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सपा-बसपा के गठबंधन से बाहर रखे जाने पर बोले राहुल- उन्होंने कांग्रेस को कम करके आंका

नई दिल्ली 14 जनवरी 2019 । उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच लोकसभा चुनाव 2019 के लिए हुए गठबंधन से कांग्रेस को बाहर रखे जाने को राहुल गांधी ने सियासी फैसला बताते हुए दावा किया उनकी पार्टी राज्य की सभी सीटों पर पूरी ऊर्जा के साथ चुनाव लड़ेगी. कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके साथ ही कहा कि सपा-बसपा ने कांग्रेस की ताकत को कम करके आंका है.

दुबई यात्रा पर गए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने NEWS18 इंडिया से बातचीत में यह बात कही. कांग्रेस अध्यक्ष से जब सवाल किया गया कि क्या अखिलेश यादव ने बसपा के साथ गठबंधन के ऐलान से पहले उनके बात की थी, तो उन्होंने कहा, ‘नहीं, उन्होंने न कांग्रेस पार्टी से, न मुझसे और न हीं हमारे लोगों से कोई बात की.’

राहुल गांधी ने इसके साथ ही कहा, ‘देखिए मैंने कहा है कि यह एक राजनीतिक फैसला है. उन्होंने अपना राजनीतिक फैसला लिया और हम उनका आदर करते हैं. मैं मायावती जी का आदर करता हूं, अखिलेश यादव का, मुलायम सिंह यादव जी का आदर करता हूं… लेकिन अब हमें अपना काम भी करना पड़ेगा, हमें उत्तर प्रदेश में पूरे दम से चुनाव लड़ना पड़ेगा.’

उत्तर प्रदेश को लेकर सियासी प्लान के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा, ‘हम पीछे हट के नहीं लड़ेंगे. कांग्रेस पार्टी पूरी ताकत के साथ पूरे दम-खम के साथ हर सीट पर चुनाव लड़ेगी. मेरी यह सोच है शायद गलत हो सकती है, लेकिन मेरी सोच है कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी को अंडरएस्टीमेट किया है. कांग्रेस पार्टी की जो ताकत है, उसको उन्होंने पहचाना नहीं है. अब देखते हैं क्या होता है.

बता दें कि सपा और बसपा ने यूपी की 38-38 सीटों पर लड़ने का ऐलान किया है. इसके अलावा दो सीटें अन्य सहयोगियों के लिए छोड़ी गई हैं. ये दल कौन से होंगे, इसका खुलासा नहीं किया गया है. वहीं गठबंधन की तरफ से कांग्रेस के लिए दो सीटें रायरबेली और अमेठी की छोड़ी गई हैं. मायावती ने इस दौरान साफ किया कि उनका कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं है, वह बस सीटें छोड़ रही हैं.

सपा और बसपा के बीच गठबंधन के औपचारिक ऐलान के बाद कांग्रेस ने राज्य की सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है. यूपी कांग्रेस के प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने रविवार को ऐलान किया कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा की सीधी लड़ाई है. हम यूपी की सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में राहुल गांधी की 10 से ज्यादा रैलियां होगीं, जिसमें किसान, युवा और महिलाओं का मुद्दा अहम होगा. वहीं, बताया जा रहा है कि राहुल की रैली यूपी में फरवरी के पहले हफ्ते से शुरू होगी, जिसका आगाज़ हापुड़ या लखनऊ से किये जाने की संभावना है.

जस्टिस सीकरी की नियुक्ति को राहुल ने राफेल से जोड़ा, विवाद के बाद SC जज ने ठुकराया सरकार का ऑफर

सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे सीनियर जज को रिटायरमेंट के बाद कॉमनवेल्थ ट्राइब्यूनल भेजे जाने के प्रस्ताव पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सवाल खड़े करते हुए राफेल डील से जोड़ा है। उन्होंने सीधे पीएम मोदी पर अटैक करते हुए कहा कि वह राफेल घोटाले को कवरअप करने का प्रयास कर रहे हैं। राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री डर के चलते भ्रष्ट हो गए हैं और संस्थाओं को बर्बाद कर रहे हैं। राहुल से पहले कांग्रेस के सीनियर लीडर अहमद पटेल ने भी इस मसले पर सरकार पर वार किया था। उन्होंने इस नियुक्ति पर कहा था कि सरकार को कई सवालों के जवाब देने की जरूरत है।

सीकरी के मनोनयन पर यह विवाद सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को पद से हटाए जाने के तीन दिन बाद रविवार को शुरू हुआ। तीन सदस्यीय पैनल ने सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को 2-1 से हटाने का फैसला लिया था। खड़गे इस फैसले के खिलाफ थे, लेकिन जस्टिस सीकरी और पीएम मोदी के वोट के चलते वर्मा को बहुमत से हटाने का फैसला हुआ।

इस बीच विवाद बढ़ता देख जस्टिस सीकरी ने केंद्र सरकार की ओर से कॉमनवेल्थ सेक्रटरिएट आर्बिट्रल ट्राइब्यूनल में भेजे जाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने पिछले महीने उन्हें ट्राइब्यूनल के लिए मनोनीत करने का फैसला लिया था। उस दौरान जस्टिस सीकरी ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई थी, लेकिन रविवार शाम को उन्होंने ऑफर को ठुकरा दिया।

जस्टिस सीकरी ने ठुकराया सरकार का यह ऑफर

इससे पहले रविवार को राहुल गांधी ने सीकरी के मनोनयन की एक मीडिया रिपोर्ट के साथ ट्वीट करते हुए लिखा, ‘न्याय के पैमाने से जब छेड़छाड़ की जाती है तो फिर अराजकता का राज आता है।’ राहुल ने इस मसले पर सीधे पीएम मोदी पर अटैक करते हुए कहा था कि वह राफेल घोटाले को कवरअप करने में जुटे हैं। वह डर के साये में हैं और इसी के चलते भ्रष्टाचार कर रहे हैं और संस्थाओं को बर्बाद करने में जुटे हैं।

