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राहुल गांधी के मंच पर ज्योतिरादित्य सिंधिय़ा ने किया यह बड़ा ऐलान

नई दिल्ली 26 फरवरी 2019 । राहुल गांधी के निर्देश के बाद प्रदेश कांग्रेस लोकसभा चुनाव में 24 नही बल्कि 29 सीटों पर फोकस कर रही है।पार्टी ने लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारी के लिए फॉर्मूला भी तैयार किया है। इसे ‘विन 29’ नाम दिया गया है। इसी फॉर्मूले को आधार बनाकर पार्टी टिकट बंटवारे को लेकर मंथन कर रही है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 16 लोकसभा सीटों की रायशुमारी करने के बाद साफ कर दिया है कि विधानसभा की तर्ज पर लोकसभा के टिकट भी सर्वे कराकर बांटेंगे। वही 26 फरवरी तक राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री कमलनाथ और प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया से नाम मांगे है।चुंकी बावरिया के अस्वस्थ्य होने के चलते फिलहाल सारी जिम्मेदारी कमलनाथ पर है। उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द ही नामों पर चर्चा कर फाइनल लिस्ट राहुल गांधी को सौंपेंगें।

दरअसल, कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य में कांग्रेस ने डेढ़ दशक बाद सत्ता हासिल की है। आगामी लोकसभा चुनाव में भी वह विधानसभा चुनाव की तरह प्रदर्शन दोहराना चाह रही है। कांग्रेस की नजर उन सीटों पर है जहां कांग्रेस एक या दो बार जीती हो, वोटों का अंतर कम रहा हो, विधानसभा में पकड़ मजबूत हुई हो।

विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी टिकटों को लेकर माथापच्ची ना हो इसके लिए सारी बागडोर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने संभाल ली है और सभी को दो टूक शब्दों में कह दिया है कि लोकसभा के टिकट सर्वे कराकर बांटे जाएंगें।

वही पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने 26 फरवरी तक प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटों के उम्मीदवारों के नाम मांगे हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ और प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया उम्मीदवारों की सूची तैयार कर रहे हैं और अबतक कई सीटों पर समीक्षा भी कर चुके है। कांग्रेस के पास सर्वे रिपोर्ट भी आ चुकी है जिसमें जिताउ उम्मीदवारों के नाम हैं।इसके लिए लोकसभा प्रभारी और मंत्रियों ने भी उन्हें उम्मीदवारों के संभावित नाम बंद लिफाफे में सौंपे है। इस सूची का मिलान सर्वे से किया जाएगा और मिलान के बाद कॉमन नाम को फाइनल उम्मीदवारों की सूची में शामिल किया जाएगा। यानि कि संभावित उम्मीदवारों में से जिस प्रत्याशी का नाम सर्वे में पाया जाएगा, उसे टिकट दिया जाएगा। यदि बंद लिफाफे में नाम है और सर्वे में नहीं आता है तो पार्टी उसे टिकट नहीं देगी, या फिर उसका टिकट काट दिया जाएगा।इसके बाद इसके अंतिम मोहर के लिए पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के पास भेजा जाएगा, वहां से ग्रीन सिग्नल मिलते ही नामों का ऐलान कर दिया जाएगा, ताकी उम्मीदवारों को संसदीय क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा घूमने का मौका मिले.

राहुल ने भी करवा रखा है सर्वे पिछले दिनों राहुल गांधी की भोपाल रैली के दौरान राहुल गांधी के मंच पर ज्योतिरादित्य सिंधिय़ा ने सभी 29 लोकसभा सीटें जीतने की हुंकार से साफ है कि पार्टी के चुनावी सुर अब पूरी तरह से बदल गए हैं। अब तक प्रदेश में बीस से चौबीस सीटें जीतने का दम भर रहे कांग्रेस नेताओं को राहुल गांधी ने दो टूक सभी 29 सीटें जीतने का टास्क दिया है। इसके लिए इस बार राहुल गांधी ने भी प्रदेश का सर्वे करवाया है। इस सर्वे में भी लोकसभा क्षेत्र से संभावित उम्मीदवारों की सूची बनाई गई है। राहुल अपने सर्वे और प्रदेश से आए नामों में से एक उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगाएंगे। राहुल गांधी की अंतिम मुहर लगने के बाद उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया जाएगा।

16 पर रायशुमारी, 13 अब भी बाकी

मुख्यमंत्री ने बीते सप्ताह में टीकमगढ़, सतना, बालाघाट, उज्जैन, रीवा, मंदसौर, होशंगाबाद, धार, शहडोल, बैतूल, सागर, खरगौन, मंडला, रतलाम, दमोह और विदिशा लोकसभा सीटों के लिए बनाए गए प्रभारियों तथा प्रभारी मंत्रियों से चर्चा कर फीडबैक लिया है। वहीं, 13 सीटों पर रायशुमारी होनी बाकी है। कमलनाथ सभी 29 सीटों पर सर्वे कराएंगे।

