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राहुल के फैसले के खिलाफ क्यों हुए ज्योतिरादित्य, जब सिंधिया को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की उठ रही है मांग?

नई दिल्ली 9 अगस्त 2019 । कांग्रेस का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा? इसको लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। इन सबके बीच कांग्रेस के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ( Jyotiraditya Scindia ) का नाम भी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए सामने आ रहा है, लेकिन अब ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी ही पार्टी के नेता राहुल गांधी ( Rahul Gandhi ) के खिलाफ हो गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्यों सिंधिया, राहुल गांधी के फैसले के खिलाफ गए।

राहुल का विरोध, सिंधिया का समर्थन
लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 ( Article 370 ) हटाने का विरोध किया। विरोध करने वालों में खुद कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी शामिल थे, लेकिन सिंधिया ने इस फैसले का समर्थन किया। ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन के बाद से कहा जा रहा है कि कांग्रेस में दो खेमों में बांट गई है। एक खेमा धारा 370 के विरोध में है तो दूसरा खेमा धारा 370 का समर्थन कर रहा है।

क्या कहा सिंधिया और राहुल ने?
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने धारा 370 के समर्थन में कहा- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर उठाए गए कदम और भारत देश मे उनके पूर्ण रूप से एकीकरण का मैं समर्थन करता हूं। संवैधानिक प्रक्रिया का पूर्ण रूप से पालन किया जाता तो बेहतर होता, साथ ही कोई प्रश्न भी खड़े नही होते। लेकिन ये फैसला राष्ट्र हित में लिया गया है और मैं इसका समर्थन करता हूं। वहीं, राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा था- राष्ट्रीय एकीकरण का मतलब जम्मू-कश्मीर को तोड़ना, चुने गए प्रतिनिधियों को जेल में बंद कर देना और संविधान का उल्लंघन करना नहीं है। यह देश यहां के लोगों से बना है, न कि जमीन के टुकड़े से। राष्ट्र की सुरक्षा के लिए ताकत का यह गलत इस्तेमाल है।

आखिर सिंधिया ने क्यों किया विरोध
जानकारों का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्यप्रदेश की सियासत करनी है। मध्यप्रदेश की सियासत धारा 370 का विरोध करके नहीं की जा सकती है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद ऐसा कहा जा रहा था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश के सीएम बनेंगे लेकिन, राहुल गांधी ने कमल नाथ को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया। इसके बाद से ज्योतिरादित्य सिंधिया लगातार मध्यप्रदेश की सियासत में सक्रिय हैं। ऐसे में सिंधिया धारा 370 और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर सरकार के फैसले का विरोध करके मध्यप्रदेश की सियासत में आगे नहीं बढ़ सकते हैं। सिंधिया पार्टी के साथ-साथ अपनी व्यक्तिगत राजनीति पर भी जोर दे रहे हैं।

दिशा विहीन कांग्रेस
राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद से कांग्रेस में खेमे बाजी शुरू हो गई है। जानकारों का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष नहीं होने के कारण कांग्रेस की राजनीति दिशा विहीन हो गई है। पार्टी हित से ज्यादा नेता अपने व्यक्तिगत हितों को ध्यान में रखकर सियासत कर रहे हैं। कांग्रेस के कई बड़े नेता धारा 370 का समर्थन कर चुके हैं। यहां तक की यूपी के कई नेता और विधायक भी यह कह चुके हैं कि वह केन्द्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं।

मिलिंद देवड़ा ने की थी कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कहा था कि पार्टी की कमान युवा नेतृत्व को सौंपा जाए। इसके बाद मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा ने भी कांग्रेस अध्यक्ष के लिए पार्टी के दो युवा नेताओं के नाम सुझाया था। साथ ही उन्होंने कहा था कि इन दोनों नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष बनने के गुण हैं। मिलिंद देवड़ा ने जिन नेताओं के नाम सुझाए थे उनमें राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम हैं।

कमलनाथ सरकार के मंत्री भी कर चुके हैं मांग
मिलिंद देवड़ा के अलावा कमल नाथ सरकार के कई मंत्री भी ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का राष्ट्रीय अधअयक्ष बनाने की मांग कर चुके हैं। कमल नाथ सरकार की मंत्री इमरती देवी, गोविंद सिंह राजपूत औऱ प्रद्युमन सिंह तोमर समेत कई मंत्री कह चुके हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया में कांग्रेस अध्यक्ष बनने के पूरे गुण हैं।

