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इन 55 देशों ने मांगा भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन

नई दिल्ली 17 अप्रैल 2020 । कोरोना वायरस को मात देने में सक्षम समझी जाने वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन (एचसीक्यू) की आपूर्ति को लेकर भारत अभी दुनिया का सबसे अग्रणी देश बन गया है। अभी कम से कम 55 देशों ने भारत से इस दवा को खरीदने का आग्रह किया है। अमेरिका, ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देश भारत से इस दवा को खरीद रहे हैं लेकिन गुआना, डोमिनिक रिपब्लिक, बुर्कीनो फासो जैसे गरीब देश भी हैं जिन्हें भारत अनुदान के तौर पर इन दवाओं की आपूर्ति करने जा रहा है। अमेरिका, मॉरिशस और सेशेल्स जैसे कुछ देशों को तो कुछ दिनों पहले ही यह टैबलेट भेजा जा चुका है। बाकी देशों को इस सप्ताह के अंत तक हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की खेप मिल जाएगी।

घरेलू स्तर पर इस दवा के निर्माण को बढ़ाने के लिए सभी तरह के बल्क ड्रग्स के बनाने में पर्यावरण संबंधी मंजूरी देने की प्रक्रिया एकदम आसान कर दी गई है। अगले कुछ दिनों के भीतर बल्क ड्रग्स बनाने की तकरीबन तीन दर्जन आवेदनों को पर्यावरण संबंधी अनुमति दी जाएगी।

विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक 55 देशों के आवेदनों को तीन चरणों में मंजूरी दिया जाएगा। पहले दो चरणों के लिए जिन देशों का चयन किया गया है, उन्हें इनकी खेप भी पहुंचा दी गई है। दक्षिण एशिया में पाकिस्तान को छोड़ कर अन्य सभी देशों ने एचसीक्यू मांगी है और उनमें से अधिकांश को इसकी खेप भेजी जा चुकी है। अभी भारत में इन दवाओं का निर्माण सीमित स्तर पर हो रहा है इसलिए मांग के मुकाबले आपूर्ति कम की जा रही है। जैसे-जैसे निर्माण तेज होगा, वैसे-वैसे आपूर्ति भी बढ़ाई जाएगी।

इन देशों को भी मिलेगा हाइड्रोक्सीक्लोरीक्वीन

सूत्रों के अनुसार, भारत इन पड़ोसी देशों के अलावा जिन देशों को दवा भेज रहा है, उनमें डोमिनिकन रिपब्लिक, जांबिया, युगांडा, बुर्कीना फासो, मेडागास्कर, नाइजर, मिस्र, माली कॉन्गो, अर्मेनिया, कजाखिस्तान, जमैका, इक्वाडोर, यूक्रेन, सीरिया, चाड, फ्रांस, जिंबाब्वे, जॉर्डन, केन्या, नाइजीरिया, नीदरलैंड्स, पेरू और ओमान शामिल हैं। साथ ही, फिलिपींस, रूस, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, स्लोवानिया, उज्बेकिस्तान, कोलंबिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), उरुग्वे, बहामास, अल्जीरिया और यूनाइटेड किंगडम (यूके) को भी मलेरिया रोधी गोलियां भेजा जा चुकी हैं।

39 कंपनियां पीपीई बनाना शुरू

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि बल्क ड्रग्स के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरी देने के नियम एकदम आसान कर दिए गए हैं। अभी तक इन कंपनियों के लिए मंजूरी केंद्र सरकार की तरफ से दी जाती थी लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ही मंजूरी दे दी जाएगी। अभी बल्क ड्र्ग्स से जुड़े तीन दर्जन आवेदन हैं जिन्हें जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी। इसके साथ ही 39 कंपनियां पीपीई बनाना शुरू कर चुकी हैं और महीने के अंत तक भारत दूसरे देशों को भी पीपीई की आपूर्ति होने लगेगी।

पीएम मोदी की पहल की पूरी दुनिया में प्रशंसा

पीएम नरेंद्र मेादी ने कोरोना वायरस से उपजी कोविड-19 बीमारी के उपचार में सहायक मानी जाने वाली मलेरिया की दवा जिस तरह अमेरि‍का समेत तमाम देशों को उपलब्ध कराई, उससे उनके साथ-साथ भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और अधिक निखरी है। कोरोना वायरस से निपटने के लिए हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन को काफी उपयोगी माना जा रहा है। यही कारण है कि अमेरिका व ब्राजील के राष्‍ट्रपति और इजराइल के पीएम ने पीएम मोदी की प्रशंसा की। ब्राजील के राष्‍ट्रपति ने पीएम मेादी की तुलना हनुमान भगवान से की, जिन्‍होंने कष्‍ट के समय लोगों को संजीवनी उपलब्‍ध कराई।

डोनाल्‍ड ट्रंप ने भी की प्रशंसा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने अपने ट्वीट में कहा था कि असाधारण वक्त में दोस्तों के बीच करीबी सहयोग की आवश्यकता होती है। हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन पर फैसले के लिए भारत और भारतीय लोगों का शुक्रिया। इसे भुलाया नहीं जाएगा। इस लड़ाई में न केवल भारत, बल्कि मानवता की मदद करने के लिए आपके मजबूत नेतृत्व के लिए पीएम मोदी आपको बधाई।

क्या है हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन?

