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2019 के अंतिम ‘मन की बात’ में क्या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली 29 दिसंबर 2019 । धानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को आकाशवाणी पर मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देश को संबोधित किया। पीएम मोदी का यह कार्यक्रम ऑल इंडिया रेडियो, डीडी नेशनल, डीडी भारती और डीडी न्यूज पर भी प्रसारित किया गया। यह प्रधानमंत्री के इस रेडियो कार्यक्रम का 60वां और साल 2019 का आखिरी एपिसोड था। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री ने 3 अक्टूबर, 2014 को इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी।
पिछले 6 महीने में 17वीं लोकसभा के दोनों सदनों के सदस्य बहुत प्रॉडक्टिव रहे हैं। इसके लिए सभी सांसद बधाई के अधिकारी हैं। सांसदों ने 60 साल के सारे रेकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जनवरी मे अनेक त्योहार मनाए जाएंगे। ये त्योहार किसानों से जुड़े हैं और भारत की विविधता की याद दिलाते हैं। पोंगल के मौके पर संत तिरुवल्लुवर की जयंती मनाई जाती है। 2019 की यह आखिरी मन की बात है। 2020 में हम फिर मिलेंगे। नया उमंग, नया उत्साह। आइए चल पड़ें। बहुत कुछ करना है देश को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाना है: ‘मन की बात’ में पीएम मोदी

हमारे पास पुणे के निकट विशालकाय टेलिस्कोप है। लद्दाख में भी पावरफुल टेलिस्कोप है। 2015 में बेल्जियम के प्राइम मिनिस्टर और मैंने नैनीताल में टेलिस्कोप का उद्घाटन किया जो एशिया में सबसे बड़ा है। इसरो एक आदित्य नाम का सैटलाइट भी लॉन्च करने वाला है: ‘मन की बात’ में पीएम मोदी

भारत में खगोल विज्ञान का गौरवशाली इतिहास रहा है। आपको पता होगा कि भारत के अलग-अलग स्थानों में जंतर-मंतर हैं। इसका खगोल विज्ञान से गहरा संबंध है। महान वैज्ञानिक आर्यभट्ट के बारे में कौन नहीं जानता। उन्होंने दार्शनिक और गणितीय दोनों तरीकों से बहुत सारी जानकारी दी। भास्कर जैसे उनके शिष्यों ने इसे आगे बढ़ायाः ‘मन की बात’ में पीएम मोदी

युवा साथियों की तरह मैं भी सूर्य ग्रहण देखने के लिए उत्सुक था लेकिन अफसोस यह रहा कि दिल्ली के आसमान में बादल थे और वह आनंद नहीं ले पाया। हालांकि टीवी पर सुंदर तस्वीरें देखने को मिलीं। मुझे एक्सपर्ट से संवाद करने का मौका भी मिला। मुझे बताया गया कि चंद्रमा पृथ्वी से काफी दूर होता है और सूर्य को पूरी तरह से ढक नहीं पाता है इसलिए एक अंगूठी के आकार का दृश्य देखने को मिलता है: ‘मन की बात’ पीएम मोदी

हिमायत प्रोग्राम से लोगों की जिंदगी बदल रही है। ग्रामीण इलाके में यह लोगों को आत्मनिर्भर बना रहा है। जम्मू-कश्मीर में हिमायत कार्यक्रम लोगों को नौकरी दिलाने का काम कर रहा है। इसने जम्मू-कश्मीर के लोगों को आगे बढ़ाने का काम किया है: ‘मन की बात’ पीएम मोदी

क्या हम संकल्प ले सकते हैं कि कम से कम दो तीन साल हम स्थानी सामान खरीदने का आग्रह करें। 2022 तक यह काम करें। यह काम सरकारी नहीं होना चाहिए। इसके लिए युवा आगे आएं और लोगों को प्रेरित करें: ‘मन की बात’ पीएम मोदी

गांधी जी ने आत्मनिर्भर बनने के लिए यही रास्ता दिखाया था। जिस आजाद भारत में हम सांस ले रहे हैं, इसके लिए बहुत सारे लोगों ने बलिदान दिया है। हम आज आजाद जिंदगी जी रहे हैं। देश के लिए जीवन खपाने वाले अनगिनत लोगों ने बलिदान दिया और आजाद भारत के सपनों को लेकर जिएः ‘मन की बात’ पीएम मोदी