राहुल गांधी के खिलाफ धरने पर बैठे कांग्रेसी समर्थक, बोले- Article 370 हटाने का विरोध क्‍यों
जम्‍मू कश्‍मीर से आर्टिकल 370 व अनुच्‍छेद 35ए हटाने का भले ही कांग्रेस पार्टी पुरजोर विरोध कर रही हो, मगर कांग्रेस पार्टी में अनुच्‍छेद हटाने को लेकर मतभेद सामने आने लगे हैं। अब तक जहां कई कांग्रेसी नेता ट्वीट कर अनुच्‍छेद 370 हटाने पर सहमति जता चुके हैं तो वहीं हरियाणा के हिसार में तो कांग्रेसी समर्थक ही राहुल गांधी के विरोध में धरने पर बैठ गए हैं।

सहमति जताने तक मामला ठीक था मगर अब कांग्रेस समर्थकों को धरने पर बैठना अपने आप में बडी बात है। कांग्रेसी समर्थकों ने धरने पर एक बैनर भी लगाया है। जिस पर लिखा है कि हम सच्‍चे कांग्रेसी हैं मगर हम राहुल गांधी से पूछना चाहते हैं कि वो अनुच्‍छेद 370 को हटाने का विरोध क्‍यों कर रहे हैं। धरने की अगुवाई बरवाला हलका के युवा नेता विजेंद्र हुड्डा कर रहे हैं।

कार्यकर्ताओं ने कहा देशहित के मुद्दे पर राजनीति करना सही बात नहीं है। अगर जरूरत पडी तो वो राहुल गांधी के घर के सामने जाकर भी धरना शुरू कर देंगे। इसलिए जो बिल राज्‍यसभा और लोकसभा में पारित हो चुका है तो उसे रोकने की कोशिश न करें। अनुच्‍छेद 370 को हटाने से ही देश की आधे से ज्‍यादा समस्‍याओं का हल निकल जाएगा। इसलिए इसका विरोध करना हमारी समझ से परे है।

बता दें कि जम्‍मू कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 हटाने को लेकर राज्‍यसभा में बिल पेश करते ही अनुच्‍छेद का विरोध करने को लेकर कांग्रेस पार्टी के दो सुर नजर आ रह‍े थे। इसमें एमपी में कांग्रेस के बडे नेता ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने भी ट्वीट कर इस मसले पर सहमति जताई थी। वहीं इसके साथ ही हरियाणा में तीन बार मुख्‍यमंत्री रहे चौधरी भजनलाल के बेटे एंव कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्‍नोई ने भी ट्वीट कर अनुच्‍छेद हटाने के फैसले को देश हित में बताया है। इतना ही नहीं हरियाणा के पूर्व सीएम रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे एवं पूर्व कांग्रेसी सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी ट्वीट कर फैसले को देशहित में बताया है। ऐसे में अब कांग्रेसी समर्थकों को राहुल गांधी के खिलाफ धरना दिए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है।

कश्मीर पर टेंशन में कांग्रेस, 370 हटाने के समर्थन में राजस्थान कांग्रेस के नेता

अनुच्छेद-370 के दो प्रावधान हटाने और जम्मू-कश्मीर के विभाजन के मुद्दे पर अब राजस्थान के कांग्रेस नेताओं ने भी समर्थन दिया है. अशोक गहलोत सरकार में खेल मंत्री अशोक चांदना के अलावा पूर्व सांसद डॉ ज्योति मिरधा मोदी सरकार के फैसले के साथ खड़े नजर आए. इस मुद्दे पर कांग्रेस में नेताओं के सुर बंटे हुए हैं. एक तरफ तो कांग्रेस संसद में इस फैसले का विरोध कर रही है. वहीं पार्टी के कई नेता इस फैसले के पक्ष में खुलकर बोल रहे हैं.

