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आदिवासी महिलाओं ने पारम्परिक शराब महुआ से सेनिटाइजर तैयार किया

भोपाल 1 मई 2020 । कोरोना वायरस महामारी के चलते बचाव के लिये मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के आदिवासी अंचल की महिलाओं ने एक अनूठा उत्पाद तैयार कर लिया है। दरअसल, महिलाओं ने क्षेत्र में बनने वाली महुआ की पारंपरिक शराब के जरिए सैनिटाइजर तैयार किया है। जांच के बाद चिकित्सकों ने इसे बेहद कारगर माना है। खास बात यह है कि बाजार में उपलब्ध अन्य सैनिटाइजर की तुलना यह बेहद सस्ता है।

कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए मप्र ग्रामीण आजीविका परियोजना से जुड़े उदयगढ़ विकासखंड के धामंदा गांव के श्री हरि आजीविका समूह की महिलाओं ने सैनिटाइजर बनाने का निर्णय लिया था। चूंकि महिलाओं को सैनिटाइजर बनाने का तरीका मालूम नहीं था, इसलिए इसे सीखने के लिए शुरू में यू-ट्यूब सहित अन्य माध्यमों की मदद ली। परियोजना के अफसरों ने भी सैनिटाइजर बनाने की विधि समझाने के संबंध में सहायता की। प्रारंभ में 10 सदस्यीय समूह की महिलाओं ने अल्कोहल से सैनिटाइजर तैयार करना शुरू किया।

हालांकि लॉकडाउन के बाद अल्कोहल की आपूर्ति बंद हो गई। ऐसे में वैकल्पिक उपाय तलाशने शुरू किए गए। क्यों न महुआ शराब का उपयोग किया जाए जब समूह को अल्कोहल नहीं मिला तो वैकल्पिक उपायों पर चर्चा के दौरान महुआ की शराब इस्तेमाल करने का विचार आया।

आदिवासी सदियों से महुआ की शराब पारंपरिक वाष्पन विधि से बनाते आए हैं। महिलाओं ने इस विचार पर तत्काल काम शुरू किया और महुआ एकत्र करना शुरू किया। महुआ से वाष्पन विधि से शराब बनाई गई। इसके बाद दुर्गंध न आए, इसलिए इसमें तुलसी के पत्ते, गुलाब जल सहित रंग मिलाया गया। देखते ही देखते सैनिटाइजर तैयार हो गया।

समूह ने उदयगढ़ में चिकित्सकों से सैनिटाइजर का परीक्षण भी कराया। जांच के बाद डॉक्टरों ने इसे प्रभावी माना। साथ ही इस उत्पाद की बिक्री के लिए सर्टिफिकेट भी जारी किया। समूह की अध्यक्ष भारती अमरसिंह बताती हैं कि अब तक विभिन्न संस्थाओं को 200 बोतल सैनिटाइजर का विक्रय कर चुके हैं। काम तेजी से जारी है। प्रयास है कि अधिक से अधिक लोगों तक यह सस्ता और प्रभावकारी सैनिटाइजर पहुंचाएं ।

200 एमएल का दाम सिर्फ 70 रुपये

समूह द्वारा तैयार 200 एमएल सैनिटाइजर की बोतल का दाम सिर्फ 70 रुपये है। समूह को एक बोतल की लागत 60-65 रुपये तक आ रही है जबकि बाजार में उपलब्ध इतनी मात्रा के अन्य सैनिटाइजर की कीमत 300 रुपये तक हैं। यानी यह सस्ता है। आजीविका परियोजना के विकासखंड प्रबंधक विजय सोनी बताते हैं कि बीते दिनों सैनिटाइजर का विमोचन जिला पंचायत सीईओ ने किया था। अफसरों ने भी समूह के इस प्रयास को सराहा है। आजीविका परियोजना से जुड़ी महिलाएं मास्क व हैंडवॉश निर्माण का काम भी कर रही हैं।

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