मुख्य पृष्ठ >> देश मे बीते एक दशक में सड़क दुर्घटनाओं में हुई है 12 लाख मौते

देश मे बीते एक दशक में सड़क दुर्घटनाओं में हुई है 12 लाख मौते

नई दिल्ली 16 जनवरी 2020 । मेरा देश जहां का ट्राफिक सिस्टम सिर्फ ऊपर वाले के भरोसे ही चलता है । तेज रफ्तार वाहन चलाना यहां शोक माना जाता है खराब सड़के ओर ट्राफिक नियम तोड़ना यहां आम बात है । जबरदस्ती हॉर्न बजाना यहां सामान्य सी बातों में गिना जाता है । कही भी गाड़ी पार्क करना यहां फैशन का हिस्सा बन चुका है । गाड़ी से कट मारना यहां युवाओं का स्टेटस कहा जाता है । ट्राफिक जवान पर अपना रौब झाड़ना ओर गाड़ी रोकने पर बादशाहत दिखाना यहां की दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन गया है । हेलमेट पहनना इस लिए पसन्द नही क्योकि हेलमेट से बाल बिगड़ जाते है ।
सड़कों पर रोज होती है ऐसी दुर्घटना जिसमें जिंदगी हार जाती है. भारत में कोई दिन नहीं गुजरता जब देश के किसी भाग में सड़क हादसा न हो. भारत में आये दिन सड़क हादसे होते रहते है जिसका खामियाजा लोगों की जान से चुकाना पड़ता है. ये हादसे थमने के नाम ही नहीं ले रहे है. सड़क दुर्घटनाओं की संख्या और इसमें मरने वालों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि ये देश के लिए एक चिंता का विषय बन गया है.
उस देश मे क्या कुछ नुकसान इन कारणों से हो रहा है । जरा आंकड़ो से समझते है ।

अब यह 1 लाख 50 हजार लोग जिनकी मौत सड़क दुर्घटनाओं से हो रही है उनके पीछे छोड़कर जाते है वो कम से कम 6 लाख से अधिक सदस्यों का परिवार इन मौतों में युवाओं की मौते सबसे ज्यादा हो रही है न जाने कितनी माताओं की सन्तान सदा के लिए उनसे बिछड़ जाती है । कितनी ही बहनों के भाई उनसे हमेशा के लिए बिछड़ जाते है । कितने ही सुहाग उजड़ जाते है । लेकिन फिर भी सरकार कोई ठोस कानून बनाती है तो राज्य उसे लागू नही करते । कानून का पालन करवाने वाले सख्ती दिखाते है तो नेताओं की जमात गुस्सा हो जाती है । आखिर इस समस्या का हल कब और कैसे होगा । जब कोई हादसा होता है तो थोड़ा बहुत दिखावा करके सब रफा दफा करने का चलन है हमारे देश मे जो बेरोकटोक मौतों का सिलसिला जारी है इस पर कभी कोई राजनीतिक दल भी बात नही रखता । न कोई बहस इस जरूरी मुद्दे पर करता है । अखबार में यदि ऐसा कोई आंकड़ा आता है तो लोग जल्दी से जल्दी उस पन्ने को पलटना पसन्द करते है । लेकिन पत्रकार का कर्तव्य होता है सच से वाकिफ कराना जो वो कराएगा ही चाहे आप इसे जरूरी मुद्दा समझे या न समझे ।

हाल ही में लोकसभा में मोटर वाहन संसोधन बिल पर चर्चा करते हुए सड़क दुर्घटना को लेकर जो आंकड़े पेश किए गए वो बेहद डरावने थे। हर घंटे 17 मौतों के औसत के साथ हर साल 1,47,913 लोगों की मौत हो जाती है। दुनियाभर की बात करें तो हमारा देश दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर चीन है जहां हर साल 2 लाख से ज्यादा लोगों की मौत सड़क दुर्घटना में हो जाती है। तीसरे नंबर पर ब्राजील और चौथे पर अमेरिका है।

सड़क सुरक्षा पर आधारित ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट में भारत की स्थिति सबसे खराब आई है। यहां सड़क दुर्घटना में सबसे अधिक मौत होती हैं। यह रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से तैयार की गई है ।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में अधिकतर बच्चे और युवा बीमारी नहीं बल्कि सड़क दुर्घटना के कारण अपनी जान गंवाते हैं।

परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को सड़क सुरक्षा सप्ताह का शुभारंभ किया, जो कि देश भर में 17 जनवरी तक चलेगा। प्रति वर्ष यह पूरे देश मे एक साथ आयोजित होता है ।
गडकरी ने कहा, “सड़क दुर्घटनाओं के कारण देश के जीडीपी को दो फीसदी का नुकसान होता है। वहीं, इन दुर्घटनाओं में मारे जाने वालों में से 62% लोग 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के होते हैं।” सबसे ज्यादा युवाओं वाला देश इसमें सबसे ज्यादा युवाओं को खोता है । उन्होंने दुर्घटनाओं की संख्या में 29% की कमी और हताहतों में30% की कमी लाने के लिए उन्होंने तमिलनाडु सरकार की सराहना की।

2019-20 में अब तक सड़क दुर्घटनाओं में हुई मौतों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, उसने नरेंद्र मोदी सरकार की दूसरी पारी में इस पर सरकार की चिंता बढ़ाई होगी, क्योंकि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के उस घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कर रखे हैं जिसमें 2020 तक सड़क हादसों में होने वाली मृत्यु दर को आधा करने का वचन है। ऐसे में इस लक्ष्य को इतने कम समय में कैसे हासिल कर पाएंगे ?

केवल सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों को देखें तो भारत में बीता एक दशक करीब 12 लाख जिंदगियां लील चुका है तथा सवा करोड़ से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल और दिव्यांग की श्रेणी में आ चुके हैं। इतने बड़े आंकड़े को देखकर लोग ट्राफिक नियमो के प्रति जागरूक नही है ।

आईआरएफ ने सड़क दुर्घटनाओं से हुए नुकसान का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए कहा कि दुनिया भर में वाहनों की कुल संख्या का महज तीन प्रतिशत हिस्सा भारत में है, लेकिन देश में होने वाले सड़क हादसों और इनमें जान गंवाने वालों के मामले में भारत की हिस्सेदारी 12.06 प्रतिशत है.

हेलमेट बचाये जान फिर भी न माने इंसान -:
सड़क हादसों में मौत की बड़ी वजह हेलमेट नहीं पहनना है। बाइक या स्कूटी चलाते वक्त हेलमेट नहीं पहनने के चलते सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। सड़क दुर्घटना से होने वाली मौतों में करीब 40 फीसदी की वजह बिना हेलमेट पहने बाइक चलाना है।

साल 2018 में हेलमेट नहीं लगाने वाले 43,600 टू-वीलर चलाने वाले लोगों की हादसों में मौत हुई. साल 2017 के मुकाबले यह आंकड़ा 21 फीसदी ज्यादा था, तब हेलमेट नहीं पहनने वाले 35,975 ऐसे बाइक चालक की हादसे में मौत हुई थी.
सड़क हादसे में बिना हेलमेट पीछे बैठने वाले लोगों की मौत का आंकड़ा भी 15,360 पर रहा. हादसे की स्थिति में बाइक पर चलने वाले लोगों के लिए हेलमेट जान बचाने के मकसद से काफी जरूरी है

कार में सीट बेल्ट नहीं लगाने की वजह से साल 2018 में मरने वाले लोगों की संख्या 24,400 पर रही, जबकि साल 2017 में ऐसे लोगों की संख्या 28,900 पर थी. नए मोटर वाहन कानून के हिसाब से अब कार में बैठे हर व्यक्ति को सीट बेल्ट लगाना पड़ेगा, अन्यथा आपको 1000 रुपये का चालान भरना पड़ेगा. दिलचस्प तथ्य यह है कि दुर्घटना में मरने वाले बिना सीट बेल्ट वाले पैसेंजर की संख्या (15,100) ड्राईवर (9,350) की तुलना में अधिक रही.

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

जमीन विवाद में नया खुलासा, ट्रस्ट ने उसी दिन 8 करोड़ में की थी एक और डील

नई दिल्ली 17 जून 2021 । अयोध्या में श्री राम मंदिर ट्रस्ट के द्वारा खरीदी …