जस्टिस सीकरी से ली गई थी मौखिक मंजूरी
इस बीच सरकारी सूत्रों ने बताया कि पिछले महीने सीकरी से कॉमनवेल्थ ट्राइब्यूनल में नियुक्ति को लेकर मौखिक मंजूरी ली गई थी और उसका सीबीआई विवाद से कोई लेनादेना नहीं है। बता दें कि हाल ही में पीएम मोदी, जस्टिस सीकरी और कांग्रेस लीडर मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व वाले तीन सदस्यीय पैनल ने सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को 2-1 से हटाने का फैसला लिया था। खड़गे इस फैसले के खिलाफ थे, लेकिन जस्टिस सीकरी और पीएम मोदी के वोट के चलते वर्मा को बहुमत से हटाने का फैसला हुआ।

कानून मंत्रालय को पत्र लिख वापस ली सहमति
सूत्रों ने बताया कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के बाद दूसरे सबसे सीनियर जज ने रविवार को कानून मंत्रालय को पत्र लिखकर अपनी सहमति वापस लेने की बात कही। हालांकि सूत्रों ने कहा कि जस्टिस सीकरी की नियुक्ति को आलोक वर्मा को पद से हटाए जाने के पैनल के फैसले से नहीं जोड़ा जा सकता। सीकरी को मनोनीत करने का फैसला दिसबंर के पहले सप्ताह में लिया गया था, जबकि चीफ जस्टिस ने सीबीआई चीफ की नियुक्ति वाले पैनल में उन्हें जनवरी में नामित किया था।

इस ट्राइब्यूनल के लिए किए गए थे मनोनीत
कॉमनवेल्थ सेक्रटरिएट आर्बिट्रल ट्राइब्यूनल का गठन कॉमनवेल्थ देशों के मेमोरैंडम का पालन सुनिश्चित करने के लिए किया गया था। इस मेमोरैंडम को 2005 में नए सिरे से तैयार किया गया था। इस ट्राइब्यूनल में सदस्यों का मनोनयन 5 साल के लिए किया जाता है और उनकी सदस्यता को एक बार ही रीन्यू किया जा सकता है। अध्यक्ष समेत ट्राइब्यूनल में 8 सदस्य होते हैं। 7 मार्च, 1954 को जन्मे एके सीकरी 12 अप्रैल, 2013 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे। इससे पहले वह पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं।

यूपी की सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस
उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के बीच गठबंधन के औपचारिक ऐलान के बाद यूपी कांग्रेस के प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने रविवार को ऐलान किया कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा की सीधी लड़ाई है. हम यूपी की सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. आजाद ने लखनऊ में आयोजित प्रेस कांफ्रेस में कहा, ‘हम कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में डटकर चुनाव लड़ेंगे और परिणाम से लोगों को चौंका देंगे.’

आजाद ने साथ ही कहा कि हमने शुरू से गठबंधन का स्वागत किया, जो भी दल बीजेपी को हराना चाहते हैं, हम उनका स्वागत करते हैं. इस महीने के अंत तक साफ तस्वीर साफ हो जाएगी.

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि बीजेपी की सरकार में किसानों, बेरोजगारों और महिलाओं के साथ नाइंसाफी और सबसे बड़े घोटाले हुए हैं. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी को हराएगी.

प्रदेश में सपा-बसपा के गठबंधन की प्रेसवार्ता से पहले राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि दोनों पार्टियों ने कांग्रेस से अलग गठबंधन की गांठ जोड़ ली है. शायद यही कारण है कि गठबंधन की घोषणा से एक दिन पहले गुलाम नबी आज़ाद ने यूपी कांग्रेस को शाम 5:30 बजे अर्जेंट मीटिंग का मैसेज दिया था, जिसके बाद दिल्ली में कांग्रेस के वॉर रूम में यूपी कांग्रेस की मैराथन बैठक हुई.

बैठक की अध्यक्षता गुलाम नबी आज़ाद कर रहे थे, जिसमें उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजबब्बर, प्रमोद तिवारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह मौजूद थे. बैठक में लिए गए फैसले पर गौर करें तो यूपी में अब पार्टी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर दांव लगा रही है. पूरे प्रदेश में राहुल गांधी की 10 से ज्यादा रैलियां होगीं, जिसमें किसान, युवा और महिलाओं का मुद्दा अहम होगा. वहीं, बताया जा रहा है कि राहुल की रैली यूपी में फरवरी के पहले हफ्ते से शुरू होगी, जिसका आगाज़ हापुड़ या लखनऊ से किये जाने की संभावना है.

कहा जा रहा है कि बैठक में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव नतीजों का जिक्र किया गया. पार्टी का मानना है कि लोकसभा चुनाव की अधिसूचना आने से पहले राहुल गांधी फरवरी महीने में रैलियां करके पार्टी के पक्ष में माहौल बना सकते हैं, ताकि चुनाव आने तक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ता पार्टी के लिए मजबूती से काम करें.

बता दें कि सपा और बसपा ने यूपी की 38-38 सीटों पर लड़ने का ऐलान किया है. इसके अलावा दो सीटें अन्य सहयोगियों के लिए छोड़ी गई हैं. ये दल कौन से होंगे, इसका खुलासा नहीं किया गया है. वहीं गठबंधन की तरफ से कांग्रेस के लिए दो सीटें रायरबेली और अमेठी की छोड़ी गई हैं. मायावती ने इस दौरान साफ किया कि उनका कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं है, वह बस सीटें छोड़ रही हैं.

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