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन दशकों से मलेरिया के इलाज की एक निर्धारित दवा है। इसका इस्तेमाल रूमटॉइड आर्थ्राइटिस तथा ल्यूपस (त्वचा पर निकलने वाला एक क्रॉनिक तथा उभरा हुआ घाव) जैसे ऑटोइम्यून रोगों के इलाज के लिए भी होता है।

क्यों माना जाने लगा कोरोना का संभावित इलाज?

एक प्रयोगशाला अध्ययन में पाया गया कि क्लोरोक्विन कोरोना वायरस को कोशिकाओं पर हमले से रोकता है। हालांकि टेस्ट ट्यूब या पेट्री डिसेस में जो दवा वायरस पर काबू पाते हैं, वैसा मानव शरीर में हमेशा नहीं होता है। साथ ही यह पाया गया है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन इंफ्लूएंजा तथा अन्य वायरल रोगों को रोकने या उनके इलाज में सफल नहीं है। लेकिन चीन और फ्रांस के डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन कभी-कभी एंटीबॉयोटिक एजिथ्रोमाइसिन के साथ दिए जाने से रोगियों को राहत मिलती दिखती है।

परंतु यह अध्ययन छोटे पैमाने पर हुआ। इसलिए व्यापक पैमाने पर यह पता नहीं चल पाया कि दवा ने काम किया या नहीं। फ्रांसीसी अध्ययन को इस आधार पर नकार दिया गया कि यह मानकों को पूरा करने वाला नहीं था।

325 जिले हैं कोरोना से मुक्त, 27 जिलों में 14 दिनों से कोई पॉजिटिव केस नहीं

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के संयुक्‍त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि हमारी कोरोना के खिलाफ जंग में अब तक फील्ड स्तर पर किए गए कार्य के तहत 325 जिले ऐसे हैं जहां पर कोई भी केस सामने नहीं आया है। ऐसे जिले जहां पहले केस आए थे लेकिन फील्ड एक्शन के द्वारा उनके नियंत्रण और कंटेनमेंट से संबंधित जो काम किया गया है उसके अंतर्गत पुडुचेरी में माहे एक ऐसा जिला है जहां पिछले 28 दिनों से कोई भी पॉजिटिव केस नहीं आया है। 17 राज्यों में ऐसे जिले 27 हैं जहां पिछले 14 दिनों से कोई पॉजिटिव केस सामने नहीं आया है। हमारी मृत्यु दर यदि 3.3 प्रतिशत है तो जो लोग अब तक स्वस्थ्य हुए हैं उसका प्रतिशत 12.02 के आसपास है।

लव अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री और राज्‍य मंत्री के द्वारा कल एक वीडियो कांफ्रेंसिंग का आयोजिन किया गया, जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्वास्थ्य अधिकारी और क्षेत्र के अधिकारी शामिल हुए थे। इसमें जिला स्तर पर COVID19 के क्‍लस्‍टरों और प्रकोप के लिए माइक्रो योजना पर बातचीत की गई । विश्व स्वास्थ्य संगठन की राष्ट्रीय पोलियो निगरानी नेटवर्क टीम की सेवाओं का उपयोग करते हुए हमारी जारी निगरानी को मजबूत करने पर एक कार्य योजना तैयार की गई है।

2,90,401 लोगों का किया गया टेस्ट

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के डॉ. रमन आर गंगाखेडकर ने कहा कि रैपिड एंटी-बॉडी टेस्ट जल्दी उपचार के लिए नहीं किया जाता है, इसका उपयोग निगरानी के लिए किया जाता है। उन्‍होंने बताया कि आज तक हमने 2,90,401 लोगों का टेस्ट किया है इनमें से 30,043 लोग जिनका टेस्ट कल हुआ, उसमें 26,331 का टेस्ट ICMR नेटवर्क के 176 लैब में किया गया और 3,712 टेस्ट निजी लैब में हुए जिनकी संख्या 78 है।

सभी जिलों में प्रवासी मजदूरों के लिए नोडल अफसरों की नियुक्ति

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने बताया कि कैबिनेट सचिव ने सभी राज्य मुख्य सचिवों को प्रवासी मजदूरों और फंसे व्यक्तियों की सुरक्षा, रहने और खाद्य सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश दिए है। उन्होंने राज्यों से प्रवासी मजदूरों की व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने के लिए जिला कलेक्टरों द्वारा नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने के लिए कहा है।

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