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हनी ट्रेप के हमाम में नंगे हुए थे कमलनाथ सरकार में पुलिस-प्रशासन के ये आला अफसर

भोपाल 3 दिसंबर 2019 । अरे वाह…क्या नेठू मूर्ख ही समझा है हम पत्रकारों को, जो हनी ट्रेप के हमाम में नंगे हुए कमलनाथ सरकार में इन पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारियों के नाम छाप दे। क्या हमें ये ठीक से पता नहीं है कि युद्ध शुरू हो चुका है और इस युद्ध में हम ही हारेंगे। खोजी पत्रकारिता के कीड़े की बदौलत एक-एक अफसरों के नाम पता हैं पर पत्रकार होने के नाते हमें ये भी पता है कि युद्ध में कमलनाथ सरकार तो क्या हम किसी भी सरकार से जीत नहीं सकते इसलिए हनी ट्रेप के हमाम में नंगे हुए नेता व अफसरों के नाम प्रकाशित करना तो दूर मैं सपने में भी इनके नामों की सार्वजनिक उल्टियां नहीं करूंगा।
यदि आप भटैत, चाटुकार, प्रेसक्लब मतदाता या किसी अखबार में हर माह वेतन लेकर सिर्फ नौकरी करने वाले नहीं बल्कि सही व असली पत्रकार हैं और खोजी पत्रकारिता का कीड़ा आपको दिन-रात काटता रहता है तो युद्ध शुरू होने से पहले आप इस कीड़े को मार डालिए। फिर भी यदि वह कुलबुलाता है तो आप नगर निगम, पुलिस, प्रशासन व अन्य किसी विभाग में जाकर चपरासी, कांस्टेबल, हेडकांस्टेबल, एएसआई व बाबू के विषय में खोजी पत्रकारिता कर सकते हैं कि उसने 100 रुपए किस बात के लिए, घर जाकर उसने शराब पी या फिर मूंग का हलवा खाया। 12-12 या 16-16 घंटे की ड्यूटी करने के बाद घर जाने पर मेला या फ़िल्म दिखाने के नाम पर उसकी पत्नी-बच्चों ने लड़ाई की या फिर फूल बरसाए। काम से थक चकनाचूर होकर वह बेसुध हो गया या फिर नागिन डांस किया क्योंकि जैसे ही आपने इन विभागों के आला अधिकारियों की खोजी पत्रकारिता शुरू की तो समझ लेना कि आपका सरकार से युद्ध शुरू होने वाला है क्योंकि सरकार के कानों के पास इन्ही आला अधिकारियों के मुंह होते हैं। ये फुसफुसाते भी हैं तो सरकार को स्पष्ट सुनाई देता है और आप वल्लभ भवन या पीएचक्यू हेडक्वार्टर के बाहर माइक लेकर भी चिल्लाते है तो सरकार के कानों में आपकी सही आवाज भी नहीं पहुंच पाती। ऐसे में इन आला अधिकारियों के खिलाफ आपकी खोजी पत्रकारिता धरी की धरी रह जाएगी और बाद में इनके बताए अनुसार सरकार चाहेगी तो आपको आलपिन चोरी के झूठे मुकदमे में भी सरेराह फांसी पर लटका देगी। अब देखिए ना पत्रकार जीतू सोनी ने हनी ट्रेप के हमाम में नंगे शिवराज सरकार के मंत्री और अफसर के नामों की खोज की। इनमें से कई अफसर अब कमलनाथ सरकार में कार्यरत हैं। जैसे ही उन्हें लगा कि अब उनका नाम सार्वजनिक होने वाला है। वैसे ही उन्होंने रातों-रात कमलनाथ सरकार को युद्ध लड़ने के लिए मना लिया। इसलिए मैं मूर्ख नहीं कि पता होने पर भी हनी ट्रेप के हमाम में नंगे हुए इन अफसरों और नेताओं के नाम छाप दू। किसी भी युद्ध में मैं इनसे कभी जीत नहीं सकता क्योंकि हमारी खोजी पत्रकारिता के खिलाफ कमलनाथ सरकार के पास उनके 115 विधायक हैं। इनमें से 28 मंत्री हैं। समय आने पर विपक्ष यानी भाजपा के 107 विधायक भी उनका ही साथ देंगे। इसी प्रकार एक मुख्य सचिव हैं। एक डीजीपी हैं। तीन दर्जन से अधिक प्रमुख सचिव व एडीजी हैं। 13 संभागायुक्त हैं। 13 आईजी हैं। 18 अपर कमिश्नर हैं। 18 डीआईजी हैं। 53 कलेक्टर हैं। 53 एसपी हैं। 53 जिला पंचायत सीईओ हैं। सैकड़ों अपर कलेक्टर, एएसपी, डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी, तहसीलदार व टीआई हैं। खोजी पत्रकार जीतू सोनी पर करवाई के बाद मैं तो पूरी कोशिश करूंगा कि अपनी खोजी पत्रकारिता का कीड़ा मार दू और ये कीड़ा कभी कुलबुलाया भी तो इसे शांत करने के लिए बेचारे चपरासी, बाबू, कांस्टेबल, हेडकांस्टेबल, एएसआई व छुटभैये नेता जो हैं। खोजी पत्रकार सोनी पर गंभीर प्रकरण से सबक लेकर अब पूरी कोशिश रहेगी कि अपनी खोजी पत्रकारिता का गला घोंटकर सिर्फ सूचना दूं कि-‘हर्षोल्लास से मनी हनी ट्रेप के हमाम में कुछ आला अफसरों की होली’

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