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रिकॉर्ड वोटिंग से किसे मिलेगा लाभ बीजेपी या कांग्रेस?

नई दिल्ली 29 नवम्बर 2018 । मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के लिए करीब 74.6 प्रतिशत मतदान हुआ। एमपी विधानसभा चुनाव के इतिहास में यह अब तक का रिकॉर्ड वोटर टर्नआउट है। सैफोलॉजिस्‍ट अब इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि ज्‍यादा मतदान से किसे फायदा होगा, कांग्रेस या बीजेपी? वैसे मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत के पुराने ट्रेंड को देखें तो एक अलग तस्‍वीर उभरकर सामने आती है। मध्‍य प्रदेश में बीजेपी 2003 के बाद से लगातार सत्‍ता में है। जब से बीजेपी पावर में आई है, तब से हर विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ा है। यह भी संयोग है कि जब-जब मतदाता प्रतिशत बढ़ा है, तब-तब बीजेपी के हाथ में सत्‍ता आई है। मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में वोट प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन देखने वाली बात होगी, इसमें महिलाओं का मतदान प्रतिशत कितना बढ़ा है।

जब-जब बढ़ा मतदान प्रतिशत तब-तब बीजेपी आई सत्‍ता में
मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत और नतीजों का ट्रेंड कुछ इस प्रकार है: 2003 में एमपी चुनाव में करीब 67.3 प्रतिशत मतदान हुआ और बीजेपी सत्‍ता में आई। गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले मतलब 1998 के एमपी विधानसभा चुनाव में 60.5 प्रतिशत ही मतदान हुआ था। मतलब बीजेपी के सत्‍ता आने पर करीब 7 प्रतिशत वोटर टर्नआउट बढ़ा। इसके बाद 2008 के विधानसभा चुनाव में करीब 69.6 प्रतिशत मतदान हुआ। पिछले यानी 2003 विधानसभा चुनाव की तुलना में 2008 में भी मतदान का प्रतिशत बढ़ा और परिणाम शिवराज सिंह चौहान की सत्‍ता में वापसी हुई। मध्‍य प्रदेश 2013 विधानसभा में भी मतदान प्रतिशत बढ़ा और मामा लगातार तीसरी बार सीएम बने।

महिलाओं का वोट प्रतिशत बढ़ा तो सीधे तौर पर मामा को मिलेगा लाभ
2003 में बीजेपी जीती जरूर थी, लेकिन शिवराज सिंह चौहान सीएम पद के लिए पहली पसंद नहीं थे। उमा भारती और बाबूलाल गौर के बाद सीएम बनने का मौका शिवराज सिंह चौहान को मिला। सीएम के तौर पर हैट्रिक बना चुके शिवराज सिंह चौहान ने 2018 चुनाव में एक और खास हैट्रिक बनाई है। ये खास हैट्रिक है- मतदान प्रतिशत में लगातार बढ़ोतरी से जुड़ी। दरअसल, बीजेपी ने 2003 का चुनाव शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्‍व में नहीं था। इसके बाद के दोनों चुनावों में वोटर टर्नआउट बढ़ा शिवराज सत्‍ता में आए। 2018 लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिश तो काफी बढ़ गया है, लेकिन इसमें गौर करने वाली बात यह होगी महिलाओं का वोट प्रतिशत किता बढ़ा है। अगर महिलाओं को वोट प्रतिशत अधिक बढ़ा तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है। इसके पीछे दो कारण हैं- पहला बीजेपी ने महिलाओं के लिए अलग घोषणा पत्र जारी किया और दूसरी अहम बात यह है कि महिलाओं के बीच मामा शिवराज सिंह चौहान बेहद लोकप्रिय हैं। एमपी में महिलाओं का मतदान प्रतिशत काफी कम रहा है, लेकिन अगर इस बार ये आंकड़ा बदला तो बीजेपी चौथी बार सत्‍ता में वापसी की उम्‍मीद कर सकती है।

महज 4 प्रतिशत वोट तय कर देगा शिवराज की किस्‍मत
मतदान प्रतिशत को लेकर हर राज्‍य, हर चुनाव का ट्रेंड अलग-अलग रहा है। मसलन लोकसभा चुनावों की बात करें तो 1977 के आम चुनाव में मतदान प्रतिशत 5 प्रतिशत बढ़ा और जनता पार्टी ने कांग्रेस को हरा दिया। इसी प्रकार से 1980 के चुनाव में मतदान प्रतिशत चार प्रतिशत गिरा और कांग्रेस की सत्‍ता में वापसी हो गई। ये नतीजे उसी थ्‍योरी के हिसाब से हैं, जिनमें माना जाता है कि ज्‍यादा मतदान सत्‍ताधारी के लिए नुकसानदायक होता है, लेकिन मध्‍य प्रदेश विधानसभा के नतीजे अलग ट्रेंड की ओर इशारा करते हैं। कुछ डेटा एनालिसिस का यह भी अनुमान है कि मध्‍य प्रदेश में इस बार चार प्रतिशत वोट बीजेपी की हार और कांग्रेस की जीत का फैसला कर देगा। इस अनुमान में कुल मतदान करीब 72 प्रतिशत मानकर अंदाजा लगाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 15 लाख वोटर बीजेपी की हार और जीततय करेंगे। अब मतदान का 74 प्रतिशत के पार जाना इशारा करता है कि बीजेपी को लाभ हो सकता है। हालांकि, ज्‍यादा मतदान एंटी इन्‍कमबैंसी का मतलब सत्‍ता विरोधी लहर का भी परिचायक होता है। देखना होता है कि शिवराज सिंह चौहान की किस्‍मत कौन से ट्रेंड की ओर जाती है।

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