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तो कश्मीर में अनुच्छेद 370 का आपरेशन शुरू

नई दिल्ली 2 मार्च 2019 । 26 फरवरी को जब भारत ने पाकिस्तान के कब्जे में कश्मीर में आतंकियों के ठिकानों को नष्ट किया था, तभी मैंने अपना एक ब्लाॅग में लिखा था कि अब कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा देना चाहिए। 370 की वजह से ही कश्मीर में आतंक पनपा है। 28 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में ही केन्द्रीय केबिनेट की बैठक में अनुच्छेद 370 के प्रभाव को कम करने वाले निर्णय लिए गए। इन निर्णयों से जम्मू कश्मीर के लोगों को ही फायदा होगा। असल में 370 कश्मीरियों की ही दुश्मन बनी हुई है। ऐसे केन्द्र सरकार ने निर्णय लिया है कि अब जम्मू-कश्मीर के सवर्ण गरीबों को भी 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। सीमा क्षेत्र होने के कारण तीन प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण मिलेगा तथा पदोन्नति में भी कश्मीरियों को आरक्षण मिल जाएगा। हालांकि अभी अनुच्छेद 370 पर सीधा हमला नहीं किया है, लेकिन इससे केन्द्र सरकार के नियम कायदे लागू होंगे। कुछ दिनों पहले तक किसी में हिम्मत नहीं थी कि 370 को हटाने पर चर्चा भी करें। महबूबा मुफ्ती का तो कहना था कि यदि बदलाव के बारे में सोचा भी गया तो तिरंगे को कंधा देने वाला भी नहीं मिलेगा। आतंकियों का इतना भय खौफ था कि कश्मीर के नेता जुबान खोलने से डरते थे। लेकिन इसे नरेन्द्र मोदी की इच्छा शक्ति और दृढ़ता ही कहा जाएगा कि 370 का आॅपरेशन शुरू कर दिया गया है। सब जानते हैं कि पाकिस्तान के इशारे पर ही कश्मीर में आतंक का माहौल था, अब जब भारतीय वायु सेना ने पीओके में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को नष्ट कर सैकड़ों आतंकियों को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया, अब कश्मीर में आतंक समाप्त हो जाएगा। आम कश्मीरी भारत के साथ रहना चाहता है। जब आपरेशन शुरू कर ही दिया है तो सफल भी होना चाहिए। भारत का आम मुसलमान भी चाहता है कि कश्मीर और कश्मीरी देश के साथ ही बने रहे। मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने जब आतंकियों की कमर तोड़ दी है अब कश्मीर और कश्मीरियों को बचाने की पुख्ता पहल भी करनी चाहिए। अब समय आ गया है जब फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती जैसे राजनेताओं के चेहरे से भी नकाब उतारी जाए। ये नेता करोड़ों रुपए की सरकारी सुविधाएं लेते हैं और पाकिस्तान व आतंकियों के साथ खड़े होते हैं। जिस प्रकार कश्मीर के अलगाववादियों की सुविधाएं छीनी गई हैं, उसी प्रकार फारुख महबूबा जैसे नेताओं की सुविधाएं भी छीनी जानी चाहिए। यदि भारत को आतंक से मुक्त करना है तो कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर हिन्दुओं को वापस घाटी में बसना होगा। पाकिस्तान के इशारे पर आतंकियों ने धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर को जहन्नुम बना दिया है।

मसूद बीमार:

कश्मीर में आतंकवाद समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण खबर यह भी है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मसूद अजहर इन दिनों बेहद बीमार है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री का कहना है कि मसूद अपने घर से बाहर भी नहीं निकल सकता है। पुलवामा हमले की जिम्मेदारी मसूद ने ही ली थी। यह वही मसूद है जिसे कंधार विमान अपहरण के बाद समझौते में छोड़ा था। मसूद के बीमार हो जाने से कश्मीर के अलगाववादियों के हौंसले भी पस्त होंगे। मोदी सरकार के लिए यह भी एक अच्छी खबर है। कश्मीर का आॅपरेशन अब और जल्द हो सकता है।

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