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बेल्जियम में इतने लोग क्यों मर रहे हैं?

नई दिल्ली 5 मई 2020 । कोरोना वायरस संक्रमण से मौत की दर के लिहाज से बेल्जियम दुनिया का सबसे ज़्यादा प्रभावित देश है. इस बात की ओर दुनिया का ध्यान दिलाया है अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने. हाल ही में वे एक ग्राफ़ की ओर इशारा करते नज़र आए जिसमें बेल्जियम शीर्ष पर दिखाई दे रहा है जबकि अमरीका सातवें स्थान पर है. यह ग्राफिक्स आबादी और कोरोना संक्रमण से होने वाली मौतों के अनुपात पर आधारित था.

ट्रंप यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि अमरीका कोरोना वायरस संक्रमण का सामना कहीं ज्यादा प्रभावी रूप में कर रहा है. बेल्जियम की आबादी 1.15 करोड़ है. यानी बेल्जियम में प्रति एक लाख लोग में 66 लोगों की मौत हो रही है. अमरीका की आबादी करीब 33 करोड़ है. जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के आंकड़ों अमरीका में प्रति एक लाख लोगों में 19 लोगों की मौत हो रही है.

लेकिन बेल्जिमय सरकार के प्रवक्ता और वायरोलाजिस्ट प्रोफेसर स्टीवन वैन गुचेट के मुताबिक यह तुलना दोषपूर्ण और यह सही इस्तेमाल नहीं है. उन्होंने कहा, “दरअसल सार्वजनिक स्वास्थ्य विज्ञान और राजनीतिक प्रेरणा के बीच का अंतर है. आप यह बताना चाहते हैं कि आप कितना अच्छा कर रहे हैं, लेकिन यह गलत है. हमलोग कहीं बेहतर ढंग से सटीकता के साथ चीजों को रिपोर्ट कर रहे हैं.”

कोरोना वायरस महिलाओं और पुरुषों में भेद क्यों करता है

कोविड-19 की महामारी ने ब्रिटेन के शाही घराने से लेकर भारत में ठेले पर सब्ज़ी बेचने वाले तक को अपना शिकार बनाया है. जिस पर भी इसका दांव चला उसी को लपेटे में ले लिया. लोग कहते हैं कि कोरोना वायरस किसी की जाति, धर्म या लिंग देखकर थोड़ी वार करता है. लेकिन, अब तक के आंकड़े इस दावे को ग़लत ठहरा रहे हैं. नया कोरोना वायरस अपना शिकार बनाने में भेदभाव कर रहा है. कोविड-19 की महामारी मर्दों और औरतों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डाल रही है. इस वायरस का पुरुषों और महिलाओं की सेहत ही नहीं, बल्कि माली हालत पर भी अलग अलग असर दिख रहा है.

कोविड-19 की मृत्यु दर देखकर ही अंदाज़ा हो जाएगा कि ये वायरस लिंग भेद कर रहा है. मिसाल के लिए अमेरिका में कोविड-19 से मरने वाली महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या दो गुना है. इसी तरह पूरे पश्चिमी यूरोप में कोविड-19 से मरने वाले 69 फ़ीसद सिर्फ़ पुरुष हैं. चीन या कोरोना का प्रकोप झेलने वाले अन्य किसी देश में भी यही स्थिति है.

कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या का ब्यौरा रखने वाली रिसर्चरों की टीम इसकी वजह तलाशने में जुटे ही. हालांकि अभी तक कोई सटीक कारण सामने नहीं आ सका है.

ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर फ़िलिप गोल्डर कहते हैं कि महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता पुरुषों की तुलना में बेहतर होती है. किसी भी वायरस को सक्रिय होने के लिए खासतौर से कोरोना वायरस के लिए जिस प्रोटीन की आवश्यकता होती है वो ‘एक्स क्रोमोसोम’ में होता है. महिलाओं में ‘एक्स क्रोमोसोम’ दो होते हैं, जबकि पुरुषों में एक होता है. इसीलिए महिलाओं में किसी भी वायरस का प्रकोप झेलने की क्षमता ज़्यादा होती है.

वायरस के पुरुषों को ज़्यादा शिकार बनाने की एक वजह, ज़िंदगी जीने का सलीक़ा हो सकती है. मतलब ये कि जो लोग गुटखा, तम्बाकू या सिगरेट का सेवन करते हैं उनमें किसी भी बीमारी के पनपने की संभावना ज़्यादा होती है. सिगरेट पीने वालों के लिए तो किसी भी तरह के संक्रमण का शिकार होना बहुत ही आसान है. महिलाओं की तुलना में पुरुष सिगरेट ज़्यादा पीते हैं. चीन में 50 फ़ीसद मर्द सिगरेट पीते हैं. जबकि ऐसा करने वाली महिलाएं केवल पांच प्रतिशत हैं. फ़िलहाल महामारी के दौर में इस दावे के पक्ष में कोई सबूत नहीं है. लिहाज़ा इस दावे पर अभी मुहर नहीं लगाई जा सकती.

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