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आखिर क्यों मोदी को हराने के पीछे पड़ गए देश के सभी नेता

नई दिल्ली 1 अप्रैल  2019 । 23 मई, 2019 को यह सुनिश्चित हो जाएगा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रहेंगे या नहीं, परंतु आश्चर्य में डालने वाली बात यह है कि यदि मोदी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे, तो उनका स्थान लेगा कौन ? क्योंकि एक तरफ तो मोदी के रूप में चेहरा है, परंतु दूसरी तरफ चेहरों की भरमार है। इससे भी बड़ा आश्चर्य यह है कि सबके सब मिल कर मोदी को हराना तो चाहते हैं, लेकिन चुनाव लड़ने का किसी में साहस नहीं है। कदाचित इसीलिए मोदी ने यह दावा भी कर दिया, ‘इस बार मेरे सामने कोई नहीं, 2024 में देखा जाएगा। एनडीए को 300+ सीटें मिलेंगी।’

लोकसभा चुनाव 2014 में मोदी की आंधी ने सभी राजनीतिक दलों को धूल चटा दी थी और भारत की सबसे पुरानी और सबसे लम्बे काल तक देश पर शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी ऐतिहासिक गिरावट के साथ 44 सीटों पर सिमट गई थी। नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने। कुछ महीनों तक तो कांग्रेस सहित सभी मोदी विरोधी दलों को कुछ सूझ ही नहीं रहा था कि मोदी की काट के रूप में क्या करें ?

मोदी के प्रधानमंत्री और अमित शाह के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद तो राज्यों में भी विरोधियों का सफाया होता चला गया और एक के बाद एक राज्य में भाजपा की सरकारें बनती गईं। भाजपा की इस सफलता से विपक्ष पूरी तरह असमंजस में था। कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभाल रहीं सोनिया गांधी को भी कुछ सूझ नहीं रहा था, तो उपाध्यक्ष के रूप में विफलताओं की लंबी श्रृंखला के धनी राहुल गांधी अपनी राजनीतिक अपरिपक्वता से नई-नई विफलताओं को अपने राजनीतिक कैरियर में जोड़ते जा रहे थे।

मोदी सरकार के शासन के कुछ महीने बीतने के बाद कांग्रेस को कुछ सूझा और उसने भूमि अधिग्रहण बिल के विरोध के साथ मोदी के खिलाफ पहला मोर्चा खोला। इसके साथ ही सोनिया ने मोदी विरोधी राजनीतिक दलों की लामबंदी शुरू की। इसी बीच कांग्रेस ने मोदी के अच्छे कार्यों की सरेआम अवहेलना करते हुए कमियों को खंगालना शुरू किया और किसानों, बेरोजगारी, नोटबंदी, जीएसटी और अंत में राफेल डील में कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार की घेराबंदी शुरू की। गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 से ऐन पहले राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। अध्यक्ष के रूप में राहुल को यद्यपि पहले ही चुनाव में गुजरात में कांग्रेस की हार के रूप में भेंट मिली, लेकिन राहुल ने गुजरात में कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार और उसके बाद कर्नाटक में हार के बावजूद भाजपा को सत्ता से दूर रखने में मिली सफलता से उत्साहित होकर सोनिया की तर्ज पर ही मोदी विरोधी राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को साधना शुरू किया। राहुल को हालाँकि किसान और बेरोजगारी के मुद्दे पर सफलता भी मिली और राजस्थान, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में भाजपा को सत्ताच्युत कर कांग्रेस की सरकार बनवाई।

तीन राज्यों में मिली सफलता से उत्साहित राहुल ने अब मोदी विरोधियों की एकजुटता के अभियान को और तेज कर दिया, परंतु जब मैदान में उतर कर लड़ने की बारी आई, तो 1 मोदी के विरुद्ध एकजुट हुए अनेक मोदी विरोधी नेताओं में से 1 ने भी चुनाव मैदान में उतर कर मोदी का सामना करने का साहस नहीं दिखाया।

आइए अब आपको बताते हैं मोदी के विरुद्ध, उन्हें सत्ता से हटाने के लिए मोर्चा खोलने वाले दिग्गज नेताओं के नाम। इनमें सबसे ऊपर है पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्ष ममता बैनर्जी। बैनर्जी ने सौगंध खाई है कि वे दिल्ली की गद्दी से मोदी को हटा कर ही दम लेंगी, लेकिन लोकसभा चुनाव नहीं लड़ रहीं। अब नाम आता है बहुजन समाज पार्टी (BSP) की नेता मायावती और समाजवादी पार्टी (SP) के नेता अखिलेश यादव का। इन दोनों ने भी उत्तर प्रदेश में भाजपा और मोदी को हराने के लिए 25 साल पुरानी दुश्मनी भुला कर गठबंधन कर लिया, परंतु एक तरफ प्रधानमंत्री पद की दावेदार मायावती घोषणा कर चुकी हैं कि वे लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी, तो दूसरी तरफ एक छोटी-सी विधानसभा सीट जीतने वाले अखिलेश के पास 7-7 विधानसभा सीटों वाली किसी लोकसभा सीट को जीतने का विश्वास ही नहीं है। वे भी चुनाव नहीं लड़ रहे।

