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जिस PAK मंत्री पर लंदन में पड़े थे अंडे, उसने बताई भारत के साथ जंग की तारीख

नई दिल्ली 29 अगस्त 2019 । जम्मू-कश्मीर के मसले पर पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और लगातार उसके नेता बड़बोले बयान दे रहे हैं. कभी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान परमाणु युद्ध की धमकी देते हैं, तो कभी उनके मंत्री भी इसी तरह की बयानबाजी करते हैं. अब पाकिस्तान सरकार में मंत्री शेख रशीद ने एक बार फिर युद्ध की भविष्यवाणी की है, इस बार पाकिस्तानी मंत्री ने युद्ध की तारीख भी बता दी है.

पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल ‘दुनिया टीवी’ के मुताबिक, बुधवार को एक सेमिनार में पाकिस्तानी मंत्री शेख रशीद ने कहा कि मैं अक्टूबर-नवंबर में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध होता देख रहा हूं, और आज यहां पर कौम को तैयार करने के लिए आया हूं. शेख रशीद ने कहा कि पाकिस्तानी सेना के पास जो हथियार हैं, वो दिखाने के लिए नहीं बल्कि इस्तेमाल करने के लिए हैं.

अपने संबोधन में पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र के सामने बार-बार इस मसले को उठाएंगे, वह एक बार फिर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) का दौरा करेंगे. शेख रशीद ने कहा कि पाकिस्तान आखिरी दम तक कश्मीर के लिए लड़ता रहेगा. पाकिस्तान के एक पत्रकार ने शेख रशीद के इस बयान का वीडियो भी ट्विटर पर पोस्ट किया है. बता दें कि शेख रशीद वही मंत्री हैं, जिनपर बीते दिनों लंदन में हमला हुआ था और अंडे फेंके गए थे. दरअसल, रशीद शेख ने भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की बात की थी, उसके बाद जब वह लंदन पहुंचे तो लोगों ने उन्हें जमकर पीटा और उनपर अंडे फेंके.

शेख रशीद लगातार इस तरह की बयानबाजी करते आए हैं. अभी दो दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि अगर भारत की ओर से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) पर हमला किया जाता है, तो ये भारतीय उपमहाद्वीप का बड़ा युद्ध होगा और इससे पूरा नक्शा बदल जाएगा.

गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी जब अपने देश को संबोधित किया था, तब भी उन्होंने कई बार इस बात का जिक्र किया था. अपने संबोधन में इमरान ने कहा था कि भारत-पाकिस्तान दो परमाणु संपन्न देश हैं, ऐसे में दुनिया को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि दोनों के बीच हालात ना बिगड़ें.

एक तरफ पाकिस्तानी मंत्री लगातार युद्ध की धमकी दे रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र से जम्मू-कश्मीर के मसले पर दखल देने की अपील कर रहे हैं. सिर्फ संयुक्त राष्ट्र ही नहीं पाकिस्तान की ओर से अमेरिका, चीन, रूस, यूएई समेत कई बड़े देशों से इस मसले में दखल देने की बात कही है, लेकिन हर बार पाकिस्तान को निराशा हाथ लगी है. क्योंकि अमेरिका हो या फिर रूस हर किसी ने अनुच्छेद 370 पर फैसले को भारत का आंतरिक मसला बताया है.

कश्मीर पर राहुल गांधी का डैमेज कंट्रोल, कहा- यह भारत का आंतरिक मुद्दा, हिंसा फैलाना बंद करे पाकिस्तान

कांग्रेस (Congress) के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने जम्मू-कश्मीर के ताज़ा हालात को लेकर अपने बयान का इस्तेमाल करने पर पाकिस्तान (Pakistan) को फटकार लगाई है. राहुल ने कहा है कि पाकिस्तान को कश्मीर (Kashmir) में दखल देने का कोई हक नहीं है. बता दें पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) को एक चिट्ठी लिखी जिसमें उनके एक बयान का हवाला देते हुए कहा था कि राहुल गांधी ने भी माना है कि ‘कश्मीर में लोग मर रहे हैं.’

पाकिस्तान के इस कदम के बाद राहुल ने बुधवार को कहा कि ‘मैं इस सरकार से कई मुद्दों पर असहमत हूं, लेकिन मैं यह पूरी तरह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा है और इसमें पाकिस्तान या किसी अन्य विदेशी देश की ओर से हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है.’राहुल ने कहा कि ‘जम्मू-कश्मीर में हिंसा हुई है, क्योंकि पाकिस्तान वहां लोगों को उकसा रहा और हिंसा फैला रहा है. पाकिस्तान को दुनिया भर में आतंकवाद का प्रमुख समर्थक माना जाता है.’ पाकिस्थान ने यूएन लिखी थी चिट्ठी
बता दें कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें भारत पर कश्मीर (Kashmir) में हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन जैसे आरोप लगाए गए हैं. पाकिस्तान ने इस ख़त में इन दावों के सोर्स के रूप में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का नाम भी लिखा है. ख़त में जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और PDP चीफ महबूबा मुफ़्ती समेत नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला का नाम भी शामिल है. तब राहुल ने कहा था…
बीते दिनों कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की मीटिंग के बाद राहुल ने कहा था, ‘अभी तक जितनी भी जानकारी मिल सकी है उसके मुताबिक वहां (कश्मीर) गलत हो रहा है और लोग मारे जा रहे हैं.’

