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‘मामा’ की बढीं मुश्किलें… 30 सितंबर की बैठक में वो होने जा रहा है जो अब तक नहीं हुआ!

भोपाल 24 सितम्बर 2018 । लेकिन इस बैठक मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस शामिल नहीं हो रही है। लोकतांत्रिक अभियान के संयोजक गोविंद यादव ने को यहां जारी एक बयान में कहा, “संवैधानिक लोकतंत्र बचाने एवं वैकल्पिक राजनीति के लिए आगामी राज्य विधानसभा, लोकसभा चुनावों के मद्देनजर गैर भाजपा दलों का महागठबंधन बनाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों की बैठक 30 सितंबर को यहां बुलाई गई है।”

यादव के अनुसार, बैठक में लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद), मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(भाकपा), बहुजन संघर्ष दल, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय समानता दल, प्रजातांत्रिक समाधान पार्टी को आमंत्रित किया गया है।

बैठक में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को आमंत्रित न करने के सवाल पर यादव ने कहा, “हमारा उद्देश्य हरहाल में भाजपा को रोकना है, और हम इसके लिए कांग्रेस के साथ हमेशा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। चुनाव से पहले भी और चुनाव के बाद भी। कांग्रेस के साथ बातचीत जारी है।”

यादव ने बताया कि बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए विपक्षी दलों का महागठबंधन बनाने पर चर्चा की जाएगी और आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा तय की जाएगी।

MP Elections 2018 मैं नेताओं की तरह लच्छेदार भाषण नहीं दे सकता
मैं कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं जो लच्छेदार भाषण देकर तालियां बटोर सकूं, लेकिन सच्चाई से रूबरू कराके आंखे जरूर खोल सकता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश में कहते हैं कि योग्यता को सम्मान मिलना चाहिए, लेकिन यही बात वे देश में सार्वजनिक रूप से कहने की दम नहीं दिखा पा रहे हैं। यह बात सपाक्स (सामान्य पिछड़ा अल्पसंख्यक कल्याण समाज संस्था) के प्रदेश संरक्षक व पूर्व आइएएस हीरालाल त्रिवेदी ने कही। त्रिवेदी शनिवार को सागर में सपाक्स की बैठक को संबोधित कर रहे थे, यह बैठक 30 सितंबर को भोपाल में आयोजित संघ के महासम्मेलन की तैयारियों को लेकर आयोजित की गई थी। इन्हीं तैयारियों को लेकर त्रिवेदी प्रदेश भर के जिलों में दौरा कर रहे हैं। बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो पीएम का है वही हाल प्रदेश मुखिया शिवराज सिंह का है जो अब कह रहे हैं कि बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होगी, यह दम उन्होंने तब क्यों नहीं दिखाया जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रद्द किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि भाजपा वीर सावरकर की अनुयायी हैं, लेकिन उन्हीं के सिद्धांतों का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे पहले त्रिवेदी के नेतृत्व में सिविल लाइन से सपाक्स की वाहन रैली आयोजित की गई। जो शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए रवींद्र भवन पहुंची। जिसमें सागर के आलावा संभाग के अन्य जिलों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। रैली में हम हैं माई के लाल और भाजपा सरकार के विरोध में जमकर नारेबाजी की गई। प्रदेश संयोजक, प्रदेश मीडिया प्रभारी, संभागीय व जिला स्तर के पदाधिकारियों ने एट्रोसिटी एक्ट को लेकर अपने विचार रखे। इस दौरान प्रदेश किसान कांगे्रस के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल दुबे ने सपाक्स की सदस्यता ग्रहण की।
हीरालाल त्रिवेदी ने कहा कि हमारे जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी से लेकर हम और आप सभी डरपोक हैं। हम अपने हितों की लड़ाई लडऩे से भी डर रहे हैं आज समाज में सबसे ज्यादा भय का महौल है और हमें सबसे पहले उसी भय को दूर करना है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के लोगों का खून तो बहुत गर्म है, लेकिन अब उसने खौलना बंद कर दिया है। देश में एक न्यायसंगत संशोधन पर देश भर में आंदोलन और तोडफ़ोड़ हो जाती है, लेकिन हम अपने अधिकार के लिए भी लडऩे से घबरा रहे हैं। हम सो रहे हैं लेकिन हमें जगाने का काम २ अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ हुए आंदोलन ने किया है, इसके बाद भी लोग सामने आने से डर रहे हैं। हमारी कमजोरी यह रही है कि हम ६८ साल से नेताओं के तलबे चाट रहे हैं और वही नेता हमें आतंकवादी, हिंसक और यहां तक की रोहिंग्या भी बना दिया।
प्रदेश संयोजक पीएस परिहार, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनोज पुरोहित व पूर्व महापौर कमला बुआ ने भी सभा को संबोधित करते हुए आमजन से सपाक्स की लड़ाई में सहभागी होने की अपील की। जिला संयोजक कपिल स्वामी, जिला मीडिया प्रभारी कपिल कुमार दुबे, प्रियंक दुबे, आशीष चतुर्वेदी, रीतेश बिलथरे सहित सपाक्स के पदाधिकारियों ने फूलमालाओं से स्वागत किया। सभा का स्वागत भाषण व रूपरेखा कपिल कुमार दुबे ने रखी। कार्यक्रम का संचालन कर रहे कपिल स्वामी ने कहा कि समाज के सामान्य व्यक्ति के भविष्य को संवारने के लिए सपाक्स यह लड़ाई लड़ रहा है आज हम सचेत नहीं हुए तो हमारी आने वाली पीढ़ी इससे ज्यादा परिणाम भुगतेगी।

