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शिप्रा में पानी लाने के लिए नवागत कलेक्टर और संभागायुक्त को बनना पड़ रहा है भागीरथ

उज्जैन 10 जनवरी 2019 । शनिश्चरी अमावस्या पर शिप्रा के त्रिवेणी घाट पर पानी नहीं होने और श्रद्धालुओं को फव्वारों के जरिये गंदे,कीचड़युक्त पानी से स्नान कराये जाने का मामला अभी भी गरमाया हुआ है। कलेक्टर मनीष सिंह और संभागायुक्त एमबी ओझा को भले ही इस गलती का दोषी मानकर राज्य सरकार ने हटा दिया हो पर नवागत कलेक्टर शशांक मिश्रा और संभागायुक्त अजीत कुमार के लिए शिप्रा में पानी का न होना अभी भी चुनौती बना हुआ है। क्योंकि इसी सप्ताह मकर संक्रान्ति का पर्व आने वाला है और फिर शिप्रा के विभिन्न घाटों पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी।ऐसे में शिप्रा में श्रद्धालुओं के स्नान के लिए पानी होना जरूरी है। शुक्रवार को इसी के चलते नवागत कलेक्टर शशांक मिश्रा और संभागायुक्त अजीत कुमार ने जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों के साथ शिप्रा में पानी की तलाश की और मकर संक्रांति के स्नान के लिए शिप्रा में पानी लाने की संभावनाओं को तलाशने की कोशिश की।

इसी कड़ी में संभागायुक्त अजीत कुमार एवं कलेक्टर शशांक मिश्रा ने बुधवार को उज्जैन जिले के शिप्रा के प्रवाह स्थलों से लेकर देवास एवं इन्दौर जिले की सीमा पर स्थित स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, राजस्व विभाग, एनवीडीए विभाग आदि के अधिकारी भी उनके साथ रहेे। निरीक्षण के दौरान अधिकारी द्वय ने निर्देश दिए कि सम्बन्धित सभी विभागों के अधिकारी शिप्रा नदी में नर्मदा का जल लाने के काम में जुट जाएं और नर्मदा का जल छोड़े जाने के स्थल से रामघाट उज्जैन तक यह जल पर्याप्त मात्रा में आ सके, इसकी व्यवस्था करें। उन्होंने जिम्मदारों को चेतावनी दी कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही अक्षम्य होगी। इसलिए आपसी समन्वय से अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि मकर संक्रांति पर शिप्रा में नर्मदा का पानी कैसे लाया जा सकता है।

निरीक्षण की शुरूआत सुबह 8 बजे जूना निनौरा ग्राम में शिप्रा नदी पर बनाए गए स्टॉपडेम से हुई।जहां शिप्रा सूखी हुई थी। इस पर संभागायुक्त ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से डिटेल ली जिस पर अधिकारियों ने जानकारी दी कि नर्मदा-शिप्रा लिंक योजना से इस स्थान तक पानी पहुंचने में लगभग 30 घंटे का समय लगता है। पर रास्ते मे कई स्थानों पर किसानों द्वारा पानी लिए जाने से ये समय बढ़ जाता है। इस पर संभागायुक्त एवं कलेक्टर ने निर्देश दिए कि स्टॉपडेम के सभी गेट खोल दिए जाएं। साथ ही किसानों से आग्रह किया जाए कि वे न तो मार्ग में अवरोध पैदा करें और न ही आगामी पर्व तक पानी लें। इसके लिए निगरानी का काम एडीएम जीएस डाबर को सौंप दिया गया।
उन्होंने अधिकारियों को ये भी निर्देशित किया वे पानी छोड़ने की सूचना आवश्यक रूप से गांव वालों को दें ताकि उनका कोई नुकसान न हो। संभागायुक्त ने पीएचई को निर्देश दिए कि स्टॉपडेम के सारे गेट खोल दिए जाएं, जिससे कि पानी आसानी से आगे बढ़ सके। अधिकारियों ने किसानों से भी आग्रह किया कि वे मकर संक्रांति तक नदी से पानी न लें।
शिप्रा नदी अपस्ट्रीम में चिमली डेम में शिप्रा नदी में थोड़ा पानी मिला। पर वहां पाया गया कि स्टापडेम के गेट पूरी तरह नहीं खोलकर और अवरोध पैदाकर पानी को आगे बढ़ने से रोका जा रहा है।इस पर दोनों ने डेम के सभी गेट खोलने और अवरोध हटाने के निर्देश दिये और देवास जिले में शिप्रा नदी पर बनाए गए देवास बैराज का भी निरीक्षण किया जहाँ से नर्मदा का पानी छोड़ा जाता है। इस दौरान उन्हें एनवीडीए, सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि यहां पर जल स्तर 492.3 मीटर होने पर उज्जैन तक पर्याप्त पानी आसानी से पहुंच जाता है। इस पर निर्देश दिए गए कि आगामी 12 तारीख तक यहां पर शिप्रा का जल स्तर 492.3 मीटर तक किया जाए, जिससे 13 तारीख तक उज्जैन शिप्रा नदी में पर्याप्त पानी पहुंच जाए। इसके लिए सभी विभाग जुट जाएं। कलेक्टर और संभागायुक्त ने देवास कलेक्टर डॉ श्रीकांत पांडेय के साथ इन्दौर जिले की सीमा पर स्थित जालौद डेम पहुंचकर वहां शिप्रा नदी के प्रवाह की स्थिति देखी। यहां डेम के 4 गेट खुले पाए गए, शेष गेट बन्द थे। इस पर अधिकारियों ने निर्देश दिए कि डेम के सारे गेट खोले जाएं।

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