मोदी विरोधी टोली में सबसे बड़ा नाम है प्रियंका गांधी वाड्रा का। कांग्रेस और राहुल गांधी ने चुनाव से ठीक पहले प्रियंका की राजनीति में एंट्री कराई और उत्तर प्रदेश में भाजपा व मोदी के बढ़ते कदमों को रोकने की दिशा में मास्टरस्ट्रोक चला। पहले तो यह कयास लगाए गए कि प्रियंका आई हैं, तो चुनाव भी लड़ेंगी। अरे कुछ लोगों ने यहाँ तक कह डाला कि प्रियंका वाराणसी में सीधे मोदी से टक्कर लेंगी, परंतु बाद में हवा निकल गई कांग्रेस की। प्रियंका राजनीति में तो आ गईं, लेकिन चुनाव नहीं लड़ रहीं।

मोदी विरोधियों की टोली में महाराष्ट्र तक सीमित राजनीति के दिग्गज नेता महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया शरद पवार का नाम भी है, परंतु न राज ठाकरे चुनाव लड़ रहे हैं और न ही पवार। पवार वही नेता हैं, जिन्होंने सोनिया के विदेशी मूल को मुद्दा बना कर एनसीपी बनाई थी, लेकिन महाराष्ट्र में वे उसी कांग्रेस के साथ वर्षों से चुनावी गठबंधन करके भाजपा-शिवसेना को चुनौती दे रहे हैं, परंतु सफलता आज तक नहीं मिल पाई।

मोदी विरोधी टोली में एक और महत्वपूर्ण नाम है अरविंद केजरीवाल का। आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल मोदी को हर छोटी-बड़ी बात पर गाली देने बाज़ नहीं आते। मोदी को सत्ता से हटाने के लिए कांग्रेस के खिलाफ चुनाव जीतने के बावजूद दिल्ली और हरियाणा में कांग्रेस से गठबंधन की सरेआम भीख मांग रहे हैं, लेकिन कांग्रेस उन्हें भाव ही नहीं दे रही। अब शायद आपको यह जान कर आश्चर्य नहीं होगा कि केजरीवाल भी चुनाव नहीं लड़ रहे, क्योंकि जब प्रियंका से लेकर अखिलेश तक सारे पानी में बैठे हुए हैं, तो केजरीवाल भला क्या हिम्मत जुटा पाते।

कांग्रेस कल जारी करेगी मेनिफेस्टो, कर सकती है कई बड़े ऐलान

लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की मुहिम रफ्तार पकड़ती जा रही है. कांग्रेस इसे और धार देने जा रही है. कांग्रेस मंगलवार को लोकसभा चुनाव के लिए घोषणापत्र जारी करेगी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने सोमवार को बयान जारी कर इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दिल्ली स्थिति पार्टी कार्यालय में घोषणापत्र जारी करेंगे.

माना जा रहा है कि कांग्रेस अपने मेनिफेस्टो में कई और बड़े ऐलान कर सकती है. पार्टी में मेनिफेस्टो में रोजगार, पर्यावरण और शहरीकरण पर फोकस रहेगा. राहुल गांधी पहले ही न्यूनतम आय योजना (न्याय) की घोषणा कर चुके हैं. वह बार बार कह रहे हैं कि कांग्रेस गरीबी के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करेगी, हम भारत के लोगों को ‘न्याय’ देंगे. यह गरीबी के खिलाफ हमारा गैर-हिंसक हथियार है.

उनका कहना है कि 12,000 से कम की मासिक कमाई वाले 20 फीसदी सबसे गरीब लोगों को इस योजना का लाभ मिलेगा और हर साल उनके बैंक खातों में 72,000 रुपये दिए जाएंगे. राहुल गांधी नोटबंदी की जांच योजना आयोग को बहाल करने आदि की घोषणा पहले कर चुके हैं. माना जा रहा है ये सभी बातें घोषणापत्र में शामिल हो सकती हैं.

इसके अलावा राहुल गांधी ने वादा किया है कि अगर केंद्र में उनकी सरकार बनती है तो एक साल के अंदर 22 लाख सरकारी नौकरी दी जाएंगी. उन्होंने अपने वादे के साथ इसे पूरा करने की बाकायदा तारीख भी बताई है. राहुल ने कहा है कि उनकी पार्टी सत्ता में आई तो अगले साल 31 मार्च तक 22 लाख सरकारी नौकरियों के पद भर दिए जाएंगे.

