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गंगा दशहरा पर उज्जैन में दिखा लघु सिंहस्थ का नजारा

उज्जैन 13 जून 2019 । गंगा दशहरा पर नीलगंगा सरोवर पर सिंहस्थ का नजारा दिखाई दिया जब साधु संतों ने अखाड़ो के नेतृत्व में पेशवाई में शामिल होकर स्नान किया। उज्जैन में एक बार फिर सिंहस्थ सा नजारा देखने को मिला। करोड़ो की लागत से जूना अखाड़े के नवनिर्मित भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल होेने के लिए देशभर के 13 अखाड़ो के प्रमुख उज्जैन पहुंचे। जिन्होनें गंगा दशहरा के अवसर पर नीलगंगा सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई। नहान के पूर्व सभी साधु-संत ने पेशवाई निेकाल कर श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। इसके बाद नहान किया गया। इसी सरोवर से सिंहस्थ की शुरूआत होती है। जिसके चलते हजारों की संख्या श्रद्धालु पेशवाई में शामिल हुए। इस भवन की खास बात ये है कि तीन मंजिला इमारत को शिवलिंग आकार में निर्मित किया गया है। इसके साथ ही भवन में त्रिशूल लगाने के लिए विशेष शिखर का निर्माण किया गया है।

सिंहस्थ 2016 के बाद उज्जैन में गंगा दशहरे के मौके पर एक बार फिर सिंहस्थ सा नजारा देखने को मिला। गंगा दशहरे पर नीलगंगा सरोवर पर नवनिर्मित भवन का उदघाटन किया जाना है। जिसके चलते देशभर के 13 अखाड़े के प्रमुख उज्जैन पहुंचे। इस मौके पर सभी अखाड़ो के प्रमुख ने नीलगंगा सरोवर से पेशवाई निकाली। जिसमें बड़ी संख्या में साधु-संत शामिल हुए। इसके साथ ही पेशवाई में साधु-संत के दर्शन के लिए हजाराें की संख्या में श्रद्धालु पेशवाई मार्ग पर मौजूद रहे। इसके बाद सभी साधु संतो ने नीलगंगा सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई। गंगा दशहरा पर नहान के विशेष महत्व है। बता दें कि नीलगंगा सरोवर से ही सिंहस्थ की शुरूआत होती है। यहीं से हर सिंहस्थ में पहली पेशवाई निकलती है। इसके बाद सिंहस्थ की शुरूआत मानी जाती है। सरोवर के समीप ही जूना अखाड़े ने करोड़ो की लागत से तीन मंजिला भवन का निर्माण किया है। इस भवन की खास बात ये है कि भवन को शिवलिंग आकार में बनाया गया है। इसके साथ ही भवन में जूना अखाड़ा के पूर्व महंत शिवगिरी महाराज का समाधि स्तंभ निर्मित किया गया है। जिसके शिखर पर त्रिशूल को स्थापित किया गया है।

इस आश्रम को महामंडलेश्वर शैलेषानंदजी महाराज संभालेंगे। सिंहस्थ के बाद ये पहला माैका है जब इतनी बड़ी संख्या में साधु-संत शहर में मौजूद रहे। जिनके दर्शन के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पेशवाई मार्ग पर दर्शन लाभ लेने के लिए मौजूद रहे।

उज्जयिनी की पावन धरा पर उतरी नीलगंगा
गंगा दशहरा की पूर्व संध्या पर नीलगंगा पर नीलगंगा नाट्य का मंचन हुआ तथा मिश्रा बंधुओ की भजन संध्या का आयोजन किया गया। नीलगंगा मैदान पर महा नाटक नीलगंगा के मंचन में प्रसिद्ध नृत्यांगना पलक पटवर्धन के निर्देशन में नाटक हुआ। जिसमें मां नीलगंगा की उत्पत्ति से लेकर नीलगंगा सरोवर और जूना अखाड़ा के बारे में बताया गया। वहीं प्रयागराज के प्रसिद्ध भजन गायक मिश्र बंधु की भजन संध्या भी रात में हुई।
सर्वप्रथम श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा नीलगंगा घाट पर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेन्द्र गिरी महाराज, जूना अखाड़ा के मुख्य संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज, पायलट बाबा सहित संतों ने नीलगंगा का पूजन अभिषेक किया।

माँ नीलगंगा की प्रतिमा का हुआ लोकार्पण,गंगा आरती में बना मनोरम दृश्य
नीलगंगा सरोवर में बनाई गई माँ नीलगंगा की प्रतिमा का गंगा दशहरा की पूर्व संध्या पर लोकार्पण किया गया। इस मौके पर माँ नीलगंगा की भव्य आरती की गई और अभिषेक किया गया।

