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इशारों-इशारों में संघ प्रमुख ने BJP और PM मोदी को भी दिए दो बड़े संदेश

नई दिल्ली 19 सितम्बर 2018 । राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) का दिल्ली में तीन दिवसीय मंथन शिविर सोमवार को शुरू हो गया. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पहले दिन राष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर विचार रखने के साथ-साथ केंद्र की मोदी सरकार का नाम लिए बिना दो बड़े संदेश दिए हैं.

संघ का मुक्त पर नहीं युक्त पर जोर

बता दें कि 2014 में देश की सत्ता पर विराजमान होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा दिया था. जबकि सरसंघचालक ने साफ कहा कि संघ मुक्त पर नहीं बल्कि युक्त पर जोर देता है. भागवत ने कहा, ‘हम लोग सर्व लोकयुक्त वाले लोग हैं, ‘मुक्त वाले नहीं. सबको जोड़ने का हमारा प्रयास रहता है, इसलिए सबको बुलाने का प्रयास करते हैं.’

भागवत ने कहा कि संघ की यह पद्धति है कि पूर्ण समाज को जोड़ना है और इसलिए संघ के लिए कोई पराया नहीं, जो आज विरोध करते हैं, वे भी नहीं. संघ केवल यह चिंता करता है कि उनके विरोध से कोई क्षति नहीं हो. उन्होंने कहा कि आरएसएस शोषण और स्वार्थ रहित समाज चाहता है. संघ ऐसा समाज चाहता है जिसमें सभी लोग समान हों. समाज में कोई भेदभाव न हो.

आजादी के बाद देश में बहुत काम हुए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेता लगातार ये बात कहते रहे हैं कि पिछले 60 सालों में देश में कोई काम नहीं हुआ है. बीजेपी के इस बात का संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में जवाब दिया. मोहन भागवत ने आजादी की लड़ाई में कांग्रेस की भूमिका की तारीफ की. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की बदौलत देश की स्वतंत्रता के लिए सारे देश में एक आंदोलन खड़ा हुआ और देश को आजादी मिली. आजादी के बाद भी कांग्रेस ने देश में काम किया है.

बीजेपी पर RSS का नियंत्रण जैसे इन 6 विवादों पर भागवत ने तोड़ी चुप्पी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने ‘फ्यूचर का भारत’ मुद्दे पर अपने लेक्चर में संघ की विचारधारा सभी के सामने रखने की कोशिश की. दिल्ली के विज्ञान भवन में बोलते हुए भागवत ने हिंदुत्व समेत ऐसे छह मुद्दों पर अपनी चुप्पी तोड़ी जिन्हें लेकर वैचारिक प्रतिद्वंदी आरएसएस को निशाने पर लेते रहे हैं.

राष्ट्रीय आंदोलन में आरएसएस की भूमिका
भागवत ने अपने व्याख्यान में संगठन के संस्थापक केबी हेडगेवार के जीवन और उनके संघर्ष के बारे में बात करते हुए कहा कि आरएसएस को समझने के लिए आपको डॉ हेडगेवार से शुरुआत करनी चाहिए. आरएसएस प्रमुख ने डॉ केशव बलराम हेडगेवार के जीवन से तीन बिंदुओं का हवाला देते हुए संघ के राष्ट्रवादी विचारधारा को चित्रित करने की कोशिश की.

उनके बारे में बताते हुए भागवत ने कहा कि वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक साल तक जेल में रहे. कांग्रेस पर बोलते हुए भागवत ने स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाने के लिए कट्टरपंथी कांग्रेस की भी प्रशंसा की. सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने स्वीकार किया, ‘देश में कांग्रेस के रूप में बड़े स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत हुई, जिसने कई महान व्यक्तित्व दिए.’

आरएसएस सहयोगी का रिमोट कंट्रोल नहीं
भागवत ने आरएसएस और उसके सहयोगियों के कार्यकलापों और आरएसएस बीजेपी और सरकार को कैसे नियंत्रित करता है, जैसे आरोपों के जवाब में कहा कि उनके सहयोगी स्वतंत्र हैं. ऐसे मुद्दों पर वह सार्वजनिक बैकठें करके जनता के सामने चर्चा और बहस करने के पक्ष में तैयार हैं. उन्होंने कहा कि सत्ता में कौन होगा, देश किस नीति को स्वीकार करेगा यह लोगों और समाज को तय करना है.

