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शिवराज मामा की सरकार का दूध कमलनाथ सरकार में जल रहा.

खण्डवा  10 जनवरी 2019 । शिवराज मामा ने अपनें नाती-नातिन की भूख मिटानें व उनकी सेहत बनें,इसके लिये दिल खोल,सरकारी खजाना खाली करते हुए दूध भेजा,पर कमलनाथ सरकार में मामा द्वारा भेजा गया दूध अधिकारियों नें ना खुद पिया, ना गरीब के भूख से बिलख रहे बच्चों को पिलाया बल्कि शौचालय में तब तक रखे रखा, जब तक दूध सड़ ना गया।दूध के सड़नें पर भी जनपद खंडवा के अधिकारियों को शांति नहीं मिली, दूध के उन सैंकड़ों पैकेटों को जला दिया गया जो सैंकड़ों बच्चों की भूख मिटानें के अलावा उनके शरीर को तंदुरूस्त कर सकते थे।
शिवराज मामा की सरकार का दूध कमलनाथ सरकार में जल रहा.
शिवराज मामा की सरकार का दूध कमलनाथ सरकार में जल रहा.
इस घटना से सरकार द्वारा गरीबों के लिए बनाई गई योजनाओं के क्रियान्वन की जमीनी हकीकत सामनें आ गई है।जलाया गये दूध के पैकेट 2013 से लेकर 2016 तक के हैं। 2013 से 2016 के दौरान ना जानें कितनें बच्चे भूख से मर गये होंगें.? ना जाने कितने बच्चों का वजन सामान्य से कम रहा होगा ?ना जाने कितनी बच्चों की माँ अपने जिगर के टुकड़ों को भूखा देख कर रोई होंगी ?उन्होंने निश्चित ही अपनी मजबूरी को कोसते हुए सैंकड़ों बद-दुआएं दी होंगी ? भूख से बिलख रहे बच्चों की मां की बद-दुआएं जरूर उनके बच्चों के लिए शासन द्वारा भेजे गए दूध सहित अन्य खाद्य सामग्री को जलाने वाले लोगों को लगेगी ?

देश का भविष्य बनने वाले बच्चों के लिए दूध सहित अन्य सामग्रियाँ शासन द्वारा भेजी जाती है,जिसे महिला बाल विकास विभाग एवं स्कूल सहित अन्य संस्थाओं के माध्यम से गरीब के बच्चों को वितरित किया जानें का प्रावधान है।जब शासन द्वारा बच्चों के लिए भेजी जा रही खाद्य सामग्री खण्डवा
कलेक्ट्रेट से मात्र कुछ ही मीटर दूर व खुद महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी व जनपद पंचायत परिसर जहां जनपद सीईओ खुद बैठते हैं, में ही जलाई जा रही है,तो जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर क्या हाल होगा इसका अंदाजा आप स्वयं लगा सकते हैं ?जलाए गए दूध के पैकेट जनपद पंचायत खंडवा के बताए जा रहे हैं एवं जलाए गए पैकेट पर अंकित तिथि 2016 दिखाई दे रही है,जिसका मतलब साफ है कि 2016 में शासन द्वारा भेजे गए इन दूध के पैकेट को प्राथमिक शाला के माध्यम से बच्चों को पिलाया जाना था परंतु अधिकारियों की गैर जिम्मेदाराना कार्यशैली के चलते दूध जनपद पंचायत के शौचालय में पड़ा रहा एवं जब खंडवा कलेक्टर विशेष गढ़पाले नए खंडवा के सभी कार्यालयों को आईएसओ सर्टिफाइड कराने के निर्देश दिए। उसके बाद खंडवा जनपद के गोदाम में पड़े कचरे सहित दूध को जला दिया गया।
शासन द्वारा महिला बाल विकास विभाग के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों एवं पहले जनपद पंचायतों, वर्तमान में बीआरसीसी के माध्यम से स्कूलों में शासन द्वारा भेजा गया दूध वितरित करने के निर्देश हैं परंतु जमीनी स्तर पर शासन द्वारा भेजा गया यह दूध बच्चों को दिया ही नहीं जाता ? शासन द्वारा भेजा गया दूध महिला बाल विकास सहित अन्य विभागों की लापरवाह कार्यशैली के चलते पड़ा रह जाता है एवं एक्सपायर हो जाता है। जिसके बाद दूध के पैकेट को या तो फेंक दिया जाता है या जला दिया जाता है,जैसा खंडवा जनपद में देखने को मिला ?
खंडवा जनपद में जलाए गए दूध के पैकेट से अधिकारियों के मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी सवाल खड़े होना लाजमी है ?संबंधित व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारियों की भी लापरवाही स्पष्ट महसूस की जा सकती है ।

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