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बंद हो सकती है 143 साल पुरानी दरबार मूव की परंपरा

नई दिल्ली 23 अगस्त 2019 । जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद दरबार मूव का भारी भरकम खर्च कम हो सकता है। दरबार मूव पर सालाना छह सौ करोड़ रुपये खर्च राज्य को बोझिल करता रहा है। दरबार मूव की प्रक्रिया रोक कर खर्च कम करना भाजपा और जम्मू केंद्रित कई दलों की पुरानी मांग रही है। अब अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद विधानसभा का कार्यकाल छह से पांच साल करने के साथ छह-छह महीने बाद दरबार मूव की प्रक्रिया में भी बदलाव तय है। ये दोनों व्यवस्थाएं राज्य में दशकों से प्रभावी हैं और कश्मीर केंद्रित पार्टियों को भा रही हैं। अब 31 अक्टूबर के बाद केंद्र शासित प्रदेश बनने से यहां पर 23 व्यवस्थाएं बदलेंगी। इनमें ये दोनों व्यवस्थाएं भी हो सकती हैं।

दरबार मूव की प्रक्रिया रोक कर अरबों रुपये बचेंगे

प्रदेश भाजपा की पूरी कोशिश है कि जम्मू में ये पुरानी मांगे पूरी हों। दोनों क्षेत्रों के अधिकारी और कर्मचारी जम्मू व श्रीनगर में स्थायी रूप से रहें और सरकार के साथ सिर्फ मुख्य सचिव व प्रशासनिक सचिव जाएं। इससे दरबार को लाने और ले जाने के साथ मूव की सुरक्षा व कर्मियों को ठहराने पर खर्च होने वाले अरबों रुपये बचेंगे। दरबार मूव ने जम्मू कश्मीर में वीआइपी वाद को बढ़ावा दिया है। इससे हजारों कर्मचारियों को जम्मू व श्रीनगर में ठहराने के लिए होटलों में सैकड़ों कमरे व अधिकारियों के लिए आवास किराये पर लिए जाते हैं।

सचिवालय का कामकाज ई-फाइलों के जरिये निपटाया जाए

दरबार मूव को बंद करने का मुद्दा गत दिनों भाजपा के बुद्धिजीवी सम्मेलन में उठा था। सेवानिवृत्त एसएसपी भूपेन्द्र सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद दरबार मूव की प्रक्रिया को रोक दिया जाए। कश्मीर की फाइलें कश्मीर व जम्मू की फाइलों को स्थायी तौर पर जम्मू में रखा जाए। सचिवालय का कामकाज ई-फाइलों के जरिये निपटाया जाए।

143 साल पुरानी है दरबार मूव की परंपरा

किसी भी परंपरा को निभाने के लिए सरकारी तौर पर खर्च किया जाने वाली यह भारी भरकम राशि जम्मू-कश्मीर में हर साल खर्च की जाती थी। राज्य में 143 साल पुरानी दरबार मूव की परंपरा के तहत शीतकालीन राजधानी जम्मू में सचिवालय बंद होती थी। दरबार मूव परंपरा के तहत राज्य की राजधानी छह महीने जम्मू और छह महीने श्रीनगर रहती थी।

क्या है दरबार मूव परंपरा-

जम्मू कश्मीर देश का एक अकेला ऐसा राज्य है जिसका सचिवालय छह महीने श्रीनगर और छह महीने जम्मू से काम करता था। इसके साथ ही हाईकोर्ट सहित अन्य विभाग शीतकाल में जम्मू शिफ्ट किए जाते थे । अप्रैल माह के आखिरी सप्ताह में इसे फिर से श्रीनगर शिफ्ट कर दिया जाता था। 1872 में डोगरा शासनकाल में राज्य की प्राकृतिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों के चलते इसे शुरु किया गया था। दरबार मूव की परंपरा पर हर साल करीब 300 करोड़ रुपए खर्च किए जाते थे । डोगरा महाराजा गुलाब सिंह ने दरबार मूव की परंपरा की शुरुआत की थी। उस समय ये काम बैल गाड़ी और घोड़ा गाड़ी से होता था। उस समय दोनों जगह महाराजा का दरबार शिफ्ट होने के बाद एक बड़ा समारोह आयोजित किया जाता था।

परिवार सहित आते कर्मचारी

सचिवालय सहित अन्य प्रमुख कार्यालयों में कार्य करने वाले करीब 8000 दरबार मूव कर्मचारियों को टीए भत्ते के तौर पर ही प्रत्येक कर्मचारी को दस हजार रुपये तो दिए जाते थे। ये कर्मचारी परिवार सहित आते थे। करीब 75 हजार दैनिक वेतन भोगियों को जम्मू और श्रीनगर में अलग-अलग रखा जाता। इस दौरान हुआ पूरा खर्च सरकार वहन करती है।

