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रेलवे बना रहा सबसे ऊंचा गर्डर पुल, लागत 400 करोड़ और ऊंचाई कुतुबमीनार से डबल

नई दिल्ली 10 जून 2018 । उत्‍तर पूर्व के राज्‍यों में रेल के दायरे को फैलाने के लिए भारतीय रेलवे जोर-शोर से जुटा हुआ है. इसके तहत 111 किलोमीटर लंबी जीरीबाम-तुपुल-इंफाल के बीच रेलवे लाइन पर काम तेजी से चल रहा है. यह प्रोजेक्‍ट मणिपुर की राजधानी इंफाल को राज्‍य के पश्मिोत्‍तर शहर जीरीबाम से जोड़ेगा. जीरीबाम शहर असम के कचर जिले के की पड़ता है. वर्तमान में मणिपुर की राजधानी इंफाल में रेल कनेक्टिविटी नहीं है.

अगले साल जून तक इस लाइन पर देश का सबसे बड़ा गर्डर पुल तैयार हो जाएगा. यह पुल नंबर 164 है और इसकी ऊंचाई 141 मीटर है जो कि कुतुब मीनार की तुलना में दुगुना ऊंचा है. वर्तमान में यूरोप की माला-रिजेका लाइन 139 मीटर ऊंचाई के साथ सबसे ऊंचा गर्डर पुल है. इस रेलवे लाइन के प्रोजेक्‍ट का काम साल 2020 तक पूरा होना है.

फाइनेंशियल एक्‍सप्रेस की खबर के अनुसार, यह पु‍ल इजाई नदी पर नोनी के पास बनाया जा रहा है और इसके ऊपर से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन गुजर सकती है. इस पुल की मदद से सामान की ढुलाई भी आसान होगी. इस पुल के ऊपर से 25 टन एक्‍सल वाली मालगाड़ी गुजर सकती है. इस पुल की लागत 400 करोड़ रुपये के करीब हो सकती है. वहीं पूरे प्रोजेक्‍ट पर लगभग 13800 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा.

इस प्रोजेक्‍ट पर लगभग साढ़े 10 किलोमीटर लंबी सुरंग भी बनाई जा रही है. यह देश की सबसे लंबी रेल सुरंगों में से एक है. इसके लिए न्‍यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड का प्रयोग किया जा रहा है. जिस इलाके में यह रेल लाइन बिछ रही है वह भूकंप प्रभावित है. इसलिए इस पुल को इससे बचाए रखने वाली तकनीक से बनाया जा रहा है. साथ ही इसकी बनावट में चट्टानों के खिसकने और भारी बारिश के खतरे का भी ध्यान रखा जा रहा है.

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