सभी 230 सीटों पर उतारेंगे उम्मीदवार
प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सपाक्स ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। वह सभी 230 सीट पर अपने उम्मीदवार को उतारेगी और मप्र में अपनी सरकार बनाएगी। यह ऐलान शनिवार को सपाक्स के प्रदेश संरक्षक हीरालाल त्रिवेदी ने सागर में किया। वह यहां एट्रोसिटी एक्ट के विरोध में आयोजित सभा के बाद पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल का जनप्रतिनिधि अभी तक केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के संशोधन को रद्द करने के विरोध में नहीं आया है, जबकि जबकि सुप्रीम कोर्ट के संशोधन के तत्काल बाद देशभर के एससी-एसटी के सांसद व विधायकों ने एकजुट होकर विरोध जताया था। यही कारण है कि अब अपनी बात रखने के लिए सपाक्स अपने उम्मीदवार चुनाव में उतारकर विधानसभा व लोकसभा में भेजेगा।

ये हैं मध्यप्रदेश के हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश
कमलनाथ का सपना टूट रहा है। बीएसपी से गठबंधन की संभावनाएं कम होतीं जा रहीं हैंं हालांकि कमलनाथ ने उम्मीदों का दामन नहीं छोड़ा है परंतु प्लान बी पर भी काम शुरू कर दिया है। कमलनाथ चाहते हैं कि जिस तरह गुजरात में पिछड़ा वर्ग के युवा नेता अल्पेश ठाकोर, पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, और आरक्षित जातियों की राजनीति करने वाले जिग्नेश मेवानी ने भाजपा की नाम में दम कर दी थी उसी तरह मध्यप्रदेश में भी 3 सितारों को कांग्रेस का सपोर्ट दिया जाए। उन्होंने तीन नाम खोज लिए हैं। दिग्विजय सिंह की टीम को जिम्मेदारी दी गई है कि वो इन तीनों को पर्याप्त उपलब्ध कराएं।
आदिवासी नेता हीरा अलावा
एम्स की नौकरी छोड़कर आदिवासियों की राजनीति करने आए हीरा अलावा पर कमलनाथ की नजर है। हीरा अलावा ने जय आदिवासी युवा संगठन ‘जयस’ के बैनर तले मप्र की 80 विधानसभा सीटों पर अपना प्रभाव जमा लिया है। कमलनाथ चाहते हैं कि हीरा की मेहनत का फायदा कांग्रेस को मिले। कुछ फायदा हीरा को भी दिया जाएगा। इससे पहले सीएम शिवराज सिंह ने भी हीरा अलावा को भाजपा ज्वाइन करने का आॅफर दिया था। हीरा ने वो ठुकरा दिया था। अब कमलनाथ के प्रपोजल पर हीरा क्या जवाब देते हैं, देखना होगा।

