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सरकारी रिकॉर्ड में नहीं दर्ज है महान क्रांतिकारी भगत सिंह की शहादत

नई दिल्ली 24 मार्च 2019 । महान क्रांतिकारियों भगत सिंह , सुखदेव एवं राजगुरु को जनता भले ही शहीद मानती हो, लेकिन सरकार ने अब तक अपने दस्‍तावेजों में यह दर्जा नहीं दिया है। शनिवार को इन क्रांतिकारियों की शहादत के 88 साल पूरे हो जाएंगे। लेकिन उनके वंशज आज भी शहीद का दर्जा दिलाने के लिए संघर्षरत हैं। आजादी से अब तक जितनी भी सरकारें आईं, वो इन क्रांतिकारियों को शहीद घोषित करने से बचती रहीं। भगत सिंह के प्रपौत्र यादवेंद्र सिंह संधू ने कहा है कि वे शहीदों पर सरकारों के रवैये से हैरान हैं। पिछले माह पंजाब के नवांशहर स्थित भगत सिंह के पैतृक गांव खटकड़ कलां के लोगों ने भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। उन्‍होंने देश के लिए जान गंवाने वाले भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को सरकारी दस्तावेजों में शहीद का दर्जा देने की मांग की थी।

संधू ने सवाल किया “सरकारें भगत सिंह को शहीद घोषित करने से आखिर डरती क्‍यों हैं? इसके लिए कई नेताओं से सिफारिश की गई लेकिन देश के हीरो के लिए कोई आगे नहीं आया। इसलिए अब शहीद भगत सिंह ब्रिगेड की ओर से इसके लिए कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। संबंधित दस्‍तावेज जुटा लिए गए हैं।”

अंग्रेजों ने 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल में भगत सिंह को फांसी दे दी थी। उस वक्‍त उनकी उम्र महज 23 साल थी। वह देश की आजादी के लिए ब्रिटिश सरकार से लड़ रहे थे। लेकिन देश की आजादी के सात दशक बाद भी सरकार उन्‍हें दस्‍तावेजों में शहीद नहीं मान रही। इसका खुलासा अप्रैल 2013 में गृह मंत्रालय में डाली गई आरटीआई के जवाब में हुआ है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को लेकर एक आरटीआई डालकर पूछा गया था कि भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु को शहीद का दर्जा कब दिया गया। यदि नहीं तो उस पर क्या काम चल रहा है? इस पर मंत्रालय ने कहा था कि इस संबंध में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। तब से शहीद-ए-आजम के वंशज (प्रपौत्र) यादवेंद्र सिंह संधू सरकार के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं।

सितंबर 2016 में इसी मांग को लेकर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के वंशज जलियांवाला बाग से इंडिया गेट तक शहीद सम्‍मान जागृति यात्रा निकाल चुके हैं। संबंधित दस्‍तावेजों के साथ तीन बार गृह राज्‍य मंत्री हंसराज अहीर से मिल चुके हैं। अहीर खुद संस्‍कृति मंत्रालय से इस बारे में बातचीत कर रहे हैं। लेकिन अब तक नतीजा नहीं निकला. जब हमने इस बारे में अहीर के निजी सचिव डॉ. राजेश से बात की तो उन्होंने कहा “संस्कृति मंत्रालय को पत्र लिखा गया है।” 2018 में भी इस बारे में आरटीआई डाली गई लेकिन गृह मंत्रालय ने इस बारे में जवाब नहीं दिया कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को सरकार ने शहीद का दर्जा कब दिया।

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