इन सीटों पर खास नजर

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार को सागर और खरगौन लोकसभा सीट का फीडबैक लिया। सागर लोकसभा सीट से कई दावेदार शामिल हैं, जिनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन, पूर्व मंत्री प्रभु सिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री प्रकाश जैन के अलावे भूपेंद्र गुप्ता, भूपेंद्र सिंह मोहासा और अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। कांग्रेस पार्टी सागर लोकसभा सीट 1991 के बाद नहीं जीत पाई है, इस दौरान आनंद अहिरवार ने जीत दर्ज की की थी। इसके बाद यह सीट सामान्य होने पर बीते ढाई दशक से भाजपा जीत दर्ज करती रही। इसलिए कांग्रेस का फोकस इन सीटों पर है ,ताकी इधर स्थिति को मजबूत किया जा सके।

ज्योतिरादित्य सिंधिया बोले- कांग्रेस सत्ता में आई तो संसद के पहले सत्र में पास होगा महिला आरक्षण बिल
कांग्रेसी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रविवार को आंगनवाड़ी केंद्र पर आयोजित सखी संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे जहां उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी केंद्र में आती है तो वो संसद के पहले सत्र में ही महिला आरक्षण बिल को सदन में पेश करेगी. गौरतलब है कि महिलाओं को संसद और राज्यों की विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने वाला महिला रिजर्वेशन बिल 9 मार्च 2010 को ही राज्यसभा में पास हो गया था लेकिन उसके बाद से वो लोकसभा में लटका हुआ है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया से मांग की गई कि उनकी पत्नी प्रियदर्शनी राजे सिंधिया को वो गुना-शिवपुरी सीट से उतारें जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि वो चुनाव लड़ने के खिलाफ थे लेकिन आज वो बतौर सांसद आपके बीच आए हैं. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद हो सकता है मैं सांसद के पति के तौर पर आपके सामने आऊं. पत्नी प्रियदर्शनी की तारीफ करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि वो मुझसे ज्यादा काबिल हैं. उन्होंने कहा कि अगर महिला आरक्षण बिल पास हो जाता है तो संसद में 160-170 महिला सांसद होंगी.

बीजेपी पर हमला बोलते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि देश में असहिष्णुता का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है लेकिन ये देश सेक्युलर है जहां महिलाओं का सम्मान किया जाता है. कार्यक्रम में मौजूद प्रियदर्शनी राजे ने कहा कि महाराज(ज्योतिरादित्य सिंधिया) जनता की आवाज उठाते रहेंगे. खुद के बारे में उन्होंने कहा कि उनका चुनाव लड़ने का फिलहाल कोई मन नहीं है.

सिंधिया से मिलीं मोदी सरकार की मंत्री

इसी के साथ राजनीतिक पार्टियों का जोड़-तोड़ का खेल भी शुरू हो गया है। इसी कड़ी में एनडीए को एक बड़ा झटका लग सकता है| दरअसल, एनडीए की सहयोगी पार्टी अपना दल (सोनेलाल) और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर हुई बैठक ने बीजेपी की नींद उड़ा दी है। गौरतलब है कि अपना दल(स) की नेता और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात की।

इस मुलाक़ात को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं| एनडीए के नेतृत्व में कई दिनों से अपना दल के नेता आरोप लगा रहे हैं कि वे केंद्र और बीजेपी दोनों जगह से नजरअंदाज़ किए जा रहे हैं।

अनुप्रिया पटेल ने बरेली में कहा, “हमें बीजेपी में कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है हमने बीजेपी के शीर्ष नेताओं से बात कि और 20 फरवरी तक का समय दिया था लेकिन बीजेपी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। इससे लगता है कि बीजेपी को अपने सहयोगियों की परेशानी हल करने की कोई परवाह ही नहीं है। ऐसे में अपना दल(स) अपना रास्ता खुद बनाएगी।“

वहीं आशीष पटेल ने कहा, ”हम चाहते हैं कि 2019 में एक बार फिर से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बने। हमने इसके लिए कोशिश भी की। हमने उन्हें 20 फरवरी तक का समय भी दिया लेकिन हमारी समस्या का कोई हल नहीं निकाला गया। 28 फरवरी को पार्टी की बैठक बुलाई गई है जिसके बाद फैसला लिया जाएगा। सिंधिया संग मुलाकात को लेकर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति में विकल्प हमेशा खुले रहते हैं।

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