फिजूल खर्च

अगर इस परंपरा को बंद कर दिया जाए तो हर साल खर्च होने वाले करोड़ों रुपए दूसरे कार्यों पर खर्च किए जा सकते हैं। एक जगह स्थायी सचिवालय बनने से जम्मू और श्रीनगर के लोग परेशानी से बच सकेंगे। अच्छे शासन के लिए महाराजा रणवीर सिंह ने वर्ष 1872 में राज्य की राजधानी स्थानांतरित करने की परंपरा दरबार मूव शुरू किया था। इसके पीछे उनका मकसद जम्मू और कश्मीर के लोगों के बीच आपसी भाईचारा व सौहार्द कायम करना था। यह बीते समय की बात है क्योंकि अब ई-गर्वनेंस का जमाना है। हर रिकार्ड एक क्लिक पर सामने आ जाता है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी के इस युग में राजधानियों को स्थानांतरित करने की परंपरा बेतुकी लगती है।

पाकिस्तान में बहने वाली नदियों का पानी रोकने पर काम शुरू

केंद्र सरकार ने पाकिस्तान की तरफ़ जाने वाली नदियों का पानी रोकना शुरू कर दिया है. केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने मुंबई में कहा कि सिंधु जल समझौता का उल्लंघन किए बग़ैर भारत सरकार ने हिमालय से निकलकर पाकिस्तान में बहने वाली नदियों का पानी रोकने प्रक्रिया शुरू कर दी है. इससे पहले भारत ने पाकिस्तानी नदियों में इतना पानी छोड़ दिया था कि वहां बाढ़ की हालत आ गई थी. अब उन नदियों का पानी रोककर पाकिस्तान पर नए तरह का दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है.

गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, “पाकिस्तान में बहने वाली नदियों का पानी रोकने की दिशा में काम शुरू हो चुका है. मैं उस पानी की बात कर रहा हूं जो पाकिस्तान में बहता है. मैं सिंधु जल समझौता तोड़ने की बात नहीं कर रहा.” जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35ए ख़त्म किए जाने के बाद पाकिस्तान के साथ चल रही ताज़ा तना-तनी के बाद मंत्री के इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं. शेखावत ने आगे कहा, “मसला ये है कि हम पाकिस्तान में बहने वाले अतिरिक्त पानी को रोके कैसे? कुछ जलाशय और नदियां ऐसी हैं जो हमारे कैचमेंट एरिया से बाहर है. हम उसकी दिशा मोड़ेंगे ताकि ज़रूरत वाले मौसम में हम उस पानी का इस्तेमाल कर सकें. इस वक़्त हमारे सारे जलाशय भरे हुए हैं, लेकिन हम पाकिस्तान की तरफ़ जाने वाले पानी को रावी नदी की तरफ़ मोड़ सकते हैं.”

आपको बता दें कि जम्मू-कश्मैर के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच पैदा हुए तनाव के बाद पाकिस्तान ने भारत पर दबाव बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत की थी. जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र भी पहुंचा. यही नहीं, दोनों देशों के बीच यातायात पर भी पाबंदियां लग गईं. इसके बाद भारत की तरफ़ से उठाए गए इस कदम को पाकिस्तान की हरकत की जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है. जम्मू-कश्मीर पर भारत के फ़ैसले के बाद पाकिस्तान ने इसे ‘फिफ्थ जेनरेशन वारफेयर’ करार दिया था. यही नहीं, पाकिस्तान ने ये भी कहा था कि भारत ने उसे बिना सूचित किए सतलज नदी में पानी छोड़ दिया, जिसके चलते पाकिस्तान में बाढ़ जैसे हालात बन गए.

गजेन्द्र सिंह शेखावत ने ये भी कहा कि बांध सिर्फ़ बिजली पैदा करने के लिए नहीं बनाए जाते, बल्कि ज़रूरत के वक़्त में हम उसके ज़रिए पानी का इस्तेमाल कर सके, इसका भी ध्यान रखा जाता है. आपको बता दें कि 1960 के सिंधु जल समझौते में सिंधु और उसकी सहायक नदियों के पानी के बंटवारे के बारे में करार का ज़िक्र है. समझौते के मुताबिक़ ब्यास, रावी और सतलज पर भारत का नियंत्रण है, जबकि सिंधु, चेनाब और झेलम पर पाकिस्तान का.

चूंकि पाकिस्तान में बहने वाली नदियों को पानी भारतीय भूभाग में मिलता है इसलिए समझौते के मुताबिक़ भारत को सिंधु, चेनाब और झेलम का सिंचाई और एक हद तक बिजली उत्पादन, घरेलू-औद्योगिक इस्तेमाल के साथ-साथ वहां मछली मारने के भी अधिकार मिले हुए हैं.

