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सालभर में लोकायुक्त कार्यवाही से सरकार के खजाने में पहुँचे सिर्फ 44 करोड़

नई दिल्ली 18 मई 2019 । प्रदेश में भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई के लिए अधिकृत संस्था लोकायुक्त भ्रष्ट अधिकारी एवं विभागों पर कार्रवाई में पीछे रहा है। आबकारी, परिवहन एवं खनिज ऐसे विभाग हैं, जिनके भ्रष्टाचार की चर्चा खूब होती है, लेकिन लोकायुक्त इन पर कार्रवाई करने में फिसड्डी रहा है। लोकायुक्त संगठन ने सालभर में रिश्वत और अनुपातहीन संपत्ति के 200 मामलों में कार्रवाई की है, जिसमें करीब 44 करोड़ रुपए की राशि जब्त होकर सरकारी खजाने में पहुंचाई गईहै।
रिश्वत खोरी के आरोपों में सबसे बड़ा मामला बालाघाट में सामने आया, जिसमें ग्रामीण यांत्रकी सेवा के कार्यपालन यंत्री ने सुरक्षा निधि लौटने के लिए तीन लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। लोकायुक्त संगठन की विशेष स्थापना पुलिस ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में कार्रवाई कर 177 रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकडऩे और 21 अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने के प्रकरण दर्ज किए। यही नहीं लोकसेवक के पद के दुरुपयोग के 27 मामले दर्ज हुए। रिश्वत लेने के आरोपों में घिरने वाले लोगों से लोकायुक्त पुलिस ने 26 लाख 70 हजार से ज्यादा की राशि जब्त कर सरकारी खजाने में जमा कराई तो वहीं अनुपातहीन संपत्ति के 21 मामलों में लोकायुक्त पुलिस ने 43 करोड़ 70 लाख से ज्यादा की राशि को जब्त किया।

2018-19 में लोकायुक्त पुलिस ने जिन 21 अनुपातहीन संपत्ति के मामलों में कार्रवाई की, उनमें से धार में पदस्थ रहे आबकारी अधिकारी पराक्रम सिंह चंद्रावत के पास 11 करोड़ 45 लाख 59 हजार से ज्यादा की राशि की संपत्ति मिली है। इसी तरह इंदौर के एसडीओ फॉरेस्ट आरएन सक्सेना के यहां करीब तीन करोड़ 47 लाख तो इंदौर नगर पालिक निगम के बेलदार असलम खान के पास चार करोड़ 74 लाख से ज्यादा की संपत्ति मिली। छतरपुर के प्रभारी समिति प्रबंधक सेवा सहकारी समिति भानुप्रताप अवस्थी के यहां भी करीब तीन करोड़ 34 लाख अनुपातहीन संपत्ति मिली।

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