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मध्‍यप्रदेश के कर्इ जिलों में किसान आंदोलन का असर, देश के कई हिस्‍सों में सड़कों पर फिका दूध एवं सब्‍जी

नई दिल्ली 2 जून 2018 । राष्ट्रीय किसान मज़दूर महासंघ के अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा कक्‍काजी ने पत्रकारों से कहा कि 130 से ज्यादा किसान संगठन हमारे साथ हैं। यह देशव्यापी बंद है। हमने इसे ‘गांव बंद’ नाम दिया है। हम शहर नहीं जाएंगे और हम लोगों की सामान्य जिंदगी प्रभावित नहीं करना चाहते। उन्‍होंने कहा कि किसानों की आत्महत्या के विरोध में सभी किसान 10 जून दोपहर 2 बजे तक बंद रखेंगे। शर्मा ने कहा कि हमारे देश में चीनी पाकिस्तान से आ रही है। हमें कोई हिंसा नहीं करनी है, लेकिन सरकार ने हिंसा की पहल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। किसानों से जबरदस्ती मुचलके भरवाए जा रहे हैं। बीजेपी के कुछ लोग भी मानते हैं कि किसानों की मांगें जायज हैं। केवल कांग्रेस ही नहीं, हर पार्टी को चौकीदार की भूमिका निभानी चाहिए।

इधर, सूत्रों ने बताया कि इस आंदोलन का रतलाम सहित आसपास के क्षेत्रों में आज असर कम ही दिखाई दे रहा हैं। फल, सब्‍जी एवं दूध के विक्रेताआें ने पुलिस एवं प्रशासन के भरौसे शहरों में सामान पहुंचाया। मंदसौर में भी इसका कम असर दिखाई दिया। नीमच में भी मिला-जुला असर है। जिले बरेली, सिलवानी, बेगमगंज, मंडीदीप, ओबेदुल्लागंज, सांची, गैरतगंज, सुल्तानपुर सभी जगह प्रशासन ने आंदोलन से निपटने की तैयारी कर रखी हैं। उधर, भोपाल में शिव कुमार शर्मा आ गये है। उनके साथ कई किसानाें ने भी डेरा डाल दिया है।

राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ने कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर 1 से 10 जून तक ‘ग्राम बंद’ अभियान चलाएंगे। हालांकि राज्य में माहौल शांतिपूर्वक है। इसमें किसान गांव से अनाज, सब्जी, फल, दूध लेकर शहर नहीं जाएंगे। गांव के बाहर वे इन चीजों को बेचेंगे लेकिन शहर में नहीं आएंगे। यहां भारतीय किसान मजदूर संघ, किसान यूनियन, किसान जाग्रति संघ के पदाधिकारियों ने किसानों से घर घर जाकर संपर्क किया हैं।

देश का अन्नदाता सड़कों पर उतर आया है। राष्ट्रीय किसान महासंघ ने केन्द्र सरकार की कथित किसान विरोधी नीतियों के विरोध में देश के 22 राज्यों में 1 जून से 10 जून तक हड़ताल का ऐलान किया है। वहीं कई राज्यों में किसानों ने सब्जियों सहित दूध सड़कों पर गिरा दिया। किसान सब्जियों के न्यूनतम मूल्य, समर्थन मूल्य और न्यूनतम आय समेत कई मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों के आंदोलन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। किसानों ने 1 से 10 जून तक के दिनों को अलग-अलग ढंग से विरोध करेंगे। 1 से 4 जून तक वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। 5 जून को ‘धिक्कार दिवस’ मनाएंगे, 6-7 जून को शहीद शहादत दिवस मनाया जाएगा, 8-9 जून को असहयोग दिवस और 10 जून को भारत बंद का ऐलान किया गया है।

ये हैं किसानों की मांगें

फसल की लागत का डेढ़ गुना लाभकारी मूल्य दिया जाए।
किसानों को कर्जमुक्त किया जाए।
छोटे किसानों की एक आय निश्चित की जाए।
फल, दूध, सब्जी को समर्थन मूल्य के दायरे में लाकर डेढ़ गुना लाभकारी मूल्य दिए जाए।

पंजाब
फरीदकोट में किसानों ने सड़कों पर फल और सब्जियों को फेंककर विरोध जताया। वहीं होशियारपुर में किसानों ने सड़कों पर दूध बहा कर और सब्जियां फेंक कर विरोध किया गया।

हरियाणा
हरियाणा में भी किसानों ने सब्जियों की सप्लाई बंद कर दी है और यहां भी विरोध देखने को मिला। किसानों द्वारा मांगों को लेकर किए जा रहे आंदोलन का कुरुक्षेत्र में मिलाजुला असर देखने को मिला। भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि देश के करीब 172 किसान संगठन इस आंदोलन में शरीक है। किसान आंदोलन के तहत अपने उत्पादन अनाज, सब्जी, दूध, चारा शहर में बेचने के लिए नहीं जाएगा।

महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में भी किसानों की हड़ताल का असर देखने को मिला। हड़ताल के कारण दूध और सब्जियों की सप्लाई रोक दी गई है। वहीं, पुणे के खेडशिवापुर टोल प्लाजा पर किसानों ने 40 हजार लीटर दूध बहा कर विरोध जताया।

7 राज्य, 130 संगठन, पढ़ें किसानों की 10 दिन की हड़ताल पर ग्राउंड रिपोर्ट

देश के 7 राज्यों में किसानों ने आंदोलन के साथ बंद का आह्वान किया है. राष्ट्रीय किसान महासंघ ने 130 संगठनों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का ऐलान किया है. किसानों का यह 10 दिवसीय आंदोलन सब्जियों के न्यूनतम मूल्य, समर्थन मूल्य और न्यूनतम आय समेत कई मुद्दों को लेकर किया गया है.

राज्य सरकारों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शहरों में पुलिस की तैनाती कर दी है. कई जगह स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. अगर 10 दिन तक किसानों का यह आंदोलन चलता है तो शहर में सब्जियों और खाद्य पदार्थ को लेकर संकट खड़ा हो सकता है.

आंदोलन के दौरान किसानों ने किसी भी प्रकार के प्रोडक्ट को मार्केट तक पहुंचाने से मना किया है, चाहे वो सब्जी हो दूध हो या फिर कुछ और. शुक्रवार को शुरू हुए इस आंदोलन के तहत किसानों ने पुणे के खेडशिवापुर टोल प्लाजा पर 40 हजार लीटर दूध बहाया और सरकार के खिलाफ विरोध प्रकट किया.

पंजाब में फेंकी सब्जियां

किसानों ने अपनी मांगों को लेकर पंजाब के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन किया. राज्य के फरीदकोट में किसानों ने सड़कों पर फल और सब्जियों को फेंककर विरोध जताया. वहीं पंजाब के होशियारपुर में किसानों का जबर्दस्त प्रदर्शन देखने को मिला. यहां किसानों ने सड़कों पर दूध के टैंकर खाली कर दिए, सब्जियां भी फेंकी. ‘किसान अवकाश’ के दौरान पंजाब के लुधियाना में किसानों ने सड़क पर दूध बहाया. राज्य में कई जगह स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं.

मध्य प्रदेश के झाबुआ में धारा 144 लागू

मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा प्रभाव देखा जा रहा है. यहां बड़ी संख्या में किसानों ने सरकार के खिलाफ बंद का ऐलान किया है. मंदसौर के किसानों ने किसी भी हालत में सब्जी और दूध को शहर से बाहर भेजने से इनकार कर दिया है. यही नहीं, किसानों ने एमपी के मंदसौर में आंदोलन शुरू करने से पहले मंदिर में भगवान का दूध से अभिषेक किया.

खरगौन में किसानों के बंद के चलते सब्जी मंडी में सिर्फ 50 फीसदी ही सब्जियां पहुंचीं. वहीं, कुछ किसानों ने छिपकर मंडी में सब्जियों को पहुंचाया. होशंगाबाद में बंद के दौरान किसानों ने अस्पताल में मुफ्त दूध बांटने का फैसला किया, मंडी में सब्जी की आवक भी घट गई है. बता दें कि 6 जून को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंदसौर का दौरा करने वाले हैं, जिसे लेकर शिवराज सरकार अलर्ट हो गई है.

रिजर्व पुलिस फोर्स की 5 कंपनियां तैनात, लगाए गए 200 CCTV

मंदसौर में किसान आंदोलन की गंभीरता देखते हुए प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए रिजर्व पुलिस फोर्स की 5 कंपनियों को तैनात किया है. यही नहीं सुरक्षा के मद्देनजर 200 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. वहीं, राज्य के झाबुआ में धारा 144 लगा दी गई है. साथ ही प्रशासन ने किसानों से शांति बनाए रखने की अपील की है.

महाराष्ट्र में भी असर

महाराष्ट्र में भी पहले दिन से ही किसान आंदोलन का असर दिखने लगा है. यहां बुलढाणा में किसानों की हड़ताल के कारण शुक्रवार को ही दूध और सब्जियों की सप्लाई पर असर पड़ा है. वहीं, पुणे के खेडशिवापुर टोल प्लाजा पर किसानों ने 40 हजार लीटर दूध बहा कर विरोध जताया.असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है. यहां ताज नगरी आगरा में किसानों ने जमकर उत्पात मचाया. उन्होंने अपने वाहनों की फ्री आवाजाही कराने के लिए टोल पर किया कब्जा कर लिया और जमकर तोड़फोड़ की.

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