उत्तर प्रदेश में कुछ महिलाओं ने पूरे इलाके को प्रेरणा दी। उन्होंने साबित किया कि अगर एकजुटता के साथ काम किया जाये तो सबकी मदद हो सकती है। फूलपुर की महिलाओं ने मिलकर काम करने का संकल्प किया। वे चप्पलें बनाती हैं और लोग इन चप्पलों को बहुत पसंद कर रहे हैं। लोकल प्रॉडक्ट को हमें अपनी शान से जोड़ना चाहिए और साथी देशवासियों के लिए समृद्धि लाने की कोशिश करनी चाहिए: ‘मन की बात’ पीएम मोदी

मुझे विश्वास है कि भारत में ये दशक न सिर्फ युवाओं के विकास के लिए होगा बल्कि युवाओं के सामर्थ्य से देश का विकास करने वाला भी साबित होगा। भारत को आधुनिक बनाने में युवा पीढ़ी की बहुत बड़ी भूमिका होने वाली है: ‘मन की बात’ में पीएम मोदी

बिहार के पश्चिमी चंपारण कि एक कहानी बताए बिना मैं नहीं रह सकता हूं। यहां भैरवगंज हेल्थ सेंटर में लोग हेल्थ चेकअप कराने आए। यह कार्यक्रम सरकार का नहीं था बल्कि यह एक स्कूल के पुराने छात्रों द्वारा उठाया गया कदम था। इसका नाम संकल्प 85 था। 1985 बैच के विद्यार्थियों ने एल्युमनाई मीट रखी और कुछ करने का विचार कियाः मन की बात में पीएम मोदी

हम अलग-अलग जगह पढ़ते हैं लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद एल्युमिनाई मीट बड़ा रोचक कार्यक्रम होता है। कभी-कभी ऐसी मीटिंग आकर्षण का कारण बन जाती है। यह पुराने दोस्तों से मिलने के लिए तो होता ही है और अगर इसके साथ कोई संकल्प हो तो उसमें कई रंग भर जाते हैं: मन की बात में पीएम नरेंद्र मोदी

स्वामी विवेकानंद जी कहते थे कि युवावस्था की कीमत को नहीं आंका जा सकता है। ये जीवन का सबसे मूल्यवान कालखंड होता है। आपका जीवन इस पर निर्भर करता है कि आप अपनी युवावस्था का उपयोग किस प्रकार करते हैं। कन्याकुमारी विश्व के लिए तीर्थ क्षेत्र बना हुआ है। स्वामी जी के स्मारक ने हर आयु के लोगों को राष्ट्रभक्ति के लिए प्रेरित किया है: ‘मन की बात’ में पीएम मोदी

आपका जीवन इस पर निर्भर करता है कि आप अपनी युवावस्था का उपयोग किस प्रकार करते हैं: पीएम मोदी
स्वामी विवेकानंद का जिक्र कर पीएम मोदी ने कहा: स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि हमारा विश्वास युवा पीढ़ी में है। उन्होंने कहा, युवावस्था की कीमत को न तो आंका जा सकता है और न ही उसका वर्णन किया जा सकता है। यह सबसे मूल्यवान कालखंड हैः पीएम मोदी

हम सब अनुभव करते हैं कि यह पीढ़ी बहुत प्रतिभाशाली है। यह सोशल मीडिया का युग है। लोग सिस्टम को फॉलो भी करते हैं और अगर सिस्टम सही काम न करे तो बेचैन भी होते हैं और सवाल भी करते हैं। हमारे देश के युवाओं को अराजकता के प्रति नफरत है, वे भेदभाव को पसंद नहीं करतेः मन की बात में पीएम मोदी

2019 की विदाई के पल हमारे समाने हैं, अब हम न सिर्फ नए साल में प्रवेश करेंगे, बल्कि नए दशक में प्रवेश करेंगे। इसमें देश के विकास को गति देने में वे लोग सक्रिय भूमिका निभाएंगे, जिनका जन्म 21वीं सदी में हुआ है:

दिलचस्प होगी झारखंड विधानसभा, दिखेगी देवर-भाभी, ससुर-दामाद और समधी की जोड़ी

राजनीति में परिवारवाद एक-दूसरे पर निशाना साधने का सभी दलों के लिए पसंदीदा विषय रहा है, लेकिन कोई भी दल इस वाद से अछूता नहीं रहा है. झारखंड विधानसभा चुनाव में भी विधानसभा पहुंचे विधायकों में देवर-भाभी, ससुर-दामाद के साथ साथ आपस के समधी भी नए सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए हैं. इसके अलावा ऐसे विधायक भी चुन कर आए हैं, जिनपर अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है. इस चुनाव में कांग्रेस, आरजेडी और जेएमएम गठबंधन के नेता हेमंत सोरेन के नेतृत्व में नई सरकार रविवार को शपथ ले रही है.

हेमंत सोरेन दुमका और बरहेट से निर्वाचित हुए हैं. झारखंड आंदोलन के अगुआ, राज्य के बड़े राजनीतिक परिवार के मुखिया शिबू सोरेन की विरासत को संभाल रहे सोरेन परिवार की बहू और दुर्गा सोरेन की विधवा सीता सोरेन भी तीसरी बार संथाल परगना की जामा सीट से जेएमएम के टिकट पर विधायक बनी हैं. इस तरह से देवर-भाभी की जोड़ी विधानसभा में सत्तापक्ष में बैठेगी. 2014 और 2009 में भी यह जोड़ी विधानसभा की शोभा बढ़ा चुकी है.

सत्ता पक्ष और विपक्ष का संगम

इस विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष का संगम भी लोगों के लिए रोचक होगा. सत्ताधारी पार्टी के टुंडी से विधायक मथुरा महतो के सामने अपने दामाद मांडू से बीजेपी विधायक जयप्रकाश भाई पटेल होंगे. जयप्रकाश भाई पटेल के दिवंगत पिता टेकलाल महतो झामुमो के संस्थापक सदस्यों में से थे. दिवंगत टेकलाल महतो उसी सीट पर पांच बार विधायक रहे और वर्ष 2004 में गिरिडीह के सांसद बने. ससुर और दामाद की यह जोड़ी जेएमएम की पूर्व की सरकारों में मंत्री और साथ में विधायक भी रह चुकी है.जयप्रकाश भाई पटेल दो महीना पहले बीजेपी के हो गए थे.दिखेगी दो समधियों की जोड़ी

इस विधानसभा में दो समधियों की जोड़ी भी देखने को मिलेगी. एक तरफ हुसैनाबाद से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नवनिर्वाचित विधायक कमलेश कुमार सिंह होंगे तो दूसरी तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता औ बेरमो से चुने गए विधायक राजेंद्र प्रसाद सिंह होंगे. दोनों आपस में समधी हैं. एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष व विधायक कमलेश कुमार सिंह की पुत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह की बहू हैं. इससे पहले भी समधियों की यह जोड़ी झारखंड सरकार में मंत्री रह चुकी है.

नौजवान कंधों पर विरासत की जिम्मेदारी

इसके अलावा कई ऐसे विधायक चुनकर आए हैं, जिनके नौजवान कंधों पर परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी है. इस विधानसभा में सबसे कम उम्र की सदस्य बड़कागांव से कांग्रेस के टिकट पर चुनकर आईं अंबा प्रसाद पर पिता और पूर्व मंत्री रहे योगेंद्र साव और माता और पूर्व विधायक निर्मला देवी की विरासत को आगे बढ़ाने का चुनौतीपूर्ण दायित्व है. इस परिवार में अंबा तीसरी विधायक हैं, जो यूपीएससी की तैयारी बीच में छोड़कर राजनीति में आई हैं. पेशे से वकील अंबा प्रसाद झारखंड हाईकोर्ट में वकालत भी करती हैं.