आरएसएस ध्वज
आरएसएस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने को लेकर बहुत सारे विवाद सामने आ चुके हैं. पिछले साल राहुल गांधी ने भी आरोप लगाया था कि स्वतंत्रता के 52 साल बाद भी संघ राष्ट्रीय ध्वज की बजाय भगवा ध्वज को सलाम करता है. भागवत ने अपने पहले दिन के व्याख्यान में भगवा ध्वज पर संघ की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि स्वयंसेवक संघ हर साल भगवा ध्वज को गुरु दक्षिणा देते हैं. संगठन इस प्रकार दान दक्षिणा से चलता है. आरएसएस ने हमेशा राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान किया है.

आरएसएस लोकतांत्रिक संगठन
आरएसएस को सबसे ज्यादा लोकतांत्रिक संगठन करार देते हुए भागवत ने कहा कि जब उन्हें सदस्य के तौर पर नामांकित किया गया था, उस समय एक युवा द्वारा शाखा के कार्यक्रम में भाग नहीं लेने पर उनसे सवाल किया था. भागवत ने कहा, ‘मुझे उस युवक को समझाना पड़ा कि मैं यात्रा कर रहा था और इसलिए कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सका.’

महिलाओं की भागीदारी
आरएसएस महिला विरोधी जैसे आरोपों पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि आरएसएस में एक महिला विंग, राष्ट्रीय सेवा समिति है. इसे स्वतंत्रता से पहले स्थापित किया गया था. भागवत ने कहा, ‘हमारी मां और बहन, जहां भी वे हैं, आरएसएस द्वारा किए गए कार्यों में योगदान देती रहती हैं.’

आरएसएस: इसके लक्ष्य और कार्य
भागवत ने हेडगेवार का हवाला देते हुए कहा कि संगठन का लक्ष्य सभी हिंदुओं को एकजुट करना है. यह केवल समाज में बदलाव लाने के द्वारा किया जा सकता है. उन्होंने हिंदुओं को परिभाषित करते हुए कहा, ‘ बलिदान, धैर्य, निगम और कृतज्ञता हिंदुओं के मूलभूत मूल्य हैं.’ उन्होंने कहा कि भारत की विविधता के बावजूद इन मूल्यों के द्वारा इन्हें परिभाषित किया जा सकता है.

मोहन भागवत ने बताया RSS का विचार- मुसलमानों के बिना हिंदुत्व अधूरा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भविष्य का भारत कैसा हो, इस विषय पर अपने विचार रखे. तीन दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन मंगलवार को उन्होंने संविधान से लेकर हिंदुत्व के मुद्दे पर आरएसएस का दृष्टिकोण साझा किया. इस दौरान उन्होंने ये भी बताया आरएसएस के हिंदू राष्ट्र की कल्पना कैसी है.

मोहन भागवत ने कहा, ‘हम हिंदू राष्ट्र में विश्वास रखते हैं, लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि हम मुसलमानों के खिलाफ हैं.’ ऐसा कहते हुए मोहन भागवत ने बताया कि हम वसुधैव कुटुंबकम् में यकीन रखते हैं, जहां सभी धर्म और पंत का स्थान है. उन्होंने स्पष्ट कहा, ‘हम कहते हैं कि हमारा हिंदू राष्ट्र है. हिंदू राष्ट्र है इसका मतलब इसमें मुसलमान नहीं चाहिए, ऐसा बिल्कुल नहीं होता है. जिस दिन ये कहा जाएगा कि यहां मुस्लिम नहीं चाहिए, उस दिन वो हिंदुत्व नहीं रहेगा.’

प्राचीन विचार है हिंदुत्व

उन्होंने हिंदुत्व पर तफ्सील से बात रखी. भागवत ने कहा, ‘हिंदुत्व का विचार संघ ने नहीं खोजा, यह पहले से चलता आया है. दुनिया सुख की खोज बाहर कर रही थी, हमने अपने अंदर की. वहीं से हमारे पूर्वजों को अस्तित्व की एकता का मंत्र मिला.

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