बता दें कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की लगातार कोशिश कर रहा है, लेकिन दुनिया के तमाम देशों से उसे मुंह की खानी पड़ रही है. G7 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान के साथ उनके सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं और किसी तीसरे देश को इसमें हस्तक्षेप करने की ज़रूरत नहीं है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) के अमेरिका दौरे के बाद से पाकिस्तान यह प्रचारित कर रहा था कि कश्मीर मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मध्यस्थता की पेशकश की है लेकिन पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हुई इस वार्ता से पाकिस्तान की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया है.

चीन को पूर्वी सैन्य कमांडर का सख्त संदेश: अब हम 1962 की सेना नहीं हैं

सेना के उप प्रमुख मनोनीत लेफ्टिनेंट जनरल एम एम नरवाने (लेफ्टिनेंट जनरल एमएम नरावने) ने मंगलवार को कहा कि अगर चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर ‘विवादित क्षेत्र में 100 बार अतिक्रमण किया है तो भारतीय सेना ने 200 बार ऐसा किया है। उन्होंने दावा किया कि चीन ने डोकलाम गतिरोध के समय ‘क्षेत्रीय दबंग की तरह काम किया। फिलहाल पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ नरवाने ने कहा कि चीन को समझना चाहिए कि भारतीय सेना वैसी नहीं रही जैसी 1962 में चीन-भारत युद्ध के समय थी।

उन्होंने यहां भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स में ‘डिफेंडिंग अवर बॉर्डर्स पर संवाद के दौरान कहा, ”डोकलाम गतिरोध से स्पष्ट संकेत मिला था कि भारतीय सशस्त्र बल कमजोर नहीं पड़े। जब पूर्व वायु सेना प्रमुख और चैंबर की रक्षा उप समिति के सदस्य अरूप राहा ने 1962 के युद्ध से मिले सबक और उसके बाद समस्याओं से निपटने के लिए उठाये गये कदमों के बारे में पूछा, तो नरवाने ने कहा, ”हम अब 1962 वाली सेना नहीं हैं। अगर चीन कहता है कि इतिहास मत भूलो तो हमें भी उन्हें यही बात कहनी है।

उन्होंने कहा कि भारत 1962 से बहुत आगे निकल आया है और 2017 के डोकलाम गतिरोध के दौरान चीन की कोई तैयारी नहीं दिख रही थी। नरवाने ने कहा, ”उन्होंने सोचा कि वे क्षेत्रीय दबंग बनकर निकल जाएंगे। लेकिन हम दादागिरी के सामने डटे रहे। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल किसी भी दुश्मन का मुकाबला करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि डोकलाम में गतिरोध के बाद कुछ गतिविधियों की खबरें सुनने में आई थीं।

नरवाने ने कहा, ”यह खबर भी पूरी तरह गलत नहीं है। दोनों तरफ गतिविधियां रहीं। जो साल भर चलती रही हैं, साल दर साल चलती रही हैं। उन्होंने दो नयी बैरक बनाई हैं, हमने भी दो नयी बैरक बनाई हैं। एलएसी पर चीन के उल्लंघन के मामले बढ़ने के संबंध में राहा के प्रश्न के उत्तर में नरवाने ने कहा, ”अगर हम कहते हैं कि चीन विवादित क्षेत्र में 100 दफा आ चुका है तो हम भी 200 बार वहां गये हैं। तो, ऐसा नहीं सोचें कि यह एकतरफा है। मुझे लगता है कि वे भी अपने वार रूम में यही शिकायत कर रहे हैं कि हमने कई बार यह किया है।

पूर्वी सैन्य कमान के कमांडर ने 1962 के युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत के लिए सेना की नहीं बल्कि राजनीतिक पराजय थी क्योंकि सेना की सभी इकाइयां डटकर लड़ी थीं। उन्होंने कहा, ”जब भारतीय सेना की इकाइयों को डटकर लड़ने को कहा गया तो उन्होंने पूरे सम्मान के साथ खुद को पेश कर दिया।

Army brings uniformity in uniform for officers above Colonel rank

Calling it a move to bring in uniformity in uniforms, the Army has decided to do away with differences in the attires of officers above the rank of Colonel.

This means that all Brigadier-rank officers and above will sport the same beret, cap, shoulder badge, lanyard and belt.

Currently, depending on the regiment or arm that an officer belongs to, the colour of the beret, lanyard, badge, etc., differ. And the badge on the belt is also different.

“We have taken the decision to do away with differences in the uniform of officers from the rank of a Brigadier. The uniforms show your links with the regiment, arm or service that you belong to,” a senior Army officer said.

“But all of them are Indian Army officers, so there should be no difference. There should be no affiliation to the lanyard or the regiment,” the officer added. To begin with, the dress that officers don in the evening while visiting the officer’s mess will be changed. The Army has already received three types of samples and a final decision on it will be taken soon.

The uniform is a matter of pride for every soldier. As soon as an officer gets commissioned, he is assigned a particular service that has distinct badges.

Currently, all rifle regiments such as the Rajputana Rifles and Gorkha Rifles have black-coloured badges on their shoulders and buttons.

The colour is silver for the Assam Regiment and brass for the J&K Light Infantry.

The colour of the beret also varies. It is navy blue for the engineers regiment, green for the Gorkha Rilfes and maroon for the parachute regiment. Similarly all regiments/corps have different lanyards.

The uniforms also change with the season, and are different in winter and summer.

The Army has a total of 42,913 officers, starting from the rank of a Lieutenant to the Chief of Army Staff with the rank of General.

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