इसी तरह जामताड़ा से कांग्रेस के टिकट पर दोबारा विधायक चुने गए डॉ. इरफान अंसारी पर अपने पिता फुरकान अंसारी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का दायित्व है. फुरकान अंसारी बिहार सरकार के मंत्री, विधायक, गोड्डा से सांसद रह चुके हैं. तमाड़ सीट से जेएमएम के टिकट पर दोबारा विधायक बने युवा तुर्क विकास सिंह मुंडा के शहीद पिता रमेश सिंह मुंडा झारखंड सरकार में कई बार मंत्री रहे हैं, जेडीयू के अध्यक्ष भी रहे हैं. विकास सिंह मुंडा पहले आजसू से विधायक थे. चुनाव से पहले वह झामुमो से जुड़ गए थे.

ईचागढ़ से जेएमएम की नवनिर्वाचित विधायक, झारखंड आंदोलन के अगुवा रहे निर्मल महतो के दिवंगत भाई व राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुधीर महतो की विधवा, सविता महतो के ऊपर भी परिवार की राजनीतिक विरासत को सहेजने की जिम्मेदारी होगी. संथाल के लिट्टीपाड़ा से जेएमएम के नवनिर्वाचित विधायक दिनेश विलियम मरांडी पर दिवंगत माता सुशीला हंसदा और पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक साइमन मरांडी के अधूरे सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी आ गई है.

देवरानी-जेठानी का चुनावी रण

बीजेपी के टिकट पर विधायक चुने गए भानु प्रताप शाही पूर्व में भी विधायक और मंत्री रह चुके हैं. भानु के पिता हेमेंद्र प्रताप देहाती भी मंत्री व विधायक रह चुके हैं. झरिया इस चुनाव में सबसे हॉट सीट रही, जहां देवरानी-जेठानी चुनावी रण में थीं. हालांकि, जीत देवरानी यानी नीरज सिंह की विधवा पूर्णिमा नीरज सिंह के हाथ आई है. कांग्रेस की विधायक बनी पूर्णिमा के ससुर सूर्यदेव सिंह और बच्चा सिंह तो विधायक और मंत्री रह ही चुके हैं. दूसरी तरफ पति की हत्या के आरोपी जेठ संजीव सिंह व सास कुंती सिंह भी झरिया सीट का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं.

पलामू के छतरपुर से बीजेपी विधायक चुनी गईं पुष्पा देवी पर अपने पति और पलामू के पूर्व सांसद और उसी विधानसभा क्षेत्र के विधायक रह चुके मनोज भुइयां की राजनीतिक विरासत को संभालने की जिम्मेदारी है. इन तमाम रिश्तों-नातों के बावजूद झारखंड की जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से विकास की आस लगाए बैठी है. अब देखना होगा कि कौन जोड़ी और कौन जनप्रतिनिधि आने वाले सालों में कितना हिट और जनता की उम्मीदों पर कितना फिट होता है.

धर्मेंद्र प्रधान बोले- जो भारत माता की जय बोलेंगे वही इस देश में रह पाएंगे

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) के विरोध केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि क्या इस देश को हम धर्मशाला बनाएंगे?

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ‘क्या भगत सिंह और नेता जी सुभाष चंद्र बोस का बलिदान बेकार जाएगा? क्या लोगों ने स्वतंत्रता के लिए इसलिए लड़ाई की ताकी आजादी के 70 साल बाद देश इस पर विचार करेगा कि नागरिकता गिनें या न गिनें? क्या इस देश को हम धर्मशाला बनाएंगे?’

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का विरोध कर रहे लोगों पर शनिवार को निशाना साधा. धर्मेंद्र प्रधान ने विरोध करने वालों से सवाल किया कि क्या वे देश को ‘‘धर्मशाला” बनाना चाहते हैं. उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक समारोह में कहा कि भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस जैसे लोगों ने देश की आजादी के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया. धर्मेंद्र प्रधान ने सवाल किया, ‘क्या अब हम हमारे देश को धर्मशाला बनाने जा रहे हैं, जहां कोई भी बिना रोक-टोक के घूम सके.’ बीजेपी नेता ने कहा, ‘इसलिए हमें यह चुनौती स्वीकार करनी होगी और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि केवल वे लोग ही यहां रह सकें जो ‘भारत माता की जय’ कहने के लिए तैयार हैं.’

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