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राष्ट्र के ये तीन प्रमुख सरकारी बैंक नए वर्ष में पूरी तरह से हो जाएंगे समाप्त

नई दिल्ली 24 दिसंबर 2018 । नए वर्ष में राष्ट्र के तीन प्रमुख सरकारी बैंक पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे. इनकी स्थान एक नया बैंक बनेगा, जिससे इनके ग्राहकों पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा.गवर्नमेंट ने इस वर्ष बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक व विजया बैंक का विलय करने का ऐलान किया था. अब वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली मंत्रियों की समिति ने इनके विलय के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है.

बनेगा राष्ट्र का तीसरा सबसे बड़ा बैंक

देना बैंक व विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय होगा. इस विलय के बाद जो बैंक अस्तित्व में आएगा, वह एसबीआई व आईसीआईसीआई बैंक के बाद राष्ट्र का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा. हालांकि इन बैंकों के ग्राहकों का पेपरवर्क बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा. देना व विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय नहीं होगा, ब्लकि तीनों बैंकों का विलय करके एक नया बैंक बनाया जाएगा.

फिर से खोलना पड़ सकता है खाता

इन तीन बैंकों के ग्राहकों को नए बैंक में अपना फिर से खाता खोलना होगा. इससे उनका पेपर वर्क बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा. ग्राहकों को खाता खोलने के लिए एक बार फिर से केवाईसी की प्रक्रिया को दोहराना होगा. केवाईसी हो जाने के बाद ग्राहकों को नयी चेकबुक, एटीएम कार्ड व पासबुक मिलेगी.

देश में यह हैं पांच बड़े बैंक

राष्ट्र में जो पांच बड़े बैंक हैं, उनमें एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक व बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल हैं. इन बैंकों में एसबीआई में फिल्हाल सहयोगी बैंकों वइंडियन महिला बैंक का विलय हो चुका है.

जमा राशि रहेगी सुरक्षि
इन तीनों बैंकों के ग्राहकों की जमा राशि पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी. हालांकि विलय होने के बाद जब नया बैंक आस्तित्व में आएगा, तो फिर ग्राहकों को कुछ समय के लिए खाते का परिचालन करना बंद करना पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि सभी कुछ नए सिरे से होगा व बैंक उतने समय के लिए आपके खाते में से पैसा निकालने या फिर जमा कराने पर रोक लगा सकता है.

85 हजार कर्मचारियों की संख्या

एकीकरण के बाद यह राष्ट्र का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा, जिसका कुल कारोबार 14,82,422 करोड़ रुपये का व उसमें 85,675 कर्मचारी वऑफिसर होंगे. इस समय बैंक ऑफ बड़ौदा में 56,361, विजया बैंक में 15,874, जबकि देना बैंक में 13440 कर्मचारी हैं.

इससे बड़े या मजबूत बैंक की अपेक्षा छोटे या निर्बल बैंक में कार्य करने वाले कर्मचारियों को लाभ होगा. उनकी न सिर्फ सेवा शर्तें बेहतर हो जाएंगी, बल्कि वेतन भत्ता भी बेहतर हो जाएगा. निदेशक मंडल की मीटिंग में तय होगा कि एकीकृत बैंक का नाम क्या होगा.

इसके अलावा, अन्य चीजों पर भी वहीं निर्णय होगा. इस बैंक का कुल कारोबार 14,82,422 करोड़ रुपये का होगा जबकि कुल ऋण 6,40,592 करोड़ रुपये का होगा.

लोन पर नहीं पड़ेगा असर

बैंकों का विलय होने से आपके लोन व ब्याज दर पर भी कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा. जब कोई बैंक किसी बैंक में मर्ज होता है तो लोन अमाउंट उस बैंक में ट्रांसफर हो जाता है व मौजूदा ब्याज दर ही उस पर अप्लाई होता है.

खुश हैं बैंकों के बड़े अधिकारी

बैंक ऑफ बड़ौदा के एमडी व सीईओ पी एस जयकुमार ने बोला है कि इस निर्णय से बैंक को लाभ होगा. बैंक को स्केल बढ़ने का लाभ मिलेगा व ज्यादा प्रोडक्ट ऑफर कर सकेंगे. इससे आगे ग्रोथ के लिए अच्छी उम्मीद है.

वहीं विजया बैंक के सीएमडी शंकर नारायण ने बोला है कि इस विलय के बाद कर्मचारियों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. तीनों बैंकों में गवर्नमेंट की 70 प्रतिशत हिस्सेदारी है.विलय को मंजूरी मिलने में कोई दिक्कत नहीं होगी.गवर्नमेंट ने पर्याप्त पूंजी देने का भरोसा दिया है.

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