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विक्रम विश्वविद्यालय में फर्जीवाड़ा जिसको जितने नंबर की जरुरत उतने ही बढ़ा दिए

उज्जैन 1 जून 2018 । विक्रम विश्वविद्यालय में फर्जीवाड़ा जिसको जितने नंबर की जरुरत उतने ही बढ़ा दिए विक्रम विश्वविद्यालय में रिजल्ट पुनर्गणना में जमकर नंबरों का खेल किया गया। मामला उजागर होने के बाद लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं, जो चौकाने वाले हैं, पुनर्गणना के दौरान विद्यार्थियों को उतने ही नंबर मिले, जितने पास होने के लिए चाहिए थे। कई एेसे विद्यार्थी हैं, जिन्होंने उत्तर पुस्तिका का पूर्व में अवलोकन कर लिया, लेकिन उन्हें कोई गलती नहीं मिली, लेकिन बाद में नंबरों में परिवर्तन हो गया। पुनर्गणना की धांधली उजागर होने के बाद पहले तो विवि अधिकारियों ने मामला दबाने की कोशिश की, लेकिन मंगलवार को कॉपी दिखाने वाले एक कर्मचारी राजेंद्र को निलंबित कर दिया।
पास होने के लिए चाहिए 16
विक्रम विवि की अध्ययनशाला में स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम में मुख्य परीक्षा 40 अंक की होती है। इसमें पास होने के लिए 16 नंबर की जरूरत होती है। इसके अतिरिक्त 10 अंक आंतरिक परीक्षा होती है। पुनर्गणना में काफी संख्या में एेसे विद्यार्थी हैं, जिनके नंबर बदलकर 16 ही हुए। साथ ही गोपनीय विभाग में पुनर्गणना सेल के समन्वयक केएन सिंह के विभाग जियोलॉजी की दो छात्राओं के भी नंबर बदल गए हैं, उन्हें भी 16 ही अंक मिले।

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