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16 लाख लोगों का सर्वे लेकर आया यह चैनल, 2019 के चुनाव की तस्वीर हुई साफ!

नई दिल्ली 24 सितम्बर 2018 । दोस्तों आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर तरह तरह के सर्वे सामने आ रहे हैं।वैसे तो सर्वे एजेंसियों का पुराना रिकार्ड बहुत ज्यादा सही नही है।ऐसे में सवाल उठता है कि किस सर्वे को सही माना जाए। तो सबसे पहले देखें कि किस सर्वे में ज्यादा से ज्यादा लोग शामिल किए गए हैं।तो हालिया सर्वे में एबीपी न्यूज़ और सी वोटर का सर्वे सबसे बड़ा है।इसमें 19 राज्यों के तकरीबन 16 लाख लोगों की राय ली गयी है।तो यह सर्वे काफी हद तक विश्वशनीय माना जा सकता है। यदि एबीपी की सर्वे की बात सच है तो देश मे एक बार फिर मोदी सरकार आएगी।हालांकि 2014 की तरह यह प्रचंड बहुमत वाली सरकार नही होगी।इस बार भाजपा और उसके सहयोगियों को 273 सीट मिल सकती हैं जबकि 2014 में यह आंकड़ा 325 था।वहीं कांग्रेस और सहयोगी 63 से बढ़कर 160 तक पहुंच जाएंगे। तो दोस्तों आपको क्या लगता है कि 16 लाख लोगों के सर्वे में जो तस्वीर उभरी है वो 2019 में कितनी सच साबित होगी,कमेंट करके बताइये।

10 राज्यों में है सर्वाधिक लोकसभा सीट, कौन सा राज्य होगा 2019 का किंग मेकर?
दोस्तो भारत दुनिया का सब से बड़ा गणतंत्र है। और लोकसभा के चुनाव भारत के सबसे बड़े चुनाव होते है जिस से केंद्रसरकार तय होती है। भारत की लोकसभा में मौजूदा स्थिति में 543 सदस्य है। और इनका चयन जनता द्वारा किया जाता है। तो चलिए देखते है, किस राज्य से लोकसभा में कितने सांसद आते है, और इनमे से कितने सांसद आरक्षित क्षेत्र से आते है।

आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश लोकसभा सदस्य संख्या के मामले में नंबर दस पर है। विभाजन से पूर्व आंध्र प्रदेश में कुल बयालीस सीट थी। लेकिन तेलंगाना राज्य के बनने से आंध्र प्रदेश में फिलहाल पच्चीस लोकसभा सीट है। इस समय आंध्र प्रदेश से टीडीपी की सर्वाधिक सीट है।

राजस्थान

राजस्थान में भी लोकसभा के कुल पच्चीस क्षेत्र है। जिनमे से चार क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए और तीन क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित क्षेत्र है। राजस्थान में मौजूदा स्थिति में सर्वाधिक सीट भाजपा की है।

गुजरात

गुजरात मे आंध्र प्रदेश और राजस्थान से महज एक सीट ज्यादा है। यानी गुजरात मे लोकसभा की कुल छब्बीस सीट है। जिनमे से दो सीट एससी के लिए और चार सीट एसटी के लिए आरक्षित है। मौजूदा स्थिति में गुजरात मे से सर्वाधिक लोकसभा सीट भाजपा के पास है।

कर्नाटक

कर्नाटक लोकसभा सीट के मामले में भारत का सांतवा बड़ा राज्य है। यहां से भारत की लोकसभा में कुल अट्ठाइस सदस्य चुनकर आते है। जिसमे से पांच सीट एससी के लिए और दो सीट एसटी के लिए आरक्षित है। मौजूदा स्थिति में भाजपा की सर्वाधिक सीट है। लेकिन हाल ही के विधानसभा में जेडीएस और कांग्रेस के गठबंधन ने कर्नाटक विधानसभा में अपनी सरकार बनाई है।

मध्यप्रदेश

विभाजन से पूर्व मध्यप्रदेश में कुल चालीस सीट थी। लेकिन विभाजन के बाद इसमे से ग्यारह सीट छत्तीसगढ़ राज्य में है। मौजूदा स्थिति में एमपी में उनतीस सीट है। इनमे से सबसे ज्यादा सीट भाजपा के पास है। तो क्या आनेवाले चुनाव में मध्यप्रदेश कोई नया विकल्प चुनेगा?

तमिलनाडु

शुरुवाती दौर से तमिलनाडु में क्षेत्रीय दल ज्यादा सक्रिय रहे है। डीएमके और एआइएडीएमके के बीच कड़ा मुकाबला हमेशा से रहा है। तमिलनाडु में कुल उनतालीस सीट है, इनमे से बत्तीस सीट अनारक्षित यानी जनरल कैटेगरी के है। मौजूदा स्थिति में एआइएडीएमके की सर्वाधिक सीट लोकसभा में है।

बिहार

विभाजन के बाद भी बिहार लोकसभा सीटों की संख्या के मामले में देश का चौथा बड़ा राज्य है। बिहार में लोकसभा की कुल चालीस सीट है। जिनमे से चौतीस सीट जनरल कैटेगरी के है। और छह सीट एससी के लिए आरक्षित है। इस राज्य में आरजेडी और जेडीयू के बीच कड़ा मुकाबला रहने के आसार है।

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल लोकसभा सीट के मामले में तीसरे नंबर पर है। यहां से लोकसभा के लिए कुल बयालीस सांसद चुनकर आते है। बयालीस में से दस सीट एससी और चार सीट एसटी के लिए आरक्षित है। इस राज्य में से मौजूदा स्थिति में तृणमूल कांग्रेस के ज्यादा सांसद है।

महाराष्ट्र

लोकसभा सीट के मामले में महाराष्ट्र देश का दूसरे नंबर का राज्य है। महाराष्ट्र से कुल अड़तालीस सदस्य लोकसभा के लिए चुने जाते है। मौजूदा स्थिति में महाराष्ट्र में कांग्रेस और भाजपा के अलावा शिवसेना और एनसीपी बड़ी पार्टियां है। लेकिन सर्वाधिक सीट भाजपा और शिवसेना गठबंधन के पास है।

उत्तर प्रदेश

मौजूदा स्थिति में भारतीय लोकसभा की सर्वाधिक अस्सी सीट उत्तर प्रदेश से आती है। इस मामले में यूपी देश का सबसे बड़ा राज्य है। उत्तर प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का सिक्का चलता है। यह आम राय है कि यूपी का झुकाव जिस पार्टी के तरफ होता है, वही पार्टी लोकसभा में सत्ता बनाती है। लेकिन राजनीति में कोई भी तर्क कभी भी बदल सकता है।

मौजूदा सीटों की जानकारी निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट से ली गई है। मौजूदा जानकारी के अनुसार आरक्षण की स्थिति साल 2008 में तय की गई है। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट का अवलोकन करें।

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