मोदी सरकार को रोजगार के मुद्दे पर घेरने वाले राहुल गांधी ने यह वादा लोकसभा चुनाव के लिए होने वाले पहले चरण के मतदान से दस दिन पहले किया है. रविवार रात राहुल गांधी ने यह वादा एक ट्वीट के जरिए किया. राहुल ने अपने ट्वीट में लिखा है कि मौजूदा वक्त में करीब 22 लाख सरकारी नौकरियों के लिए पद खाली हैं. अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो 31 मार्च 2020 तक इन सभी पदों को भरा जाएगा.

राहुल गांधी ने रविवार को कर्नाटक के विजयवाड़ा ने कहा कि पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकारों ने 14 करोड़ से ज्यादा लोगों को गरीबी से बाहर निकाला और मनरेगा जैसी योजनाओं से लाखों लोगों को रोजगार दिया. उन्होंने कहा, हमने देश को खाद्य सुरक्षा का अधिकार दिया, स्कूलों में हमारे बच्चों को खाना दिया, हमने किसानों, जनजातियों व दलितों की जमीनों की रक्षा के लिए नए कानून बनाए. उन्होंने कहा कि 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी ने सभी चीजों को खत्म कर दिया.

अमित शाह को लेकर आई बेहद बुरी खबर, डॉक्टरों ने फिर से कही यह बड़ी बात

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की सेहत वर्तमान समय में फिलहाल सही नहीं चल रही है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले उन्हें स्वाइन फ्लू की बीमारी के चलते एम्स में भर्ती किया गया था। जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया था। जिसके बाद अमित शाह पश्चिम बंगाल में मंगलवार को एक रैली को संबोधित करने पहुंचे। जहां पर वह सही से बोल भी नहीं पा रहे थे।

दरअसल पश्चिम बंगाल के भाजपा इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि मंगलवार को हुए रैली में अमित शाह जनता को संबोधित करते समय कई बार खास रहे थे। साथ ही उन्हें तेज बुखार भी था। यही वजह है कि डॉक्टरों ने उन्हें एक बार फिर से आराम करने की सलाह दी है। साथ ही यह सलाह भी दी है कि जब तक वह पूरी तरह से सही ना हो जाए तब तक किसी भी रैली में भाग ना लें।

इसके आगे दिलीप घोष ने जानकारी देते हुए बताया कि झारग्राम में होने वाली अगली रैली में अमित शाह संभवत मौजूद नहीं होंगे। क्योंकि अमित शाह एक बार फिर से मंगलवार की शाम को दिल्ली के लिए रवाना होने वाले हैं। जहां पर वह डॉक्टरों से अपनी जांच करवाएंगे। यही वजह है की झाड़ग्राम की रैली में अमित शाह का ना होना भाजपा के लिए एक बड़ा झटका है। क्योंकि हाल ही में ममता बनर्जी ने मेगा रैली करके पूरे देश भर में गठबंधन का बिगुल फूंक दिया है।

हालांकि अमित शाह का स्वाइन फ्लू कितने दिनों में सही होगा? यह तो डॉक्टरों के द्वारा दी जाने वाली अगली रिपोर्ट में ही पता चलेगा। लेकिन क्या वाकई में अमित शाह के अनुपस्थिति से भाजपा को कोई बड़ा नुकसान होगा? आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। साथ ही हमारे चैनल को फॉलो करें।

सर्जिकल स्ट्राइक के ‘हीरो’ ने संभाली टास्क फोर्स की कमान
2016 में पाकिस्तान पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक के हीरो रहे सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपी। कांग्रेस अध्यक्ष ने खुद इसकी जानकारी दी।
राहुल गांधी ने रविवार को ट्वीट कर बताया कि सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल डी एस हुड्डा तथा उनकी टीम ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार की है और यह रिपोर्ट आज मुझे सौंप दी गयी है। इस रिपोर्ट पर पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर व्यापक स्तर पर विचार किया जाएगा। मैं उनको तथा उनकी टीम को इस प्रयास के लिए धन्यवाद देता हूं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके साथ ही एक चित्र भी पोस्ट किया है जिसमें जनरल हुड्डा उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपनी रिपोर्ट उन्हें सौंप रहे हैं। पार्टी ने कुछ समय पहले जनरल हुड्डा के नेतृत्व में इस समिति का गठन किया था। हुड्डा ने 2016 में सीमा पर जाकर किए गए सेना के सर्जिकल स्ट्राइक में अहम भूमिका निभाई थी। सेवानिवृत्त होने के बाद वह कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा पर रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा सौंपा था। इस रिपोर्ट की कुछ सिफारिशों को कांग्रेस के घोषणा पत्र में भी शामिल किया जा सकता है।

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