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चुनाव से ठीक पहले कहाँ गायब हो गईं 19 लाख ईवीएम मशीने ?

नई दिल्ली 3 दिसंबर 2018 । बीते 4 सालो से EVM का मुद्दा हर चुनाव के पहले एक अहम् मुद्दा बन जाता हैं. साथ ही देश में इसको लेकर काफी चर्चा होती रहती हैं. याद दिला दे कि यूपी विधानसभा चुनाव के समय से यह मुद्दा उभर कर लोगो के सामने आया. इसके बाद से विपक्ष लगातार इसपर सवाल उठाते रही हैं. इतना ही नहीं मायावती ने बीजेपी पर इवीएम् के साथ छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया था.एक रिपोर्ट के माध्यम से EVM की खरीदारी में बड़ी धांधली उजागर हुई है. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि EVM प्रदान करने वाली दो कंपनियों और भारत कि चुनाव आयोग के आंकड़ों में बड़ी अंतर सामने आ रही हैं. इस बात से साफ़ हैं कि चुनाव आयोग भी किसी न किसी पार्टी के इशारो पर काम करती हैं. वहीँ RTI से मिली मिली जानकारी के अनुसार EVM निर्माता कंपनी और चुनाव आयोग में लगभग 19 लाख मशीनो का अंतर है विपक्ष लगातार चुनाव आयोग से मांग कर रही हैं कि देश में अब बैलेट पेपर से चुनाव हो. हालंकि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता हैं कि EVM एक अम्चिने हैं जो इंसान द्वारा बनाया गया हैं. इसलिए इसके साथ कुछ भी किया जा सकता है. यानि कि इसके साथ छेड़छाड़ किया जा सकता हैं. वहीँ दूसरी तरफ ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जिसमे इवीएम के साथ छेड़छाड़ किया जा चूका हैं. सवाल यह उठ रहा हैं कि आखिकार ये 19 लाख EVM मशीन गए तो कहा गए? इससे साफ़ हैं कि EVM के खरीद में बड़ा घोटाला हुआ हैं. बता दे कि चुनाव आयोग दो ही कंपनी से EVM को खरीदती हैं. ECIL हैदराबाद और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) बेंगलुरु से ईवीएम मंगवाती हैं. वहीँ RTI से जो खुलासा हुआ हैं उससे साफ़ हैं कि आने वाले लोकसभा चुनाव में कोई बहुत बड़ी  साजिश रची जा रही है

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