राजस्थान सरकार में खेल मंत्री अशोक चांदना ने ट्वीट में लिखा, ‘ये मेरी निजी राय है. जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाना सरकार का पहला फैसला है, जिसका मैं स्वागत करता हूं. लेकिन 370 बदलने का क्रियान्वरण तानाशाही ना होकर शांति और विश्वास के माहौल में होकर इसका अच्छे से निस्तारण हो ताकि भविष्य में देश के किसी नागरिक को कोई समस्या न हो.’ वहीं डॉ ज्योति मिरधा ने कहा, देश सबसे पहले. यह सख्त फैसला लेने के लिए सरकार को बधाई देनी चाहिए, जिसके भारत एकजुट होगा. अशोक चांदना और मिरधा के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, उत्तर प्रदेश की विधायक अदिति सिंह और अभिषेक मनु सिंघवी ने भी इस कदम का स्वागत किया है. हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और पूर्व कांग्रेस चीफ राहुल गांधी ने इसका विरोध किया.

आजाद ने पार्टी के सहयोगियों की आलोचना करते हुए कहा कि जो लोग जम्मू-कश्मीर और कांग्रेस का इतिहास नहीं जानते हैं, उन्हें पार्टी में नहीं रहना चाहिए. आजाद ने एक बयान में कहा, ‘जो लोग जम्मू-कश्मीर और पार्टी के इतिहास को नहीं जानते, मुझे उनसे कोई लेना-देना नहीं है. उन्हें जम्मू-कश्मीर के साथ कांग्रेस के इतिहास को पढ़ना चाहिए. इसके बाद ही उन्हें पार्टी में रहना चाहिए.’ वहीं राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कार्यकारी शक्ति का दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर है. उन्होंने ट्वीट कर जम्मू- कश्मीर के नेताओं की नजरबंदी की भी आलोचना की.

सियासी माहौल देख गांधी परिवार के सामने अड़ गए कांग्रेस के ये नेता

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की अधिकतर धाराएं हटाए जाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटे जाने का संकल्प एवं विधेयक संसद में पारित होने के बाद सरकार के इस कदम की कांग्रेस ने निंदा की. इसके बाद कांग्रेस की शीर्ष नीति निर्धारण इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की मंगलवार को बैठक हुई. जिसमें कांग्रेस ने तय किया कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ पार्टी खड़ी रहेगी और बीजेपी के ‘विभाजनकारी एजेंडे’ के खिलाफ लड़ेगी.

हालांकि, अनुच्छेद 370 पर कांग्रेस सीडब्ल्यूसी की लंबी चली बैठक में पार्टी दो धड़ों में बंटी नजर आई. ज्योतिरादित्य सिंधिया, आरपीएन सिंह से लेकर जितिन प्रसाद और दीपेंद्र हुड्डा जैसे कांग्रेस पार्टी के उत्तर भारतीय नेताओं ने धारा 370 हटाए जाने के समर्थन में अपने तर्क रखे. इन नेताओं ने कांग्रेस के सियासी संकट को लेकर अपनी चिंता जाहिर की. इसके बावजूद ‘गांधी परिवार’ मोदी सरकार के द्वारा हटाए गए 370 फैसले के खिलाफ एकमत है.

सीडब्ल्यूसी की बैठक में कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद जितिन प्रसाद ने अपनी बात रखते हुए कहा कि देश का माहौल इस मुद्दे पर बीजेपी के साथ है. ऐसे में हम इसका विरोध करके देश के सियासी माहौल के खिलाफ जा रहे हैं. जितिन प्रसाद ने कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को निशाने पर लेते हुए कहा कि कुछ लोगों के पक्ष को कश्मीर में समर्थन मिल रहा है. इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदम्बरम ने कहा कि आप केरल और तमिलनाडु के बारे में ऐसा नहीं कह सकते हैं. इस पर जितिन ने कहा कि ठीक है लेकिन मैं यूपी से आता हूं, वहां यही भावना है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश के कुशीनगर संसदीय सीट से लोकसभा सदस्य रहे आरपीएन सिंह ने भी धारा 370 के हटाने के विरोध करने के खिलाफ अपना तर्क रखा. आरपीएन ने कहा कि आप कश्मीर पर तकनीकि रूप से सही हो सकते हैं लेकिन जनता के बीच क्या लेकर जाएं और उन्हें क्या जवाब दें? उन्होंने कहा कि धारा 370 को हटाने के फैसले के बाद तकनीकी नहीं सियासी पहलू सामने आए, जिन्हें हमें जनता के बीच लेकर जाना है. इस तरह से आरपीएन का सीधा मानना है कि मौजूदा सियासी मिजाज को देखते हुए हमें इसका विरोध करना राजनीतिक तौर पर महंगा पड़ सकता है.

