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मध्यप्रदेश में अधिमान्य पत्रकारों की संख्या 3896 है जनसंपर्क मंत्री श्री शर्मा

भोपाल  28 नवम्बर 2019 । जनसंपर्क मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ सदैव ही निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता के पक्षधर रहे हैं। मुख्यमंत्री यह मानते हैं कि निष्पक्ष पत्रकारिता सरकार का सही रूप से मार्गदर्शन करती है। श्री शर्मा ने कहा कि इसीलिए सरकार पत्रकारों के सरोकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर पत्रकारों के हित में सभी आवश्यक कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि सरकार गठन के बाद पत्रकारों को अधिमान्यता देने के लिए राज्य एवं संभाग-स्तरीय अधिमान्यता समितियों का गठन कर दिया गया है। पत्रकारों के स्वास्थ्य उपचार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान किये जाने के लिए पत्रकार संचार कल्याण समिति और पत्रकारों की कठिनाईयों के अध्ययन और सुझाव देने के लिए राज्य-स्तरीय समिति का गठन किया गया है। सरकार ने पत्रकार प्रोत्साहन एवं नवाचार के लिए तथा महिलाओं को पत्रकारिता के क्षेत्र में सुरक्षात्मक वातावरण उपलब्ध कराने और विशेष प्रोत्साहन देने के लिए महिला पत्रकारों की राज्य-स्तरीय समितियों का गठन किया है। मंत्री श्री शर्मा ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 1127 राज्य-स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। जिला-स्तरीय अधिमान्य पत्रकारों की संख्या 1947 और तहसील-स्तरीय अधिमान्य पत्रकारों की संख्या 822 है। प्रदेश में कुल 3,896 अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार हैं।

पत्रकारों को एक करोड़ 31 लाख से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई जनसंपर्क मंत्री श्री शर्मा

जनसम्पर्क मंत्री श्री पी.सी. शर्मा ने बताया कि पत्रकारों और उनके परिजनों को स्वास्थ्य उपचार के लिए सरकार आर्थिक सहायता राशि उपलब्ध करा रही है। सरकार द्वारा सामान्य बीमारियों के लिए 20 हजार रुपये तक और गंभीर बीमारियों के लिए 50 हजार तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार गठन के बाद से अब तक 422 पत्रकारों को स्वास्थ्य उपचार के लिए एक करोड़ 31 लाख 54 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है।

5 करोड़ से अधिक की प्रीमियम राशि से पत्रकारों का 10 लाख तक का बीमा कराया

मंत्री श्री शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश सरकार पत्रकारों का 10 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा करा रही है। साथ ही 4 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 2,874 पत्रकारों का बीमा करवाया गया है। इनमें 2,310 अधिमान्य और 564 गैर-अधिमान्य पत्रकार हैं। श्री शर्मा ने बताया कि बीमित पत्रकारों की प्रीमियम राशि की 75 प्रतिशत राशि 5 करोड़ 40 लाख रुपये का वहन सरकार द्वारा पत्रकारों के हित में किया गया है। चार अक्टूबर, 2019 से अब तक 60 पत्रकारों के 24 लाख रुपये के बीमा क्लेम का भुगतान किया गया है। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष 615 से अधिक पत्रकारों ने अपना बीमा कराया है।

सम्मान-निधि 7 हजार से बढ़ाकर 10 हजार की गई

मंत्री श्री शर्मा ने बताया कि सरकार पत्रकारों के सम्मान के लिए वचनबद्ध है। सरकार ने पूर्व में मिलने वाली सम्मान-निधि की राशि को 7 हजार रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया है। वर्तमान में 209 वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मान-निधि दी जा रही है। सरकार द्वारा राज्य-स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को लेपटॉप क्रय करने के लिए 40 हजार रुपये की राशि दी जा रही है। इस वर्ष 17 पत्रकारों को राशि प्रदान की गई है। श्री शर्मा ने बताया कि सरकार द्वारा अधिमान्य पत्रकारों को 25 लाख रुपये तक के आवास ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान 5 वर्ष तक दिये जाने का प्रावधान किये जाने की प्रक्रिया प्रचलन में है। सरकार उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए शीघ्र ही वर्ष 2017, 2018 और 2019 के लिए पत्रकारों को समारोहपूर्वक सम्मान प्रदान करेगी। इसके लिए आवेदन-पत्र पूर्व में ही आमंत्रित किये जा चुके हैं।

पत्रकार भवन एवं जमीन सरकार की

भोपाल में करीब 17 हजार वर्गफुट में बने पत्रकार भवन को तोड़कर वल्र्ड क्लास मीडिया सेंटर बनाने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने श्रमजीवी पत्रकार संघ और पत्रकार भवन समिति की याचिकाएं खारिज कर दी। जस्टिस सुजॅय पॉल की एकलपीठ ने कहा कि संघ और समिति उक्त जमीन पर अपना अधिकार साबित करने में विफल रहे हैं। कोर्ट ने कलेक्टर भोपाल के उस फैसले को सही करार दिया जिसमें लीज निरस्त कर दी गई थी। मामले के अनुसार 1969 में वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन को उक्त जमीन लीज पर आवंटित की गई थी। यह यूनियन ट्रेड यूनियन के तहत पंजीबद्ध संस्था है। श्रमजीवी पत्रकार संघ की ओर से दलील दी गई कि उक्त यूनियन का हिन्दी नाम ही श्रमजीवी पत्रकार संघ है, इसलिए भवन पर उनका अधिकार है। इसी तरह पत्रकार भवन समिति ने भी भवन पर अपना अधिकार का दावा पेश किया।
२५ अगस्त को दैनिक भास्कर जबलपुर में प्रकाशित समाचार पढ़ा ।
यदि सही है तो जनसंपर्क विभाग के मंत्री, अधिकारियों की जानकारी में अवश्य होगा आखिर किसका डर है हाई कोर्ट से जमानत पर चल रहे मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष से ।
भोपाल के कोर्ट ने तीन साल की सश्रम सज़ा सुनाई है तथा रुपए पचास हजार जुर्माना लगाया गया था जो अपराधी के द्वारा न्यायालय में जमा किया गया ।

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