जिसके एक इशारे पर जल उठता था कराची, उस शख्स ने कहा, ‘पाक पर भरोसा करना बंद करें कश्मीरी’

मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के संस्थापक अल्ताफ हुसैन कश्मीर के लोगों से पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान सरकार पर भरोसा नहीं करने का अनुरोध किया है। उनका बयान ऐसे समय सामने आया है जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को समाप्त करने के बाद पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।

लंदन में निर्वासित जीवन बिता रहे हुसैन ने कहा, ‘ईश्वर की खातिर आप सभी से अपील करता हूं कि पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान सरकार पर भरोसा करना बंद करें। दोनों पिछले 72 वषरें से आपको धोखा दे रहे हैं और आज भी ऐसा ही चल रहा है।’

अल्ताफ ने कहा कि कुछ चर्चित पाकिस्तानी सेना के लोग यह नारे लगा रहे हैं कि कश्मीर को पाकिस्तान में विलय कर देंगे और हम आजादी लेंगे, लेकिन आजादी का सही मतलब यह नहीं है। मैं हमेशा पाकिस्तान की कूटनीतिक और विदेशी मामलों की रणनीति पर मुखर रहा हूं क्योंकि पाकिस्तान हमेशा दिखाता रहा है कि उसने कश्मीर के लिए बहुत कुछ किया है।

यहां तक उसने कश्मीर का समर्थन करने के लिए एक समिति भी बनाई, जिसके चेयरमैन ने कश्मीर मसले के नाम पर दुनिया भर में घूमकर विदेश यात्रा का आनंद लिया। इसके अलावा पाकिस्तान ने कश्मीर के मामले पर संयुक्त राष्ट्र में विशेष स्टाफ भी नियुक्त किया और अरबों खर्च करने के बावजूद कश्मीर के लिए कुछ हासिल नहीं कर पाया।

अल्ताफ ने कहा, ‘पाकिस्तानी सेना के दावे कहां गायब हो गए हैं? पाकिस्तानी सेना भारत से आजादी के लिए कश्मीर के लोगों को अपनी जंग में शामिल करने से क्यों हिचक रही है? पाकिस्तानी सेना कायरता क्यों दिखा रही है और अब तक कश्मीर स्वतंत्र क्यों नहीं हो पाया है? कश्मीरियों को अंत तक समर्थन देने के दावे आखिर कहां गायब हो गए हैं? उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि ईश्वर बेहतर जानता है कि पाकिस्तानी सेना सैकड़ों मील दूर से क्या करेगी।

भारतीय सेना की इस कार्रवाई पर चकित रह गया पाकिस्तान, बांग्लादेश को भी मिला दो-टूक जवाब

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के बाद से ही पाकिस्तान सीजफायर का उल्लंघन करके सीमापार से भारत में लगातार गोलीबारी कर रहा है। जम्मू-कश्मीर में कृष्णा घाटी, मेंढर सेक्टर में पाकिस्तान ने 20 अगस्त को फायरिंग की। इसका करारा जवाब देते हुए भारतीय सेना ने पाकिस्तान की कई चौंकियों को तबाह कर दिया। भारतीय सेना की इस कार्रवाई पर पाकिस्तान चकित रह गया। दूसरी ओर भारत ने बांग्लादेश को भी दो-टूक कह दिया है कि असम में दस्तावेज तैयार करने और अवैध प्रवासियों की पहचान की प्रक्रिया भारत का आंतरिक मामला है।

पाकिस्तान लगातार सीमा पार से गोलियां बरसा रहा है। पहले 19 अगस्त को सीमा पार से नौशेरा सेक्टर में गोलीबारी की गई थी। अब जम्मू कश्मीर में कृष्णा घाटी, मेंढर सेक्टर में पाकिस्तान ने फायरिंग की। जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान की कई चौंकियों को तबाह कर दिया। राजौरी सेक्टर में भी पाकिस्तान सेना की एक चौकी को उड़ा दी गई है। जवाबी कार्रवाई में कई पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की भी खबर है। पाकिस्तान की गोलीबारी में नायक रवि रंजन कुमार सिंह शहीद हो गए। 36 साल के रवि रंजन कुमार सिंह बिहार में गोप बीघा गांव के रहने वाले थे।

वहीं भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री समकक्ष एके अब्दुल मोमेन से 20 अगस्त को मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। एस जयशंकर ने उनसे साफ-साफ शब्दों में कह दिया कि असम में दस्तावेज तैयार करने और अवैध प्रवासियों की पहचान की प्रक्रिया भारत का आंतरिक मामला है। एस जयशंकर बांग्लादेश की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। उन्होंने कहा कि लंबित तीस्ता जल समझौते के लिए भारत का रुख और प्रतिबद्धता पहले की तरह है। एस जयशंकर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से भी उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात करेंगे।

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