इससे पहले पंच दशनाम जूना अखाड़ा नीलगंगा घाट पर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेन्द्र गिरी महाराज, जूना अखाड़ा के मुख्य संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज, पायलट बाबा, वरिष्ठ नेता मनोहर बैरागी सहित संतों ने नीलगंगा का पूजन अभिषेक किया। महापौर ,स्थानीय पार्षद दुर्गा शक्ति सिंह चौधरी ने आरती मेंं भाग लिया।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी व पंचानंद गिरी ने नील गंगा में किया स्नान
उज्जैन – गंगा दशहरा के अवसर पर मध्य प्रदेश की नील गँगा सरोवर में देश के हजारों साधु-संतों ने स्नान किया । इस मौके पर मुख्य रूप से अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी,जगतगुरु पंचानंद गिरी,उपाध्यक्ष नारायण गिरी,महामंत्री हरि गिरी समेत कई सन्त मौजूद थे । श्री हिन्दू तख्त के धर्माधीश एवं श्री काली माता मंदिर पटियाला व कामख्या देवी असम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर जगतगुरु पंचानंद गिरी महाराज ने कहा कि मध्य प्रदेश की नील गँगा पिछले काफी समय से प्रदूषित हो रखी थी जिसे साफ करवाने का संत समाज ने बीड़ा उठाया व गहरीकरण और सौंदर्यीकरण से फिर से नील गंगा यानी में साफ पानी प्रवाहित हो सकता है । नीलगंगा सरोवर इसकी मिसाल है।

जगतगुरु पंचानंद गिरी महाराज ने बताया कि स्कंद पुराण के अवंति खंड में नीलगंगा सरोवर का जिक्र है। इसके किनारे हनुमानजी की माताजी अंजनी देवी का आश्रम है और जब गंगा नीली (प्रदूषित) हुई तो वह नीलगंगा सरोवर में प्रकट होकर शिप्रा में मिली, जिससे उसका वर्ण फिर से साफ हो गया। इस सरोवर के इसी धार्मिक महत्व के कारण सिंहस्थ में आने वाले अखाड़ों के साधु-संत इसके किनारे डेरा डालते हैं और इसके बाद सिंहस्थ क्षेत्र में प्रवेश करते हैं। इसके किनारे जूना अखाड़ा ने अपनी नई पीठ बनाई है। तीन मंजिला शिवलिंग आकार के इस भवन का लोकार्पण गंगा दशहरा पर महायोगी पायलट बाबा के हाथों होगा, जो इसके पीठाधीश्वर भी होंगे।

जगतगुरु पंचानंद गिरी महाराज ने कहा मध्य प्रदेश का नीलगंगा सरोवर देखभाल के अभाव में शहर की गंदगी से पट गया था। सिंहस्थ में इसका सौंदर्यीकरण तो हुआ लेकिन सफाई और गहरीकरण नहीं होने से इसमें गंदा पानी भर गया था। पीठ निर्माण के साथ सरोवर का गहरीकरण कराया गया। गंदा पानी निकालकर सुखाया और फिर खुदाई शुरू की। नतीजा सरोवर का प्राकृतिक स्रोत शुरू हो गया। आज इसमें इतना साफ पानी है कि हम सब इसमें स्नान के साथ आचमन भी कर रहे हैं। पंचानंद गिरी ने कहा पुराने जलस्रोतों की स्वच्छता और देखभाल की जिम्मेदारी उठाएं तो पानी का संकट नहीं रहेगा।

जूना अखाड़ा की नीलगंगा पीठ का हुआ लोकार्पण, पट्टाभिषेक कर पायलट बाबा को बनाया गया पीठाधीश्वर

सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान साधु संतों का पड़ाव स्थल रहने वाला नीलगंगा पड़ाव स्थल अब जूना अखाड़े की नीलगंगा पीठ बन गई हैं। बुधवार को गंगा दशहरा के मौके पर जूना अखाड़े की इस नवनिर्मित नीलगंगा पीठ का लोकार्पण किया गया गया और महायोगी पायलट बाबा को इस पीठ का पीठाधीश्वर बनाया गया।इस दौरान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की अगुवाई में सभी 13 अखाड़ो के साधु संतों ने उनका पट्टाभिषेक कर उन्हें नीलगंगा पीठ की जिम्मेदारी सौंपी गई।

इससे पहले दत्त अखाड़ा से शिप्रा का जल लेकर कलश यात्रा शुरू की गई जिसमें सैकड़ों की संख्या में महिलाएं कलश लेकर शामिल हुईं। वहीं साधु संत और महामंडलेश्वर रथ बग्घी में बैठ कर यात्रा में शामिल हुए। कलश यात्रा के नीलगंगा पहुँचने पर यहाँ बनाये गए तीन मंजिला शिवलिंग के आकार के आध्यात्मिक भवन का महायोगी पायलट बाबा, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि महाराज,महामंडलेश्वर नारायण गिरि जी महाराज,महामंडलेश्वर शैलेषा नंद जी महाराज,योग माता चेतना गिरि, योग माता श्रद्धा गिरि सहित महापौर मीना जोनवाल, पार्षद दुर्गा शक्तिसिंह चौधरी की मौजूदगी में लोकार्पण किया गया। इसके बाद आयोजित किये गए कार्यक्रम में महायोगी पायलट बाबा का पट्टाभिषेक किया गया और चादर ओढ़ाकर नीलगंगा पीठ का पीठाधीश्वर बनाया गया।

इस मौके पर विशाल भंडारे और भजन सम्राट अनूप जलोटा की भजन संध्या का भी आयोजन किया गया। देर रात सैकड़ो की संख्या में लोगों यहाँ भजनों का आनंद लिया।

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