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मोदी सरकार ने चार साल में देश पर इतना कर्ज बढ़ा दिया है!

नई दिल्ली 21 जनवरी 2019 । 2019 का लोकसभा चुनाव सिर पर है. सरकार नई-नई योजनाएं लागू करने की सोच रही होगी जिसमें से कुछ लोकलुभावन भी होंगी. कर्ज माफ़ी या ऐसी ही कुछ रियायती कदम उठाए जाएंगे जो सरकार पर कर्ज और सरकारी खजाने को खाली करने का काम करेंगे. हालांकि ये सब होने से जनता को फायदा होता लेकिन सरकार के खजाने की हालत देखकर लग रहा है कि ऐसा करना देश को कर्जे में डुबा सकता है.

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2018 तक के डेटा के हिसाब से केंद्र सरकार पर कुल 82.03 लाख करोड़ का कर्ज हो चुका है. 2014 में यही आंकड़ा 54.90 लाख करोड़ का था. इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक सरकार की देनदारियों के ब्योरे वाले स्टेटस पेपर के आठवें एडिशन में इस बात का ज़िक्र है कि पिछले साढ़े चार साल में सरकार की देनदारियों में 49 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई हैं. केंद्र सरकार ने सरकारी क़र्ज़ पर स्टेटस पेपर में भारत सरकार की कुल देनदारियों का विश्लेषण किया है. वित्त मंत्रालय साल 2010-11 से सरकारी कर्ज पर एक सालाना स्टेटस पेपर ला रहा है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली बीमार हैं. उनके मंत्रालय की हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं है. वित्त वर्ष 2018 के पहले 8 महीने में सरकार का राजकोषीय घाटा 7.17 लाख करोड़ रहा जो तय टारगेट 6.24 लाख करोड़ के 114 फीसदी से भी ज्यादा है. यानी सरकार पहले से ही अपनी तय सीमा से ज्यादा खर्च कर चुकी है. देश की आर्थिक हालत सुधारने के लिए मोदी सरकार का राजकोषीय घाटा कम करने पर ख़ासा ज़ोर था. सरकार की कुल कमी कमाई और खर्च के अंतर को राजकोषीय घाटा कहते हैं. इसी से पता चलता है कि सरकार को कितनी उधारी की ज़रूरत है. ज्यादा खर्चे करने से राजकोषीय घाटा बढ़ जाता है.

सार्वजनिक कर्ज (Public Debt) में 51.7 फीसदी की बढ़ोतरी सरकार पर कर्ज में भारी बढ़ोतरी की एक वजह है. पिछले साढ़े चार साल में यह 48 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 73 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. पब्लिक डेट में यह बढ़ोतरी आंतरिक कर्ज (Internal Debt) में 54 फीसदी की बढ़ोतरी की वजह से हुई है, जो लगभग 68 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई. पब्लिक डेट का मतलब सरकार की जनता को कुल बकाया देनदारी से है. ये मुख्य तौर पर बॉन्‍ड्स के ज़रिए दी जाती है.

इंटरनल कर्ज का मतलब उस कर्ज से है जो सरकार अपने नागरिकों से लेती है. सरकार बॉन्‍ड और ट्रेज़री बिल ज़ारी करके उधारी लेती है. सार्वजानिक कर्ज का मतलब प्रति व्यक्ति कर्ज (Per Capita Debt) से है. यानी एक व्यक्ति के हिस्से कितना कर्ज आता है. आपने सुना होगा की भारत में बच्चा पैदा होता है तो इतने रूपये का कर्ज लेकर पैदा होता है, बस सार्वजनिक कर्ज वही कर्ज है, जो लगातार बढ़ रहा है.

सरकार में आने से पहले नरेंद्र मोदी और भाजपा ने सरकार को घाटे से निकालने के बड़े-बड़े वादे किए थे. वित्त सचिव रहे अरविंद सुब्रमन्यन के नेतृत्व में बहुत प्रयास भी किए गए लेकिन बढ़ते कर्ज की ये हालत देखकर कहा जा सकता है कि दवाई ने काम किया नहीं है. शायद अब शायद और कड़वी दवाई लेने का समय आ गया है.

आंध्रप्रदेश में BJP को लगा झटका: विधायक ने छोड़ी पार्टी, एक और छोड़ सकता है दामन
आंध्र प्रदेश में भाजपा के चार विधायकों में से एक ने रविवार को विधानसभा की सदस्यता और पार्टी से इस्तीफा दे दिया. राजमहेन्द्रवरम (शहरी) विधानसभा सीट से विधायक अकुला सत्यनारायण ने कहा कि उन्होंने अपना त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष कोडेला सिवप्रसाद राव को भेज दिया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्य भाजपा अध्यक्ष कन्ना लक्ष्मी नारायण को भी अपना इस्तीफा भेज दिया है.

बाद में सत्यनारायण ने यहां मीडिया में जारी एक बयान में अपने इस्तीफे की घोषणा की, लेकिन उन्होंने इस्तीफा देने के किसी कारण का उल्लेख नहीं किया. 2014 में पहली बार विधानसभा के लिए चुने गये पेशे से डॉक्टर सत्यनारायण ने बताया कि वह सोमवार को अभिनेता पवन कल्याण की जन सेना पार्टी में शामिल हो सकते हैं.

तेदेपा के साथ गठबंधन में 2014 में मैदान में उतरी भाजपा के निर्वाचित चार विधायकों में से सत्यनारायण भी एक थे. इस बीच, राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है कि विशाखापतनम उत्तर से भाजपा के एक अन्य विधायक पी विष्णु कुमार राजू भी पार्टी छोड़ने वाले हैं.

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