मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> संविधान में आस्था ही असली राष्ट्रवाद, RSS हेडक्वार्टर में प्रणब मुखर्जी

संविधान में आस्था ही असली राष्ट्रवाद, RSS हेडक्वार्टर में प्रणब मुखर्जी

नई दिल्ली 8 जून 2018 । पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रणब मुखर्जी गुरुवार को नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक (RSS) के कार्यक्रम में शामिल हुए. मुखर्जी ने आरएसएस पाठ्यक्रम के तृतीय शिक्षा वर्ग पास करने वाले कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. आरएसएस हेडक्वार्टर में पूर्व राष्ट्रपति ने करीब 30 मिनट तक भाषण दिया. प्रणब मुखर्जी का भाषण राष्ट्रवाद (Nationalism), धर्मनिरपेक्षवाद (Secularism), देशभक्ति (patriotism) और उदारवादी लोकतंत्र (Lebaral democracy) पर फोकस रहा. मुखर्जी ने कहा, “धर्म कभी भारत की पहचान नहीं हो सकता. संविधान में आस्था ही असली राष्ट्रवाद है.”

प्रणब मुखर्जी ने कहा, “मैं यहां पर राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति समझाने आया हूं.” पूर्व राष्ट्रपति ने अपने भाषण में तिलक, टैगोर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू समेत अन्य विद्वानों को कोट करते हुए राष्ट्रवाद और देश पर अपनी राय रखी. पढ़ें, प्रणब मुखर्जी के भाषण की 10 बड़ी बातें…

प्रणब मुखर्जी ने कहा, “राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचान है. देशभक्ति का मतलब देश की प्रगति में आस्था है.” उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद सार्वभौमिक दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम्, सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ से निकला है.

RSS के मंच से प्रणब मुखर्जी ने दिया संकेत- ‘अतिथि हूं, स्वयंसेवक नहीं’

उन्होंने कहा, “भारत की आत्मा सहिष्णुता में बसती है. इसमें अलग रंग, अलग भाषा, अलग पहचान है. हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई की वजह से यह देश बना है.”

प्रणब मुखर्जी ने कहा, “भेदभाव और नफरत से भारत की पहचान को खतरा है. नेहरू ने कहा था कि सबका साथ जरूरी है. नफरत से देश को सिर्फ नुकसान पहुंचा है.”

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, “विचारों में समानता के लिए संवाद बेहद जरूरी है. बातचीत से हर समस्या का समाधान मुमकिन है. शांति की ओर आगे बढ़ने से समृद्धि मिलेगी.”

उन्होंने कहा, “भारत दुनिया का पहला राज्य है और इसके संविधान में आस्था ही असली देशभक्ति है.” उन्होंने कहा कि विविधतता हमारी सबसे बड़ी ताकत है.

मुखर्जी ने कहा, “धर्म, मतभेद और असिहष्णुता से भारत को परिभाषित करने का हर प्रयास देश को कमजोर बनाएगा. असहिष्णुता भारतीय पहचान को कमजोर बनाएगी.”

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, “भारत की आत्मा बहुलवाद में निहित है. धर्मनिरपेक्षता और हमारी समग्र प्रकृति हमें भारत बनाती है. धर्मनिरपेक्षता मेरे लिए विश्वास का विषय है और हमारे लिए होना चाहिए. यह एक समग्र संस्कृति है जो हमारे देश को बनाती है.”

उन्होंने कहा, “भारत में राष्ट्रवाद की परिभाषा यूरोप से अलग है. भारत पूरे विश्व में सुख शान्ति चाहता है. प्रणब मुखर्जी ने कहा, भारत पूरे विश्व को परिवार मानता है.”

