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शिप्रा में मिल रही खान नदी का मुददा लोकसभा में गूंजा

उज्जैन 4 दिसंबर 2021 ।  शिप्रा नदी में मिल रहे खान नदी के गंदे पानी और सिवरेज के पानी को रोकने और शिप्रा में खान का पानी ना मिले इसके लिए कोई ठोस पहल करने के उद्देश्य से सांसद अनिल फिरोजिया ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष इस मामले को रखा। सांसद अनिल फिरोजिया ने लोकसभा के शून्य प्रश्नकाल के दौरान कहां कि प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से बहकर प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन पहुँचने वाली खान नदी ने गंदे नाले का रूप धारण कर लिया है। इंदौर व आस-पास के तमाम उद्योगों के दूषित पानी व सिवरेज का पानी उज्जैन में त्रिवेणी के तट पर आकर मोक्ष दायनी शिप्रा नदी में मिलता है। धार्मिक महत्व है शिप्रा नदी का
सांसद फिरोजिया ने सदन में कहां कि जितना महत्व माँ गंगा नदी का है उतना ही धार्मिक महत्व माँ शिप्रा नदी का भी है। लेकिन खान नदी के दूषित व प्रदूषित पानी के शिप्रा नदी में मिलने के कारण उज्जैन के रामघाट तक शिप्रा नदी प्रदूषित हो जाती है और पानी से बदबू आने लगती है। सांसद ने सदन के माध्यम से मंत्री से आग्रह किया कि खान नदी के संरक्षण के लिए कोई स्थाई योजना बनाये, जिससे लोगों को इस समस्या से मुक्ति मिले और वह शिप्रा के जल का आचमन कर सके। ठोस योजना की आवश्यता
सांसद ने कहां कि खान नदी के जल का उपचार करने के लिए स्थायी और ठोस परियोजना बनाने की आवश्यकता है। शनिवार को ही उज्जैन में स्नान पर्व है जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचने वाले है इन श्रद्धालुओं को स्नान के दौरान खान नदी के गंदे पानी से बचाने के लिए प्रशासन अस्थायी तौर पर लाखों रुपये की लागत से मिट्टी का पाला बनाता है। लेकिन हर बार बहुत समय के बाद ये पाला टूट जाता है, इससे सरकार का लाखों रुपया खर्च भी होता है, लेकिन स्थायी हाल नहीं निकल पाता है।

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