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मीडिया घरानों की फंडिंग पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बोली ये बड़ी बात

नई दिल्ली 21 नवम्बर 2019 । केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को गुस्सा क्यों आता है? यदि आप इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो आपको ‘टाइम्स नाउ’ देखना होगा। दरअसल, वरिष्ठ पत्रकार और चैनल की मैनेजिंग एडिटर नविका कुमार ने हाल ही में रविशंकर प्रसाद का इंटरव्यू लिया था, जिसमें कई मौकों पर वह नाराज हो गए और आखिरकार नविका को खुद ही यह पूछना पड़ा कि रविशंकर प्रसाद को गुस्सा क्यों आता है? वैसे, मंत्री महोदय के गुस्से की वजह कुछ और नहीं, बल्कि तीखे सवाल थे। नविका ने उनसे मीडिया रेगुलेशन, दम तोड़ते टेलिकॉम सेक्टर से लेकर राम मंदिर जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सवाल पूछे। रविशंकर आमतौर पर शांत मंत्रियों में गिने जाते हैं, लेकिन नविका के सवालों की तपिश इतनी ज्यादा था कि ‘शांत’ रविशंकर भी क्रोधित हो उठे। इतने क्रोधित कि उन्होंने मीडिया घरानों की फंडिंग को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी दे डाली।

मीडिया को रेगुलेट करने को लेकर सरकार अक्सर सवालों में उलझती रहती है। ऐसे में जब कानून मंत्री से सवाल दागने का मौका मिला तो नविका कुमार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से जानना चाहा कि मीडिया पर उंगली उठानी वालीं सियासी पार्टियां अपने चंदे की जानकारी सावर्जनिक करने में कतराती क्यों हैं? इस विषय पर नविका और रविशंकर के बीच कुछ देर तक नोकझोंक भी हुई। नविका का सवाल प्रसाद को पसंद नहीं आया और उनके जवाब से नविका संतुष्ट नहीं हुईं। मंत्री महोदय ने तो एक तरह से मीडिया को ही आरटीआई के दायरे में लाने की चेतावनी दे डाली।

दरअसल, नविका ने पूछा, ‘आरटीआई का मुद्दा बेहद सीधा है, लोग यह जानना चाहते हैं कि सियासी पार्टियों को चंदा कहां से आता है और कौन देता है’? इस पर प्रसाद ने कहा, ‘जब आप चुनाव लड़ते हैं तो आपको अपने बारे में पूरी जानकारी देनी होती है।’ जायज है यह सवाल का जवाब नहीं था, लिहाजा नविका ने कहा, ‘मैं किसी व्यक्ति की नहीं पार्टी की बात कर रही हूं, मोटी बात तो यही है कि पैसा का मामला आप शेयर नहीं करना चाहते।’ इस पर रविशंकर का मिजाज एकदम बदल गया। उन्होंने बेहद शांत, लेकिन तीखे स्वभाव में जवाब देते हुए कहा, ‘मैं सहमति की बात कर रहा हूं। शायद ये भी समय आएगा कि बड़े मीडिया हाउस की फंडिंग कैसे होती है, इसे भी आरटीआई के दायरे में लाया जाए, आप भी पब्लिक अथॉरिटी हैं।’

गौरतलब है कि कुछ मीडिया संस्थान सरकार के रडार पर हैं, इनकी फंडिंग को लेकर पहले भी कई बार सवाल खड़े किये जा चुके हैं। लिहाजा, कानून मंत्री की इस अप्रत्यक्ष चेतावनी को संकेत के रूप में देखा जा सकता है कि सरकार आने वाले वक्त में मीडिया से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसले ले सकती है।

इस इंटरव्यू में वॉट्सऐप जासूसी कांड पर भी बात हुई। मामला उजागर होने के बाद संभवत: यह पहला मौका है, जब किसी ने सरकार से इस विषय पर सवाल जवाब किये हैं। हालांकि, ये अलग बात है कि इस विषय पर बात करना रविशंकर को पसंद नहीं आया। जैसे ही नविका ने अपना सवाल रखा, मंत्री महोदय उखड़ गए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि हमारी सरकार आजादी में विश्वास रखती है, इस तरह के सवाल न पूछे जाएं, यह सही नहीं है। नविका, प्रसाद के जवाबों में सवाल खोजकर पूछती रहीं और प्रसाद कुछ भी कहने से इनकार करते रहे और आखिरकार नविका को अपना सिर पकड़ते हुए कहना पड़ा, ‘रविशंकर प्रसाद को आखिर गुस्सा क्यों आता है’?

प्रसाद अयोध्या मसले पर भी नविका कुमार के सवालों से नाराज दिखे। नविका ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर मुस्लिम पक्ष की प्रतिक्रिया की बात करते हुए कहा, ‘उन्हें उस 67 एकड़ में ही पांच एकड़ चाहिए।’ जिसका जवाब था, ‘ऐसा है ये चर्चा सरकार से होगी, टाइम्स नाउ के चैनल पर नविका कुमार से नहीं होगी’। जब नविका ने मीडिया की जिम्मेदारी का जिक्र किया तो प्रसाद ने अपने शब्दों को कुछ नरम करते हुए अलग अंदाज में अपनी बात कही।

इसके अलावा, नविका कुमार ने एक ऐसा सवाल भी केंद्रीय मंत्री से पूछा, जिसका जवाब शायद सभी कांग्रेसी या कांग्रेस समर्थक सुनना चाहेंगे। उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी पर प्रहार करना भाजपा का सबसे अच्छा टाइम पास लगता है? हालांकि, ये सवाल भी रविशंकर प्रसाद को पसंद नहीं आया और उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। यह कहना गलत नहीं होगा कि पूरे इंटरव्यू के दौरान रविशंकर प्रसाद असहज दिखाई दिए। नविका कुमार के तीखे सवालों ने सहज होने नहीं दिया।

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