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वसुंधरा राजे के स्टॉक गिरे, शिवराज सिंह के बरकरार

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की लोकप्रियता तेजी से नीचे गिरी है. इंडिया टुडे न्यूज़ पॉलिटिकल स्टॉक एक्सचेंज (PSE) के पहले संस्करण के मुताबिक राजस्थान में करीब 50% प्रतिभागी वसुंधरा राजे सरकार के कामकाज से असंतुष्ट दिखे. PSE चुनाव विश्लेषण में नई पीढ़ी का अभिनव प्रयोग है. साथ ही ये देश की राजनीतिक नब्ज़ पर नज़र रखने वाला पहला साप्ताहिक कार्यक्रम है.

हालांकि PSE के निष्कर्षों से वसुंधरा राजे के मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में समकक्षों के लिए जरूर थोड़ी राहत है. मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ में रमन सिंह एक-एक और कार्यकाल के लिए लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं.

PSE के सभी संस्करणों में सीधे चुनावी रणक्षेत्र से लिए गए आंकड़े दिखाए जाएंगे. इन आंकड़ों को टेलीफोन इंटरव्यू के जरिए सबसे विश्वसनीय माने जानी वाली चुनाव सर्वेक्षण ‘एक्सिस माई इंडिया’ ने एकत्र किया.

राजस्थान

साल के आखिर में विधानसभा चुनाव वाले तीन राज्यों के लिए किए गए सर्वे के मुताबिक राजस्थान में 48% प्रतिभागियों ने राज्य में राजनीतिक नेतृत्व के बदलाव के पक्ष में वोट दिया. सिर्फ 32% प्रतिभागी ही मौजूदा वसुंधरा राजे सरकार के कामकाज को लेकर संतुष्ट दिखे.

इंडिया टुडे-एक्सिस-माई-इंडिया सर्वे राज्य के हर संसदीय क्षेत्र में लिए गए टेलीफोन इंटरव्यू पर आधारित है. राजस्थान के लिए सर्वे में कुल 9,850 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. सर्वे के मुताबिक करीब 15 फीसदी प्रतिभागियों ने वसुंधरा राजे सरकार के प्रदर्शन को “औसत” करार दिया.

सर्वे में कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत को 35 फीसदी प्रतिभागियों ने संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी पसंद माना. गहलोत की तुलना में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट काफी पीछे दिखे. उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर 11 फीसदी प्रतिभागियों ने ही अपना वोट दिया.

सर्वे में जब देश के अगले प्रधानमंत्री के लिए पसंद के बारे में पूछा गया तो राज्य से 57% प्रतिभागियों ने नरेंद्र मोदी के पक्ष में वोट दिया. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को 35% प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री के तौर पर अपनी पसंद बताया.

सर्वे में जब राजस्थान के अहम मुद्दों के बारे में पूछा गया तो सबसे बड़े मुद्दे के तौर पर ‘पानी की निकासी और साफ-सफाई’ का नाम लिया गया. इसके अलावा मतदाताओं के लिए चिंता के अन्य मुद्दे- किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, महंगाई और पेयजल हैं

2013 चुनाव में राजस्थान विधानसभा की कुल 200 सीटों में से बीजेपी ने 163 सीट जीती थीं. दूसरी ओर, कांग्रेस को सिर्फ 21 सीट पर ही कामयाबी मिल सकी थी.

मध्य प्रदेश

इंडिया टुडे-एक्सिस-माइ-इंडिया PSE रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान फिर एक बार राज्य की कमान संभालने के लिए लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं. चौहान को फिर से मुख्यमंत्री बनता देखने के लिए सर्वे में 46% प्रतिभागियों ने वोट दिया. वहीं कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को सर्वे में 32% प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी पसंद बताया.

लोकप्रियता की कसौटी पर कमलनाथ से ज्योतिरादित्य सिंधिया कहीं आगे दिखाई दिए. सर्वे में कमलनाथ को सिर्फ 8% प्रतिभागियों ने ही मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी पसंद बताया. सिंधिया घराने के वंशज की लोकप्रियता कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए परेशानी का सबब हो सकती है क्योंकि उन्होंने ही कमलनाथ को मध्यप्रदेश के चुनावी युद्ध में कांग्रेस की रणनीति की अगुआई करने के लिए चुना. हालांकि कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के लिए पार्टी की ओर से कोई चेहरा घोषित नहीं किया है. कमलनाथ को कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री के चेहरे की अंदरूनी दौड़ में सबसे आगे देखा जाता रहा है. PSE सर्वे के निष्कर्ष बताते हैं कि कमलनाथ के मुकाबले ज्योतिरादित्य सिंधिया की लोकप्रियता चार गुणा ज्यादा है.

अगर कामकाज के पैमाने पर देखा जाए तो सर्वे में राज्य की मौजूदा सरकार के प्रदर्शन से 41% प्रतिभागी संतुष्ट दिखाई दिए. लेकिन शिवराज सरकार के लिए फिक्र करने वाली बात ये है कि सर्वे में 40% लोगों ने राज्य में राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव के पक्ष में वोट दिया.

मध्य प्रदेश के लिए सर्वे में 12,035 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. 47 फीसदी प्रतिभागियों ने राज्य में बेरोजगारी को सबसे अहम मुद्दा बताया. इसके बाद प्रतिभागियों ने फिक्र के अन्य मुद्दों में किसानों की समस्याएं, पेयजल, साफ-सफाई और महंगाई को गिनाया.

जहां तक लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री के लिए पसंद का सवाल है तो सर्वे में मध्य प्रदेश में 56% प्रतिभागियों ने मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक और कार्यकाल देने के पक्ष में वोट दिया. सर्वे में राज्य के 36% प्रतिभागियों ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी पसंद बताया. 2013 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में राज्य की कुल 230 सीटों में से बीजेपी को 165 सीटों पर कामयाबी मिली थी. वहीं कांग्रेस के हिस्से में 58 सीट आई थीं.

छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ की PSE रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 41% प्रतिभागियों ने मौजूदा मुख्यमंत्री रमन सिंह को ही एक और कार्यकाल देने के पक्ष में वोट दिया. सर्वे में दूसरे नंबर पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल को 21% प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी पसंद बताया.

सर्वे में 39% प्रतिभागियों ने रमन सिंह सरकार के कामकाज पर संतोष जताया. वहीं 34% प्रतिभागियों ने राजनीतिक नेतृत्व के बदलाव के पक्ष में वोट दिया. सर्वे में राज्य के लोगों ने अहम मुद्दों में पानी की निकासी, साफ़-सफाई और बेरोजगारी को गिनाया. इसके अलावा किसानों की समस्याएं और महंगाई भी चिंता के अन्य मुद्दे हैं. छत्तीसगढ़ के लिए सर्वे में 4,598 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया.

सर्वे में छत्तीसगढ़ से 59% प्रतिभागियों ने लोकसभा चुनाव में अगले प्रधानमंत्री के लिए नरेंद्र मोदी को एक और कार्यकाल देने के पक्ष में वोट दिया. वहीं राज्य से 34% प्रतिभागियों ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के तौर पर अपनी पसंद बताया. 2013 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में राज्य की कुल 90 सीटों में से बीजेपी को 49 और कांग्रेस को 39 सीट पर जीत मिली थी.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का मोदी सरकार पर निशाना, बताया सभी मोर्चों पर फेल

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर सभी मोर्चों पर विफल रहने का आरोप लगाया और कहा कि अब देश में वैकल्पिक विमर्श पर गौर करने और अपनाने की जरूरत है। सिंह ने कहा कि इस सरकार में किसान और नौजवान परेशान हैं तो दलितों एवं अल्पसंख्यको में असुरक्षा का माहौल है। वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल की पुस्तक ‘शेड्स ऑफ ट्रुथ’ के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे। उन्होंने पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के साथ इस पुस्तक का विमोचन किया।

पूर्व पीएम ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा,‘’यह पुस्तक बहुत अच्छी तरह शोध करने के बाद लिखी गयी है। यह पुस्तक मोदी सरकार का समग्र विश्लेषण है। यह सरकार की नाकामियां बताती है। यह बताती है कि इस सरकार ने जो वादे किए, पूरे नहीं किये।‘‘ उन्होंने कहा,‘‘देश में कृषि संकट है। किसान परेशान हैं और आंदोलन कर रहे हैं। युवा दो करोड़ रुपये नौकरियों का इंतजार कर रहे हैं।‘‘ उन्होंने आरोप लगाया कि औद्योगिक उत्पादन और प्रगति थम गई है।

सिंह ने कहा,‘‘नोटबंदी और गलत ढंग से लागू की गई जीएसटी की वजह से कारोबार पर असर पड़ा। विदेशों में कथित तौर जमा धन को लाने के लिए कुछ नहीं किया गया। दलित और अल्पसंख्यक डरे हुए हैं।‘‘ उन्होंने सरकार पर विदेश नीति के मोर्चे पर विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि पड़ोसियों के साथ हमारे संबन्ध खराब हुए हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा,‘‘शैक्षणिक आजादी पर अंकुश लगाया जा रहा है। विश्वविद्यालयों के माहौल को खराब किया जा रहा है। ‘‘उन्होंने कहा कि देश को वैकल्पिक विमर्श पर गौर करने और अपनाने की जरूरत है।

भाजपा प्रदेश स्तरीय विस्तारित बैठक, यशोधरा सिंधिया हुईं नाराज, बैठक छोड़कर चली गई

 भोपाल में भाजपा प्रदेश स्तरीय विस्तारित बैठक में उस समय विवादोंं में घिर गई जब कैबिनेट मंत्री यशोधरा सिंधिया नाराज होकर बैठक छोड़कर चली गई। यशोधरा सिंधिया बैठक स्थल पर अपनी मां राजमाता सिंधिया का फोटो नहीं लगाए जाने से नाराज हुईं। खास बात ये रही कि पूरा विवाद पार्टी के बड़े और वरिष्ठ नेताओं के सामने हुआ। बैठक में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश प्रभारी सुहास भगत, प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह सहित अन्य नेता मौजूद थे।आपको बता दें कि भाजपा की ये बैठक संतनगर (बैरागढ़) के संत हिरदाराम ऑडिटोरियम में आयोजित की गई। लेकिन बैठक के लिए नेताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू ही हुआ था कि यहां विवाद की स्थिति बन गई। मंच पर पार्टी के नेताओं की तस्वीरों के बीच अपनी मां राजमाता सिंधिया की तस्वीर नहीं दिखने पर मंत्री यशोधरा सिंधिया भड़क गई। उनका कहना था कि राजमाता ने पार्टी को यहां तक पहुंचाने में काफी मेहनत की लेकिन पार्टी ने उन्हें भुला दिया। नाराज यशोधरा को संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने मनाने की काफी कोशिश की लेकिन यशोधरा नहीं मानी। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने तुरंत राजमाता की तस्वीर लगाई, हालांकि तब तक यशोधरा जा चुकी थीं।बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश अध्यक्ष, संगठन मंत्री, जनसम्पर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा सहित कई नेता पहुंचे। इधर यशोधरा प्रकरण को लेकर बड़े नेता बोलने से बचते रहे। प्रभात झा से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह पाएंगे। वहीं प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने भी इस मामले में चुप्पी साध ली।

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