पंडित जवाहर लाल नेहरू की किताब ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ का जिक्र करते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा, “मुझे विश्वास है कि राष्ट्रवाद सिर्फ हिंदू, मुसलमानों, सिखों और भारत के अन्य समूहों के विचारधारात्मक एकता से बाहर आ सकता है.” उन्होंने कहा कि विजयी होने के बावजूद अशोक शांति का पुजारी था. 1800 साल तक भारत दुनिया के ज्ञान का केंद्र रहा है. भारत के द्वार सभी के लिए खुले हैं

जानें प्रणब के भाषण पर क्या रही राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं

देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय पहुंचे. यहां प्रणब मुखर्जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह को संबोधित किया. वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता और पूर्व राष्‍ट्रपति के संघ मुख्‍यालय में दिए भाषण को कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों एक-दूसरे के लिए नसीहत बता रही हैं.

प्रणब मुखर्जी ने मोदी सरकार को राजधर्म की याद दिलाई: रणदीप सुरजेवाला

रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘प्रणब मुखर्जी ने मोदी सरकार को राजधर्म की याद दिलाई. उन्‍होंने आरएसएस हेडक्‍वाटर में इस देश की खूबसूरती को बताया. प्रणब मुखर्जी ने पीएम मोदी को बताया कि राष्‍ट्रवाद क्‍या है. अरएसएस को सच्‍चाई का आईना दिखाने का ये प्रयास था.’ हेडगेवार को भारत मां का सपूत बताने पर सुरजेवाला ने कहा, ‘मेहमान के तौर पर प्रणब मुखर्जी ने जो बातें कहीं है उनपर चर्चा होनी चाहिए अनावश्यक औपचारिकताओं पर नहीं.’

आरएसएस-बीजेपी को प्रणब का भाषण समझने में अरसा लग जाएगा: पवन खेड़ा

पवन खेड़ा ने कहा, ‘आरएसएस और बीजेपी को समझने में अरसा लग जाएगा कि आज प्रणब मुखर्जी ने साहब ने उन्‍हें आईना दिखाया. उस आईने में उन्‍हें अपना विभत्‍स चेहरा दिखाई देगा. संघ के कोने में पश्चाताप होगा कि हमने प्रणब मुखर्जी को क्यों बुलाया. प्रणब ने मुगलों का नाम लिया, अशोक का नाम लिया.’

प्रणब मुखर्जी ने राजा को सबक भी दिया: केसी त्‍यागी

जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा, ‘प्रणब मुखर्जी पूरे राष्‍ट्र के हैं. प्रणब मुखर्जी ने संवाद की परंपरा का कायम रखा. उन्‍होंने राजा को सबक भी दिया.’

प्रणब जी ने हमारे विचार से भाषण की शुरुआत की: सुधांशु त्रिवेदी

भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘प्रणब जी ने अपने भाषण की शुरुआत ही भारत को पहला राष्‍ट्र बताते हुए की. यही तो हमारा विचार है.’

प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस की विचारधारा को रखा: राशिद अल्वी

राशिद अल्वी ने कहा, प्रणब मुखर्जी ने जो भाषण दिया वो कांग्रेस की विचारधारा को वहां रखा है. उन्‍होंने कहा कि देश में जो डर पैदा हो रहा है वो नहीं होना चाहिए. शायद इससे बड़ी बात आरएसएस के कार्यक्रम में नहीं कही जा सकती.

RSS की विचारधारा अलग: कांग्रेस

कांग्रेस ने ट्वीट किया, सभी भारतीयों के लिए यह जानना जरूरी है कि आरएसएस ने ऐतिहासिक रूप से क्या खड़ा किया. भारत के लोगों को कभी नहीं भूलना चाहिए किRSS की विचारधारा भारत के विचारधारा से उलट है.

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

31 जुलाई तक सभी बोर्ड मूल्यांकन नीति के आधार पर जारी करें परिणाम, सुप्रीम कोर्ट ने दिए आदेश

नई दिल्ली 24 जून 2021 । देश के सभी राज्य बोर्डों के लिए समान मूल्यांकन …