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वाघा बॉर्डर पहुंचे विंग कमांडर अभिनंदन

नई दिल्ली 2 मार्च 2019 । विंग कमांडर अभिनंदन वाघा बॉर्डर पहुंच गए हैं। दो दिन से वह पाकिस्तान के कब्जे में थे। दोपहर से हो रहा अभिनंदन का इंतजार आखिरकार समाप्त हुआ है। बता दें कि अभिनंदन के स्वागत में हजारों लोग भारत पाकिस्तान सीमा पर डटे हुए हैं। अभिनंदन को देखने भर के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। भीड़ को संभालने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं। वायुसेना के अधिकारी पहले ही यहां मौजूद हैं।

विंग कमांडर अभिनंदन अमृतसर पहुचेंगे। अभी मीडिया और अन्य को मिलने की मंजूरी नही है । शुक्रवार रात 9:24 पर भारत पहुचे अभिनंदन ।एयरफोर्स की गाड़ी से अमृतसर के लिए रवाना हुए अभिनंदन।

पहले मेडिकल चेकअप होगा विंग कमांडर अभिनंदन का। भारतीय वायुसेना ने खुशी जाहिर की अभिनंदन की भारत वापसी पर।

ट्वीट कर विंग कमांडर अभिनंदन को बधाई दी

“आपके साहस पर देश को गर्व है , वेलकम होम विंग कमांडर “- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

” अभिनंदन आपके शौर्य ने देश का मान बढ़ाया “- राहुल गांधी

“अभिनंदन के साहस पर देश को गर्व” – अमित शाह

“अभिनंदन का लौटना सुकून देने वाली बात ” – नितिन गडकरी

पाकिस्तान की कैद से लौटे अभिनन्दन दो महीने तक नहीं कर पाएंगे ये काम

पाकिस्तान की हिरासत से बाघा बार्डर के रास्ते भारत पहुंचे वायुसेना के मिग 21 के फाइटर पायलट अभिनन्दन वर्धमान अगले दो महीने तक लड़ाकू विमान नहीं उड़ा सकेंगे। इसके अलावा संवेदनशील फाइलों और जानकारियों से भी उनको दूर रखा जाएगा। इस अवधि में वायुसेना का इंटेलिजेंस और विजिलेंस विभाग उन पर कड़ी नजर रखेगा। इस परीक्षा में खरा उतरने के बाद ही अभिनन्दन वापस मिग 21 बाइसन की पायलट सीट पर बैठ पाएंगे।

भारत सहित पूरी दुनिया की सेनाओं में यह मानक फिक्स है कि जब भी उनका कोई सैनिक दुश्मन देश की कैद से छूट कर आता है तो उसकी पूरी मेडिकल जांच की जाती है। ये जांच सामान्य नहीं होती। स्वास्थ्य की रूटीन जांच करने के बाद वायुसेना अभिनन्दन को अपने उस केन्द्र में ले जाएगी जहां पर पूरे शरीर को स्कैन करने की मशीनें हैं।

इन मशीनों से अभिनन्दन के शरीर से पूरे कपड़े उतारकर यह जांच की जाएगी कि दुश्मन ने कहीं उनके शरीर में किसी तरह का कोई उपकरण तो फिट नहीं कर रखा है। यहां तक कि उनके शरीर के गुप्त अंगों के आसपास उगे बालो की भी सूक्ष्म जांच की जाएगी। फिर उनसे मशीनों के माध्यम से ही पूछताछ होगी। इसके बाद उन्हें घर भेज दिया जाएगा।

एक सप्ताह की छुट्टी के बाद अभिनन्दन ड्यूटी पर तो लौट आएंगे लेकिन उन्हें विमान उड़ाने का काम नहीं दिया जाएगा। उन्हें शुरूआत में सामान्य ड्यूटी पर रखा जाएगा और इस दौरान वायुसेना का इंटेलिजेंस और विजिलेंस विभाग उनकी हर गतिविधि पर कड़ाई से नजर रखेगा। दो माह तक लगातार नजर रखे जाने के बाद दोनों विभाग अपने अधिकारियों को पाजिटिव रिपोर्ट भेजेंगे, उसके बाद ही वे फिर से पायलट सीट पर बैठ पाएंगे। इसका अर्थ ये नहीं है कि उन पर वायुसेना को भरोसा नहीं रहा। वायुसेना हो अथवा सेना वह दुश्मन की कैद से लौटने वालों की इसी तरह जांच करती है क्योंकि कैद में रहने के दौरान यह आशंका बनी रहती है कि कहीं दुश्मन ने किसी तरह की धमकी, लालच अथवा अन्य किसी तरीके से उसे बरगला नहीं लिया हो।

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