आरक्षित जातियों के नेता देवाशीष झारिया
देवाशीष जरारिया उर्फ देवता झारिया ‘देवा’ अजाक्स के महासचिव हैं। कहा जाता है कि आरक्षित जातियों के युवाओं को आकर्षित करने में देवाशीर्ष सफल रहे हैं। पुष्टि नहीं हुई है परंतु बताया जा रहा है कि देवाशीर्ष के पिता बामसेफ में कार्य करते थे। 2004 में कोई विवाद हुआ इसके बाद वो बामसेफ को छोड़कर अज़ाक्स में आ गए। अब देवाशीष भी अजाक्स की राजनीति करते हैं। खबर यह भी है कि देवाशीर्ष ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली है।

बुधनी का किसान नेता अर्जुन आर्य
दिल्ली यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट अर्जुन आर्य हाल ही में सुर्खियों में आया है। ये सुर्खियां भी उसे सीएम शिवराज सिंह के कारण मिलीं। वो बुधनी में किसानों के लिए काम कर रहे हैं। किसानों की समस्याओं को सरकार तक ले जाने के लिए अर्जुन एक उच्चशिक्षित सेतु थे परंतु अफसरशाही ने अर्जुन आर्य का पॉलिटिकल शिकार करने की प्लानिंग की। पिछले दिनों आमरण अनशन पर बैठे अर्जुन को गिरफ्तार कर लिया गया। उसे सेंट्रल जेल भेज दिया गया। इसी घटना से अर्जुन को फायदा हुआ। खुद दिग्विजय सिंह भी अर्जुन से मिलने जेल जा चुके हैं।

मप्र में नये चेहरों पर आम आदमी पार्टी का चुनावी दारोमदार
इसे चाहे सियासी मजबूरी कह लीजिये या रणनीति का हिस्सा कि मध्यप्रदेश में पहली बार सभी 230 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़कर “तीसरे ध्रुव” की संभावनाएं टटोलने जा रही आम आदमी पार्टी उम्मीदवारी के लिये नये चेहरों पर दांव लगा रही है।

आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और दल की ओर से मुख्यमंत्री पद के आधिकारिक दावेदार आलोक अग्रवाल ने रविवार को “पीटीआई-भाषा” को बताया, “हमारे उम्मीदवारों में करीब 80 फीसदी चेहरे चुनावी राजनीति के लिहाज से एकदम नये हैं। हम चुनावी रणनीति के तहत नये चेहरों को ज्यादा से ज्यादा मौका दे रहे हैं क्योंकि जनता अन्य दलों के पुराने चेहरों से ऊब चुकी है और राजनीतिक परिदृश्य में ताजगी चाहती है।” अग्रवाल ने बताया, “हमने राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों के लिये अपने उम्मीदवारों की पहली सूची 26 जून को घोषित कर दी थी. अब तक हमने 119 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिये हैं। इनमें से ज्यादातर चेहरे ऐसे हैं जो पहली बार कोई चुनाव लड़ रहे हैं।” उन्होंने बताया कि आम आदमी पार्टी संभवत: 15 अक्तूबर तक राज्य की सभी 230 विधानसभा सीटों के लिये अपने उम्मीदवार घोषित कर देगी।

बहरहाल, मध्यप्रदेश की सियासत पारंपरिक रूप से दो ध्रुवीय रही है और गुजरे बरसों में सत्ता की कमान कांग्रेस या भाजपा के ही हाथ में ही रही है। ऐसे में आम आदमी पार्टी सरीखे “तीसरे ध्रुव” के सियासी दलों के लिये इस बार कितनी चुनावी गुंजाइश है, यह पूछे जाने पर अग्रवाल कहते हैं, “हमारे लिये सबसे ज्यादा संभावनाएं हैं, क्योंकि सूबे पर पिछले 15 साल से राज कर रही भाजपा के खिलाफ जबर्दस्त सत्ताविरोधी लहर है। इसके बावजूद कांग्रेस मतदाताओं के बीच भाजपा का विकल्प बनने की स्थिति में नहीं है।” उन्होंने कहा, “मध्यप्रदेश में सियासी निर्वात पैदा हो गया है और आगामी विधानसभा चुनावों में हम इसे भरने की कोशिश करेंगे। हम दिल्ली में ऐसा पहले ही कर चुके हैं, जहां फिलहाल हमारी सरकार है।” आम आदमी पार्टी के एक प्रवक्ता ने बताया कि पार्टी ने जिन 119 उम्मीदवारों के नाम घोषित किये हैं उनमें से 94 उम्मीदवार चुनावी सियासत के लिहाज से नये हैं जिनमें पूर्व सैनिक, इंजीनियर, प्रबंधक और अन्य युवा पेशेवर शामिल हैं।

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