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सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज पर पहले बनाया वीडियो ऑडियो फिर लगाया एसआईटी पर आरोप।

भोपाल 23 नवम्बर 2019 । हनी ट्रैप मामले में पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा और पूर्व प्रमुख सचिव जनसंपर्क विभाग एस के मिश्रा के अश्लील वीडियो और ऑडियो वायरल होने के बाद एक बार फिर हनी ट्रैप का मामला सुर्खियों में आ गया है।
दोनों ही मामलों में श्वेता सुनील जैन के ऑडियो और वीडियो सामने आए आने वाले दिनों में और भी कुछ लोगों के ऑडियो वीडियो वायरल होने की संभवत जानकारी मिल रही है इसी बीच हनी ट्रैप मामले मैं उज्जैन जिला जेल में बंद हनी ट्रैप मामले की मुख्य आरोपी श्वेता विजय जैन और मोनिका यादव ने अपने वकील धर्मेंद्र गुर्जर और रवि यादव के माध्यम से कोर्ट में आवेदन पेश किया आवेदन में कहना है प्रकरण दर्ज होने के बाद पुलिस ने एक पेन ड्राइव जप्त की थी जिसमें कई लोगों के वीडियो और ऑडियो होना बताया गया था पुलिस ने मीडिया के माध्यम से यह जानकारी सार्वजनिक भी कर दी इस मामले में एसआईटी भी गठित की गई थी मामले से जुड़े सारे सबूत और पेनड्राइव एक डिजिटल डाटा एसआईटी के पास है पिछले कुछ दिनों से स्वेता स्वप्निल जैन के ऑडियो और वीडियो वायरल हो रहे हैं सवाल यह उठता है कि जब सारा डाटा एसआईटी के पास है तो फिर वहां वायरल कैसे हो रहा है श्वेता विजय जैन और मोनिका यादव ने आरोप लगाया कि जांच कर रही एसआईटी वीडियो और ऑडियो को वायरल कर रही है पहले तो हनी ट्रैप मामले की मुख्य आरोपी श्वेता विजय जैन और मोनिका यादव द्वारा कई आईपीएस आईएएस और जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े नेताओं का ऑडियो वीडियो ब्लैकमेल करने के हिसाब से बना लिया जब बाद में उनके कारनामे का इतिहास एस आईटी द्वारा खोले गए तब उल्टा ही एसआईटी पर आरोप लगाने लगे जबकि मुख्य आरोपी यह नहीं जानती जिसके कहने पर इस प्रकार के कार्य को अंजाम दिया उसके पास भी इन लोगों की ऑडियो और वीडियो दोनों ही हैं संभवत उन लोगों के द्वारा ही जिनके पास इस प्रकार की ऑडियो और वीडियो दोनों हैं वहीं वायरल करने में नहीं चूक रहे हैं एसआईटी द्वारा किए गए जप्त पेनड्राइव बंद लिफाफे में कोर्ट में दे दी गई है वायरल करने का कोई सवाल ही नहीं उठता इसी कारण सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज पर या कहावत हनी ट्रैप मामले के मुख्य आरोपियों के ऊपर सिद्ध हो रही है

अब ई-टेंडरिंग घोटाले में भी बुरे फंसे आईएएस विवेक अग्रवाल
मध्यप्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पर ईओडब्ल्यू का नया शिकंजा कसने वाला है। अभी तक उनके खिलाफ स्मार्ट सिटी घोटाले की जांच चल रही थी। लेकिन इसी बीच एक मुखबिर ने विवेक अग्रवाल के खिलाफ बीओटी के तहत हुए सड़क निर्माण घोटाले की प्रमाणिक जानकारियां ईओडब्ल्यू को सौंप दी हैं। यह जानकारियां देखकर ईओडब्ल्यू के अधिकारी भी भौंचक हैं। पूरे 104 टेंडर में जमकर घपले-घोटाले किए हैं। इन घोटालों के मास्टर माइंड विवेक अग्रवाल बताए जा रहे हैं। इसमें सड़क बनाने वाली कंपनियों के अलावा दर्जनों बैंक अधिकारियों के फंसने की भी संभावना है।
विवेक अग्रवाल मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के मुखिया रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में पूरी सरकार में उनकी तूती बोलती थी। कोई उनसे सवाल करने की हिम्मत नहीं कर सकता था। ईओडब्ल्यू को सूचना मिली है कि अग्रवाल के कार्यकाल में बीओटी के तहत 104 सड़कों के टेंडर जारी किए गए। इन टेंडरों में जान बूझकर डीपीआर की राशि लगभग दुगनी की गई। बैंकों के नियम के अनुसार डीपीआर की 60 प्रतिशत राशि बैंक से फायनेंस हो जाती है। इसमें राज्य सरकार भी कुछ अनुदान देती है। खबर है कि अधिकांश कंपनियों ने डीपीआर बढ़ाकर सड़क लागत से भी अधिक राशि बैंकों से ऋण के रूप में ले ली। इनमें से कई मामलों में कंपनियों ने बैंकों को पैसा नहीं लौटाया है। बताया जाता है कि ये पूरा घपला-घोटाला कई अरबों रुपए का है। ईओडब्ल्यू बेहद गोपनीय तरीके से इस बात की जांच कर रही है कि 104 टेंडर में बैंक से ली गई राशि लौटाई गई कि नहीं? कितने मामलों में डीपीआर में जानबूझकर राशि बढ़ाई गई।

टोल में भी झोल
यह भी खबर लगी है कि विवेक अग्रवाल के कार्यकाल में सड़कों के टोल में भी जमकर झोल किया गया है। जिन सड़कों पर 10 साल टोल वसूली होना था उन कंपनियों से लिखवाकर ले लिया कि वे घाटे में हैं तो इन कंपनियों को 10 की जगह 15 साल टोल वसूली की अनुमति दे दी गई।
यह कंपनियां निशाने पर
बताया जाता है कि इस नए घपले-घोटालों में जो कंपनियां ईओडब्ल्यू के निशाने पर आ रही हैं उनमें सोरठिया वेल्जी, मेक्स मेंटाना, माधव इंफ्राटेक, पार्थ हाईवे (पुनीत अग्रवाल) मारूति कंस्ट्रक्शन, इंडियान टेक्नोके्रट, मलानी कंस्ट्रक्शन, श्रीजी इंफ्राटेक, आईएलएनएफएस मुंबई आदि शामिल हैं।

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