे नहीं बढ़ सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह बदले की राजनीति बंद करें और अर्थव्यवस्था को इस मानवरचित संकट से बाहर निकालने के लिए सही सोच-समझ के लोगों से सलाह ले।’’ सिंह ने कहा कि खास तौर से विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि दर का केवल 0.6 प्रतिशत रहना बिशेष रूप से चिंताजनक है। पूर्व प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि संस्थाओं को बर्बाद किया जा रहा है और उनकी स्वायत्तता छीनी जा रही है।

भारतीय रिजर्व बैंक से सरकारद्वारा 1.76 लाख करोड़ रुपये लिए जाने पर मनमोहन सिंह ने कहा कि इतनी बड़ी राशि सरकार को देने के बाद यह किसी भी मुश्किल से निकल पाने की आरबीआई की क्षमता की परीक्षा भी होगी।

यह रेखांकित करते हुए कि घरेलू मांग में नरमी है और खपत का दर 18 महीने के सबसे निचले स्तर पर है, वहीं जीडीपी का विकास दर 15 साल में सबसे कम है, सिंह ने कहा, ‘‘कर से प्राप्त होने वाले राजस्व में वृद्धि अभी भी बहुत कम है। कर संग्रह में उछाल की जो उम्मीद थी वह नजर नहीं आ रही है, कारोबारी, चाहे छोटे हों या बड़े… उन्हें परेशान किया जा रहा है, कर आतंकवाद में कमी नहीं आयी है। निवेशकों का उत्साह डांवाडोल है। इस आधार पर तो आर्थिक नरमी से उबरना संभव नहीं लगता।’’

बिना रोजगार सृजन वाले वृद्धि के लिए मोदी सरकार की नीतियों को दोषी बताते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि सिर्फ ऑटोमोबाइल सेक्टर में साढ़े तीन लाख से ज्यादा नौकरियां गयी हैं। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर नौकरियां गयी हैं और इससे सबसे ज्यादा नुकसान कमजोर तबके के लोगों को हुआ है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत की हालत बहुत खराब है क्योंकि किसान को फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और ग्रामीण क्षेत्र की आय घटी है।

मनमोहन सिंह का कहना है कि मोदी सरकार मुद्रास्फीति के जिस कम दर का प्रचार करती रहती है उसका सबसे प्रतिकूल असर किसानों और उनकी आय पर पड़ रहा है।

GDP के बाद मोदी सरकार को GST में भी झटका, कलेक्शन 1 लाख करोड़ से नीचे लुढ़का

गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) कलेक्शन के मोर्चे पर मोदी सरकार को एक बार फिर झटका लगा है. अगस्त महीने में जीएसटी कलेक्शन फिर 1 लाख करोड़ रुपये ने नीचे रहा है. राजस्व विभाग (Department of Revenue) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में कुल 98,203 करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन हुआ है.

राजस्व विभाग की मानें जीएसटी के जरिये अगस्त में कुल 98,203 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसमें 24 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सिर्फ इंपोर्ट से मिली है.

जीएसटी में केंद्र और राज्य दोनों का हिस्सा
आंकड़ों के मुताबिक कुल जीएसटी कलेक्शन 98,203 करोड़ रुपये में केंद्र और राज्य दोनों का हिस्सा है. 98 हजार करोड़ में से 17,733 करोड़ से अधिक की राशि केंद्र सरकार की है, जबकि 24,239 करोड़ राशि राज्यों को मिली है, जबकि 48,958 करोड़ रुपये आईजीएसटी से मिले हैं.

वहीं राजस्व विभाग के मुताबिक जुलाई से लेकर 31 अगस्त 2019 तक कुल 75.80 लाख लोगों ने जीएसटीआर 3बी के तहत रिटर्न भरा है. जिससे केंद्र सरकार को करीब 40 हजार करोड़ रुपये राजस्व मिला है.

पिछले अगस्त की तुलना में 4.51% का इजाफा
मालूम हो कि वस्तुओं और सेवा के ऊपर लगने वाले कर के दो हिस्से होते हैं, जिनमें से एक हिस्सा केंद्र और दूसरा राज्य सरकार के पास जाता है. इससे पहले पिछले साल अगस्त महीने में कुल 93,960 करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन हुआ था. पिछले साल के अगस्त महीने की तुलना में इस साल जीएसटी कलेक्शन में 4.51 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

गौरतलब है कि जुलाई-2019 में यह राशि 1,02,083 करोड़ रुपये रही थी. जून में यह राशि 99,939 करोड़ रुपये रही थी. इस तरह से जून और जुलाई की तुलना में अगस्त में गिरावट दर्ज की गई है.

जीडीपी के मोर्चे पर भी बड़ा झटका

गौरतलब है कि आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार को जीएसटी के पहले जीडीपी का झटका लगा. देश की विकास दर में गिरावट दर्ज हुई है. पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में विकास दर 5.8 फीसदी से घटकर 5 फीसदी हो गई. अगर सालाना आधार पर तुलना करें तो करीब 3 फीसदी की गिरावट है. एक साल पहले इसी तिमाही में जीडीपी की दर 8 फीसदी थी.

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