मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> आखिर सामने आ ही गई राहुल गांधी की नाराजगी की असली वजह

आखिर सामने आ ही गई राहुल गांधी की नाराजगी की असली वजह

नई दिल्ली 29 मई 2019 । लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस्तीफे की पेशकश करके लोगों का ध्यान खींच लिया अपनी ओर, हर कोई जानना चाहता है कि आखिर राहुल क्यों अड़े हैं अपने इस्तीफे पर, 27 मई को मिलने पहुंचे कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल व अहमद पटेल से राहुल गांधी ने साफ-साफ कह दिया कि अब ना तो मैं खुद अध्यक्ष रहूंगा और ना ही गांधी परिवार का कोई सदस्य ही बनेगा अध्यक्ष, राहुल इस बात से ज्यादा नाराज है कि करारी हार के बावजूद राज्यों के कांग्रेस अध्यक्षो ने तब तक इस्तीफे नहीं दिए जब तक खुद राहुल ने इस्तीफे की पेशकश नहीं कर दी, राहुल की नाराजगी की वजह सामने आने के बाद से कांग्रेस में मची हुई है हड़कंप, राहुल के इस रूख से कांग्रेस में बड़े बदलाव के दिख रहे हैं पूरे आसार…

राहुल गांधी ने केसी वेणुगोपाल और अहमद पटेल से साफ तौर पर कहा कि वे अपने इस्तीफे के फैसले से पीछे नहीं हटेंगे। लिहाजा उन पर इस्तीफा वापस ना लेने के लिए दबाव ना डाला जाए। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक राहुल से सोमवार को पार्टी के सीनियर नेता केसी वेणुगोपाल और अहमद पटेल से मुलाकात की। राहुल ने साफ कर दिया कि वह पार्टी अध्यक्ष नहीं बने रहना चाहते। इसलिए उनका विकल्प खोज लिया जाए। नया अध्यक्ष कोई गैर-गांधी ही होना चाहिए।

राहुल गांधी ने साफ कर दिया कि कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर प्रियंका गांधी का नाम भी नहीं चलाया जाना चाहिए। राहुल गांधी की नाराजगी इस बात को लेकर है कि उनके प्रचार अभियान के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता या तो खामोशी से बैठे रहे या भितरघात करते रहे। ऐसे नेताओं ने पार्टी को चुनाव जिताने में मदद नहीं की। उनकी नाराज़गी नवनिर्वाचित मुख्यमंत्रियों कमलनाथ और अशोक गहलोत समेत तमाम प्रदेशों के कांग्रेस अध्यक्षों से है जो अपने करीबियों को टिकट दिलाने के लिए जोड़-तोड़ करते रहे। राहुल की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि जब पार्टी की करारी हार हुई तो भी किसी भी प्रदेश अध्यक्ष ने तब तक इस्तीफे का प्रस्ताव नहीं किया, जब तक की खुद राहुल गांधी ने इस्तीफे की पेशकश नहीं कर दी।

मध्य प्रदेश: बीजेपी के विधायक बने सांसद और फायदा हो गया कांग्रेस का

राजनीति में कभी-कभी ऐसा भी होता है कि जीत किसी और पार्टी की हो और फायदा किसी और को मिल जाए। मध्य प्रदेश में कुछ ऐसा ही समीकरण देखने को मिला है। दरअसल, मध्य प्रदेश के रतलाम से बीजेपी विधायक लोकसभा चुनाव में विजयी होकर सांसद बन गए। बीजेपी विधायक की जीत के साथ ही अब यहां विधानसभा में कांग्रेस की स्थिति थोड़ी और मजबूत हुई है।

दरअसल, झाबुआ से बीजेपी विधायक जीएस डामोर को पार्टी ने लोकसभा का टिकट दिया और वह चुनाव जीते भी। अगर डामोर विधायक पद से इस्तीफा देते हैं तो विधानसभा में संख्या बल 229 का हो जाएगा (कुल 230 सीटे हैं)। यह स्थिति कम से कम अगले छह महीने तक रहनी है, जबकि झाबुआ सीट पर उपचुनाव होना है। ऐसे में कांग्रेस के पास 115 विधायकों के संख्याबल के साथ विधानसभा में पर्याप्त सीटें होंगी और उसे फिलहाल बाहर से किसी के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी।

पूर्व स्पीकर और बीजेपी नेता सीताराम शर्मा और पूर्व प्रमुख सचिव भगवानदास सबनानी भी मानते हैं कि 229 संख्याबल होने पर कांग्रेस के पास 115 विधायकों के साथ अब पूर्ण बहुमत है। उधर, विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव जिन्होंने कई मौकों पर कहा कि सूबे में कमलनाथ सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है, कहते हैं, ‘हम कोई जल्दबाजी में नहीं हैं।’

‘…तो कांग्रेस के पास होंगे पर्याप्त आंकड़े’
डामोर के इस्तीफे पर विधानसभा के आंकड़े कांग्रेस के पक्ष में जाने के सवाल पर बीजेपी नेता शर्मा कहते हैं, ‘बिल्कुल, हमने तो इस बारे में सोचा ही नहीं था। अगर डामोर इस्तीफा देते हैं तो कांग्रेस के पास बहुमत के लिए अब पर्याप्त आंकड़े हैं।’ हालांकि शर्मा यह भी जोड़ते हैं कि बीजेपी सूबे में कमलनाथ सरकार गिराने के लिए किसी भी तरह की कोशिश में नहीं जुटी है।

‘हम सरकार गिराने की कोशिश में नहीं’
शर्मा आगे कहते हैं, ‘जैसे कि हमारे नेता शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि हम कमलनाथ सरकार को गिराने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। हां, अगर उनकी सरकार खुद गिरती है तो फिर हम उस स्थिति का आंकलन करते हुए जो उचित होगा, उस समय फैसला लेंगे। हालांकि यह सच है कि अब दामोर के इस्तीफा देने की स्थिति में फिलहाल कांग्रेस को बाहर से किसी के समर्थन की जरूरत भी नहीं है।’

‘खुद गिर जाएगी कमलनाथ सरकार’
यह पूछे जाने पर कि क्या यह समीकरण देखने के बाद बीजेपी डामोर को लोकसभा भेजने की जगह विधायक के रूप में ही रखना पसंद करेगी, विपक्ष के नेता भार्गव कहते हैं, ‘इस बात की अब कोई संभावना नहीं है। वे (कांग्रेस) खुद डरे हुए हैं। हमें कुछ करने की जरूरत ही नहीं है। उनके भीतर ही दिग्गज कांग्रेसी नेताओं के बीच टकराव जारी है और जब यह खुलकर सामने आएगा तो सरकार खुद ही गिर जाएगी।’

कांग्रेस को 121 विधायकों का समर्थन
उधर, सीएम कमलनाथ के मीडिया कोऑर्डिनेटर नरेंद्र सलूजा कहते हैं- जैसे ही डामोर इस्तीफा देंगे हम खुद ही पूर्ण बहुमत में होंगे। पर, यह देखना दिलचस्प होगा कि अब दामोर विधानसभा से इस्तीफा देते हैं या फिर लोकसभा से। बता दें कि फिलहाल कांग्रेस को 121 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इनमें से तीन निर्दलीय, दो बीएसपी और एक एसपी के विधायक शामिल हैं।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

चीन नहीं, हिमाचल में तैयार होगा दवाइयों का सॉल्ट, खुलेगा देश का पहला एपीआई उद्योग

नई दिल्ली 01 अगस्त 2021 । नालागढ़ के पलासड़ा में एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट (एपीआई) उद्योग …