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मोदी की उपेक्षा झेल रहे वरुण गांधी लोकसभा चुनाव से पहले कर सकते हैं घर वापसी

नई दिल्ली 1 अगस्त 2018 । लोकसभा चुनाव अब बेहद करीब है। राजनीति इस बीच कई बड़े दिलचस्प मोड़ लेगी। कई बड़े नेता अपने दलों को झटका देंगे तो कुछ दूसरे दलों का रुख करेंगे। हम बात कर रहे हैं भाजपा सांसद वरुण गांधी की जो पिछले चार साल से मोदी की उपेक्षा झेल रहे हैं और अंदर ही अंदर बहुत नाराज हैं। कयास लग रहे हैं कि वरुण लोकसभा चुनाव से पहले घर वापसी कर सकते हैं।

सुल्तानपुर से सांसद हैं मेनका पुत्र वरुण
इंदिरा गांधी की छोटी बहू मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी की पहचान एख फायर ब्रांड नेता के तौर पर होती है। वो भाजपा के टिकट पर साल 2014 में सुल्तानपुर से चुनाव मैदान में उतरे थे और उन्होंने अपनी सीट भी निकालकर दे दी थी। हालांकि इसके बाद से ही वरुण गांधी भाजपा में साइड लाइन कर दिये गये हैं। वो पिछले चार साल से ही पीएम मोदी की उपेक्षा झेल रहे हैं।

प्रियंका गांधी दे चुकी हैं वरुण को निमंत्रण
वरुण गांधी के बारे में कयास है कि वो घर वापसी कर सकते हैं यानि गांधी परिवार की पार्टी कांग्रेस में जा सकते हैं। उनको प्रियंका भी बुला चुकी हैं। वैसे भी वरुण गांधी जानते हैं कि मोदी और शाह के भाजपा में रहते हुए उनको कोई बड़ा ओहदा नहीं मिलने वाला है जबकि कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनके भाई राहुल उनको कोई सम्मानजनक पद जरूर दे देंगे।

दोनों भाइयों ने कभी नहीं बोला है सीधा हमला
आपको बता दें कि वरुण गांधी ने घर वापसी के लिए हमेशा विकल्प रखा है। उन्होंने कभी भी अपनी रैली में राहुल गांधी के खिलाफ सीधा हमला नहीं किया है। सियासी मजबूरियों के चलते हल्के फुल्के बयान जरूर दिये हैं। वहीं राहुल गांधी ने भी कभी वरुण या अपनी चाची के खिलाफ हमला नहीं किया है। इस वजह से अगर वरुण का गुस्सा बढ़ा तो वो घर वापसी कर सकते हैं।

राजनाथ के दौर में ऊंचा था वरुण का कद
भाजपा में जब राजनाथ सिंह का दौर हुआ करता था और वो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। तब वरुण का कद ऊंचा हुआ करता था। वो भाजपा महासचिव के साथ ही असम और प. बंगाल के प्रभारी भी हुआ करते थे। लेकिन जैसे ही अमित शाह का दौर आया उनको सभी पदों से हटा लिया गया और तब से वो साइड लाइन हैं। वरुण सिर्फ सांसद ही बनकर रह गये हैं।

इस वजह से मोदी करते हैं वरुण की उपेक्षा
पीएम मोदी वरुण गांधी की उपेक्षा दो कारणों से करते हैं। पहला कारण है जब मोदी के पीएम प्रत्याशी घोषित होने के दौरान वरुण गांधी ने आडवाणी के पक्ष में बड़ी रैली आयोजित की थी। दूसरा कारण है मोदी और शाह के इलाहाबाद दौरे के दौरान पूरी रोड पर खुद को सीएम बनाने के पोस्टर लगवा दिये थे। इन वजहों ने मोदी को नाराज कर दिया था.

बैंक ऑफ बड़ौदा के चेयरमैन का बड़ा बयान- मोदी सरकार की नीतियों ने बर्बाद किए सरकारी बैंक

देश के तीसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा (बॉब) के चेयरमैन रवि वेंकटेशन ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। वेंकटेशन ने कहा है कि मोदी सरकार की कड़ी नीतियों की वजह से बैंकिंग सेक्टर खत्म होता जा रहा है। बॉब के चेयरमैन का कहना है कि सरकार की कड़ी नीतियों की वजह से सरकारी बैंकों के सामने नए निवेशकों को लुभाने और बुरे वित्तीय हालातों से निकलना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि इस समय सरकारी बैंकों को एकजुट होने की जरूरत है। यदि वे एेसा नहीं करते हैं तो बैंकिंग सेक्टर में प्राइवेट सेक्टर के बैंकों की हिस्सेदारी बढ़ जाएगी। वेंकटेशन का कहना है कि इस समय कमजोर बैंकों का विलय करने के बजाए खुद को मजबूत करने की आवश्यकता है। आपको बता दें कि रवि वेंकटेशन अगले महीने सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

बैंकिंग सेक्टर की जरूरतों के उलट हो रहा काम

अंग्रेजी वेबसाइट ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में वेंकटेशन ने कहा कि भारत को इस समय कम, बेहतर पूंजीकृत और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की आवश्यकता है लेकिन इसके उलट काम हो रहा है। वेंकटेशन का कहना है कि आज जानबूझकर बैंकों के निजीकरण पर जोर दिया जा रहा है। इसका कारण यह है कि आज सरकारी बैंक अपनी पूंजी और मार्केट शेयर गवां रहे हैं। बॉब चेयरमैन ने कहा कि बीते वित्त वर्ष में करीब 70 फीसदी जमा प्राइवेट बैंकों के पास हुआ है। उन्होंने अनुमान जताया कि 2020 तक खराब लोन बढ़कर 80 फीसदी तक पहुंच जाएगा। खराब लोन के बढ़ने से सरकारी बैंकों को पूंजी बढ़ाने और नए लोन देने में परेशानी होती है। वेंकटेशन ने कहा कि खराब बैलेंस शीट और 51 फीसदी शेयर सार्वजनिक क्षेत्र के लिए रखने के नियम से सरकारी बैंकों की नई पूंजी के लिए सरकार पर निर्भरता बढ़ रही हैं।

सरकारी बैंकों पर बढ़ रहा खराब लोन का बोझ

रवि वेंकटेशन ने कहा कि मोदी सरकार की बैंकिंग सेक्टर की कायापलट करने की योजना को पूरा करने असंभव है। इसका कारण यह कि देश के कुल खराब लोन में 90 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी बैंकों की है। देश के 21 सरकारी बैंकों में से 11 बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आपातकालीन कार्यक्रम के सुपरवीजन में काम कर रहे हैं। वेंकटेशन का कहना है कि भारत में काम कर रही मूडीज की स्थानीय इकाई इक्रा लिमिटेड भी 2020 तक कुल लोन बढ़ने की बात कह चुकी है। इक्रा का कहना है कि 2020 तक भारत का मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस की स्थानीय इकाई आईक्रा लिमिटेड का अनुमान है कि 31 मार्च, 2020 तक भारत के कुल ऋण 8 फीसदी से बढ़कर 9 .5 फीसदी हो जाएंगे। इसमें से 80 फीसदी निजी बैंकों में जाएंगे।

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