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तीसमार खां बनने से देश का उद्धार नहीं होगा

नई दिल्ली 12 अप्रैल 2019 । तीसमार खां टाइप हीरो बनने से देश का उद्धार नहीं होगा. थोड़ा कड़वी लगने वाली यह बात कही है पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने. वे यहां आल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन के एक समारोह में कारपोरेट दिग्गजों को संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि देश को आज ऐसे लीडर चाहिए जो देशवासियों की लगतार बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा कर सकें. देश को गरीबी मुक्त करने की दिशा में अब भी लंबा फासला तय करना है. मतलब वह आदमी की तरक्की का वह बिंदु अभी छूना बाकी है, जो ठीक-ठाक हो.

पूर्व राष्ट्रपति की गिनती अत्यंत विद्वान नेताओं में की जाती है. उन्हें अर्थशास्त्र का पंडित माना जाता है. वे वित्तमंत्री भी रह चुके हैं. यही कारण है कि मुखर्जी जब कुछ कहते हैं तो पूरा देश सुनता है.

अपने भाषण में उन्होंने कहा कि फोर्ब्स लिस्ट में भारतीय अरबपतियों की संख्या साल-दर-साल बढ़ रही है. यह अच्छी बात है लेकिन इससे भी बड़ी और अहम बात यह होती कि भारत का मध्य वर्ग का आकार हर साल बढ़े.

कीर्ति और शत्रुघ्न के बाद यशवंत सिन्हा के कांग्रेस में जाने की अटकलें

कीर्ति आजाद और शत्रुघ्न सिन्हा के बाद अब पूर्व बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा कांग्रेस में शामिल होंगे? झारखंड के सियासी गलियारों में इसको लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. वैसे प्रदेश कांग्रेस ने इस बात का संकेत दिया है कि पार्टी यशवंत सिन्हा के संपर्क में है और यशवंत सिन्हा भी कांग्रेस के संपर्क में हैं.

प्रदेश कांग्रेस के महासचिव आलोक दुबे ने कहा कि यशवन्त सिन्हा देश के कद्दावर नेता रहे हैं. ऐसे में अगर वह कांग्रेस में आना चाहते हैं तो उनका स्वागत है. बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने अभी तक हजारीबाग सीट पर उम्मीदवार तय नहीं किया है.

आलोक दुबे के कहा कि यशवंत सिन्हा ने कांग्रेस से संपर्क साधा है और कांग्रेस भी ऐसा बड़े नेताओं को साथ लेने के लिए इच्छुक है. ऐसे में अगर वे कांग्रेस में आते हैं तो हजारीबाग सीट पर उनका स्वागत रहेगा.

बता दें कि हजारीबाग सीट पर कांग्रेस ने अब तक उम्मीदवार नहीं उतारा है. जबकि बीजेपी की तरफ से यशवंत सिन्हा के बेटे और केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा चुनावी मैदान में हैं. बुधवार (10 अप्रैल) को उन्होंने अपना पर्चा भर दिया. पिता की इस सीट पर जयंत सिन्हा ने 2014 में पहली बार जीत दर्ज कराई. उससे पहले यशवंत सिन्हा तीन बार यहां से सांसद रहे.

पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा पहली बार 1998 में हजारीबाग सीट से विजयी हुए थे. उसके बाद 1999 में भी वे विजयी रहे, लेकिन 2004 में उन्हें भाकपा प्रत्याशी भुवनेश्वर प्रसाद मेहता के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा था. लेकिन, वर्ष 2009 के चुनाव में उन्होंने इस हार का बदला ले लिया. वर्ष 2014 के चुनाव में उन्होंने अपने बेटे जयंत सिन्हा के लिए यह सीट छोड़ दी. बाद में नाराजगी के चलते बीजेपी से भी इस्तीफा दे दिया.

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