कांग्रेस के दिग्गज नेता और हरियाणा के रोहतक से सांसद रहे दीपेंद्र हुड्डा ने कश्मीर से अनुच्‍छेद 370 हटाने का समर्थन किया. उन्होंने ट्वीट कर कहा था, ‘मेरा पहले से ही विचार है कि 21वीं सदी में अनुच्छेद 370 का कोई औचित्य नहीं है और इसको हटाना चाहिए. ऐसा सिर्फ देश की अखंडता के लिए ही नहीं बल्कि जम्मू कश्मीर की जनता जो हमारे देश का अभिन्न अंग है, के हित में भी है.’ सीडब्ल्यूसी की बैठक में दीपेंद्र हूडा ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि पुलवामा के बाद मैंने यही कहा था और फिर ताजा ट्वीट किया लेकिन सरकार का तरीका सही नहीं है, ये भी लिखा.

हुड्डा की तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी धारा 370 को हटाने और कश्मीर को दो धड़ों में बांटने के फैसले का समर्थन किया था. सिंधिया ने ट्वीट करके कहा था, ‘जम्मू कश्मीर और लद्दाख को लेकर उठाए गए कदम और भारत देश में उनके पूर्ण रूप से एकीकरण का मैं समर्थन करता हूं. संवैधानिक प्रक्रिया का पूर्ण रूप से पालन किया जाता तो बेहतर होता. साथ ही कोई प्रश्न भी खड़े नहीं होते. लेकिन ये फैसला राष्ट्रहित में लिया गया है और मैं इसका समर्थन करता हूं.’ मंगलवार को सीडब्ल्यूसी की बैठक में सिंधिया ने कहा कि पब्लिक सेंटीमेंट जो कह रहा है, वही मैंने ट्वीट किया. हालांकि सरकार के तरीके से असहमत हूं. हालांकि सिंधिया की बात को गांधी परिवार समेत किसी से कोई समर्थन नहीं मिला.

राहुल गांधी ने सभी नेताओं की बात सुनने के बाद अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि हम सच के साथ हैं लेकिन सिर्फ पब्लिक सेंटीमेंट ही पैमाना नहीं हो सकता. राहुल के हां में हां मिलाते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने धारा 370 पर लोकतंत्र का मजाक बनाया. इस तरह से धारा 370 को हटाए जाने के खिलाफ राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी एकमत नजर आईं.

हालांकि कांग्रेस के युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया, कुलदीप विश्नोई, दीपेंद्र हुड्डा, आरपीएन सिंह और जितिन प्रसाद की बातों को ध्यान में रखते हुए सीडब्ल्यूसी ने बैठक में लाए जा रहे प्रस्ताव में PoK पर अलग से पैराग्राफ जोड़ा. इसके बाद ही ये प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास किया गया. इसमें साफ किया गया कि कश्मीर ही नहीं PoK भी हमारा है. ये द्विपक्षीय मसला है और इस पर किसी तीसरे की मध्यस्थता नामंजूर है.

कांग्रेस सेवा दल भी मोदी के फैसले के साथ

जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के फैसले का कांग्रेस सेवादल ने स्वागत किया है। सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष सत्येंद्र यादव का कहना है कि 370 हटाए जाने के मोदी सरकार के इस फैसले का मध्य प्रदेश सेवादल स्वागत करता है |जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के फैसले का कांग्रेस सेवादल ने स्वागत किया है। सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष सत्येंद्र यादव का कहना है कि 370 हटाए जाने के मोदी सरकार के इस फैसले का मध्य प्रदेश सेवादल स्वागत करता है |मध्य प्रदेश सेवा दल 9 अगस्त को जबलपुर में तिरंगा मार्च निकालने जा रहा है जिसमें सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस और सेवा दल के कार्यकर्ता शामिल होंगे |

जबलपुर में निकाली जाने वाली तिरंगा मार्च पर सत्येंद्र यादव का कहना है कि देश में जिस तरीके से सांप्रदायिकता और अराजकता फैली है उसे लेकर तिरंगा मार्च निकाला जा रहा है। इससे पहले कांग्रेस के कई बड़े नेता मोदी सरकार के इस फैसला का समर्थन कर चुके हैं| वहीं अब कांग्रेस सेवादल ने भी खुलकर इस फैसला का स्वागत किया था| जबकि कांग्रेस सांसदों ने संसद में मोदी सरकार के फैसले का पुरजोर विरोध किया|

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