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मतदाता नाराज हैं, बदलना चाहते हैं।

भोपाल 20 नवम्बर 2018 । ग्वालियर से भोपाल, उज्जैन, देवास, इंदौर, महू, बड़नगर, रतलाम, जावरा, सैलाना, मंदसौर होते हुए अब झाबुआ जिले में हूँ। एक हजार किलोमीटर और लगभग 100 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्र की चुनावी नब्ज का जायजा लिया। अगर एक वाक्य में कहूँ तो हालात दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार के पतन वाले हैं। शीला दीक्षित की तरह शिवराज सिंह ने काम तो बहुत किया है, लेकिन जैसे कॉमन वेल्थ घोटाला शीला जी के कामकाज पर पानी फेर गया था, मध्यप्रदेश में मोदी सरकार की नोटबन्दी, डीज़ल के भाव, रसोई गैस सिलेंडर के भाव, जीएसटी यह भाजपा विरोध के मुख्य कारण बन गए हैं। मतदाता नाराज हैं, बदलना चाहते हैं। एक सबसे अहम बात- नरेंद्र मोदी का जादू कलई की तरह उतर गया है।
वैसे भी पिछले विधानसभा चुनाव में मोदी के कारण नहीं बल्कि काँग्रेस के खिलाफ बने हुए माहौल और शिवराज- आर एस एस की मजबूत रणनीति से तीसरी बार सत्ता में आये थे। भोपाल, देवास, उज्जैन, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में भाजपा ने सौंदर्यीकरण से नम्बर बढ़ा लिए थे। अब इन क्षेत्रों में भाजपा के वोट बैंक- मध्यम वर्ग और व्यापारियों में महंगाई, नोटबन्दी और जीएसटी को लेकर गुस्सा है। बाजार में पैसा नहीं है। सारे धंधे मन्दे हैं। लोग मोदी के हाथों लुटा पिटा- ठगा महसूस कर रहे हैं। भोपाल के न्यू मार्केट, इंदौर के राजवाड़ा-सराफा में बात करो या रतलाम के चाँदनी चौक और मंदसौर के बड़े बाजार में, सब तरफ लोग खुलकर मोदी सरकार की आलोचना करते हैं। मजे की बात है कि शिवराज सिंह की व्यापम घोटाले या डंपर घोटाले की कोई चर्चा नहीं है। लोग कहते हैं- ” वो आदमी अच्छा है, पर उनकी सरकार गलत है। अधिकारी भ्रष्ट हैं, विधायकों, मंत्रियों का अहंकार चरम पर है। अब इनको घर बैठना चाहिए।”
रतलाम एक महत्वपूर्ण स्थान है। आर एस एस के मुखपत्र स्वदेश के 35 साल से पत्रकार और भाजपा के प्रवक्ता रहे शरद जोशी अगर यह कहें कि भाजपा की हार तय है, तो आप निश्चित मानिए कि भगवां परिवार के लिए 2019 भी मुश्किल होगा। वो कहते हैं-” राष्ट्रभक्ति या विचारधारा अपनी जगह है, पेट पालना अपनी जगह। हर वर्ग दुखी है। जब रोजी रोटी नहीं है तो राम का नाम कौन लेगा? भाजपा के नेताओं में अहँकार सर चढ़ कर बोल रहा है। टिकट इस बार बिके हैं। जनता की नजरों में साख गिरी है।”
मंदसौर में श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला अध्यक्ष प्रीतपाल राणा भी जोशी की तरह राजनीति से जुड़े हैं, लेकिन काँग्रेस के तीन बार पार्षद रहे हैं। वो भी आत्मविश्वास से कह रहे हैं कि प्रदेश में कांग्रेस की 125- 27 सीटें आ रही है। आम जनता से बात करो तो उनका दावा कुछ हद तक ठीक लगता है। रतलाम और मंदसौर के बीच दलौदा मंडी है जहां आसपास के60 गांव के किसान चना, दाल, लहसुन बेचने आते हैं। मैंने 15- 20 किसानों से बात की। सब नाराज हैं। शिवराज सिंह के खिलाफ नहीं बोलते हैं। पर कहते हैं कि भाजपा के जिलों के नेताओं ने प्रभावशाली बड़े किसानों और पटवारी के साथ मिलकर भावन्तर के करोड़ों डकार लिए। छोटा कृषक दम तोड़ रहा है। इन किसानों के साथ खड़े बड़े व्यापारी पुरुषोत्तम शिवानी कहते हैं- मुख्यमंत्री की नीयत तो अच्छी थी पर अधिकारी- स्थानीय नेता और बड़े किसान लूट गए। गरीब किसान ऑनलाइन रेजिस्ट्रेशन के झमेले से बचता है, इसका फायदा दलाल उठा गए।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की योजनाओं की तारीफ हो रही है क्योंकि उन्होंने सरकारी कोष को अपना समझ कर खूब खैरात लुटाई। काँग्रेस प्रवक्ता शोभा ओझा कहती है- प्रदेश पर 1,98,000 करोड़ का कर्ज है। यह कौन चुकाएगा? एक वरिष्ठ आई ए एस जो कि प्रदेश में बड़े पद पर हैं वो भी मानते हैं कि शिवराज सिंह ने सस्ती लोकप्रियता के लिए जनता के पसीने की गाढ़ी कमाई को योजनाओं के नाम पर लुटाया, और घर भर गया भाजपा के जिलों के प्रभावशाली नेताओं का। जनता को कुछ नहीं हासिल हुआ, इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में लोग काँग्रेस के पक्ष में हैं। काँग्रेस 2 लाख रुपये के कर्ज माफ करने की बात कर रही है, यह मास्टरस्ट्रोक साबित होगा।
भोपाल के कॉफी हाउस में भाजपा समर्थक चिंतक, पत्रकार कहते हैं गुजरात रिपीट होगा। यानी अभी काँग्रेस की जीत दिख रही है लेकिन अंत में पार्टी 90-95 पर अटक जाएगी। लेकिन वरिष्ठ पत्रकार एन डी शर्मा यह नहीं मानते । उनका कहना है कि गुजरात में शहरी सीटें ज्यादा है जिन्होंने आखिरी समय मोदी की साख दांव पर लगी है, यह देखकर भाजपा को जितवा दिया। मध्यप्रदेश में ग्रामीण सीटें ज्यादा है और मोदी से लोग नाराज हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि काँग्रेस बहुमत से जीत हासिल करे।
एक महत्वपूर्ण बात और। राजस्थान में कांग्रेस सत्ता में आ रही है यह बात वहां की मध्यप्रदेश से लगी लम्बी सीमा में चर्चा में है। मंदसौर से लगाकर राजगढ़ तक। इन क्षेत्रों में राजस्थान के माहौल का असर मध्यप्रदेश में भी पड़ रहा है। मालवा-निमाड़ की 66 सीटों पर पिछले चुनाव में भाजपा को 57 और कांग्रेस को केवल 9 सीट मिली थी। इस बार कांग्रेस 32 सीटों पर जीत सकती है। विंध्य प्रदेश और महाकौशल से भी खबरें भाजपा विरोधी मिल रही हैं। जनमानस सरकार विरोधी है। शरद जोशी कहते भी हैं- ” चुनाव भाजपा और कांग्रेस में नहीं बल्कि जनता और सरकार के बीच है इसलिए सरकार हार रही है।”

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