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उज्जैन के लग्जरी होटल शांति पैलेस को तोडऩे के आदेश

उज्जैन 19 जून 2019 । शहर के लग्जरी होटलों में शुमार शांति पैलेस होटल के खिलाफ हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। होटल बनाने के लिए हासिल की गई जमीन, बिल्डिंग परमिशन, डायरवर्शन और डेवलपमेंट परमिशन को गलत पाते हुए कोर्ट ने उसे तोडऩे के आदेश दिए हैं। ये आदेश उज्जैन संभागायुक्त, कलेक्टर और नगर निगम को दिए गए हैं कि करीब 80 हजार स्क्वेयर फीट पर बने इस होटल को तोड़ें और उसकी जानकारी हाई कोर्ट के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार को भेंजे। बता दें कि 2013 से विचाराधीन जनहित याचका पर हाई कोर्ट का यह बड़ा फैसला आया है। तीन गृह निर्माण संस्थाओं के करीब 50 प्लाट को मिलाकर यह होटल बनाया गया था। उज्जैन के सामाजिक कार्यकर्ता संजय गंगराड़े ने जनहित याचिका लगाई थी।

अनियमितताओं और गड़बड़ी की जांच
होटल निर्माण में बरती गई अनियमितताओं और गड़बड़ी की जांच की जिम्मेदारी कोर्ट ने आर्थिक अपराध अन्वेषण (ईओडबल्यू) ब्यूरो के डीजी को सौंपी है। जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस वीरेंद्र सिंह की युगल पीठ ने गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। सोमवार को याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जो मंगलवार को जारी किया गया है। उज्जैन के सामाजिक कार्यकर्ता संजय गंगराड़े ने 2013 में यह जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर यह फैसला सुनाया गया है।

तीन संस्थाओं की जमीन पर है होटल
एडवोकेट विजय आसुदानी ने बताया नानाखेड़ा क्षेत्र में जहां शांति पैलेस होटल बनी है, वह जमीन तीन गृह निर्माण संस्थाओं की है। नमन, अंजलि और आदर्श गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं के प्लाटों के नियम विरुद्ध आवंटन कर होटल के मालिक चंद्रशेखर श्रीवास और सीमा श्रीवास को जमीन दी गई थी। संस्था के सदस्यों को पहले प्लाट आवंटित किए गए और अगले ही दिन उनसे प्लाट श्रीवास दंपत्ति को बेच दिए गए, जो नियम विरुद्ध था। जमीन का बिना डायवर्शन किए 23 फरवरी 2013 को यहां पर होटल बनाने की परमिशन दे दी गई, जबकि डायरवर्शन 17 जून 2013 को हुआ। इस तरह डेवलपमेंट परमिशन में भी नियमों की अनदेखी की गई।

44 पेज का आदेश, आर्थिक गड़बड़ी की भी होगी जांच
आसुदानी ने कहा हाई कोर्ट ने इस पूरे मामले में जिम्मेदार अफसरों के भी जांच के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि होटल मालिक, सहकारी संस्था के जिम्मेदार सहित नगर निगम और जिला प्रशासन के अफसरों ने मिलीभगत कर होटल बनाने की अनुमति दी थी। आर्थिक अनियमितता के चलते कोर्ट ईओडब्ल्यू के डीजी को जांच के आदेश दिए हैं। होटल के लिए नियम विरुद्ध परमिशन देने वाले अफसरों पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। कोर्ट ने जनहित याचिका पर 44 पेज के आदेश दिए हैं।

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