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स्मृति ईरानी ने मोदी के करियर से खुद को क्यों जोड़ा

नई दिल्ली 6 फरवरी 2019 । स्मृति ईरानी के एक बयान ने सुर्खियां बटोरी हैं। यह बयान है कि जिस दिन नरेंद्र मोदी राजनीति से संन्यास ले लेंगे, वह भी राजनीति से अपने आपको अलग कर लेंगी। इसके कई मतलब निकाले जा रहे हैं। सवाल ये भी उठ रहे हैं कि आखिर स्मृति ईरानी ने प्रधान सेवक के राजनीतिक करियर से खुद को क्यों जोड़ा।

स्मृति ईरानी ने प्रधान सेवक के राजनीति से संन्यास लेते ही खुद को राजनीति से अलग करने की बात कहकर सबको चौंका दिया। तस्वीर ट्विटर हैंडल से।
एक मतलब ये है कि नरेंद्र मोदी के लिए स्मृति ईरानी में आदर का भाव है। राजनीति में उन्हें सम्मान देने वाले वही हैं। सार ये है कि राजनीति में स्मृति जो कुछ भी हैं नरेंद्र मोदी की बदौलत हैं। इसलिए राजनीति में नरेंद्र मोदी नहीं, तो स्मृति भी नहीं।

एक और मतलब ये है कि न नरेंद्र मोदी राजनीति से संन्यास लेंगे और न ही स्मृति ईरानी राजनीति छोड़ेंगी। यानी कोई यह न समझे कि स्मृति राजनीति में छोटी पारी खेलने आयी है। एक संकेत देने की कोशिश स्मृति ने की है कि वह यूं ही राजनीति में नहीं हैं। राजनीति की भाषा पर भी उनकी मजबूत पकड़ है।

वास्तव में नरेंद्र मोदी के राजनीति में रहने तक अपने राजनीति में रहने की बात को अगर स्मृति के शब्दों में समझी जाए तो बेहतर होगा। इसलिए ध्यान देते हैं उनके शब्दों पर,

स्मृति ईरानी के बयान का एक अन्य मतलब ये भी लगाया जा सकता है कि प्रधान सेवक की तरह वह भी राजनीति को समर्पित हैं। आज नरेंद्र मोदी प्रधान सेवक हैं, कल कोई और होंगे। मगर, सेवा भाव से जब तक प्रधान सेवक आते रहेंगे, स्मृति ईरानी राजनीति में रहेंगी। यह मतलब तब निकलता है जब प्रधान सेवक का मतलब सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी ना हो।

स्मृति ईरानी से किसी ने उनके ‘प्रधान सेवक’ बनने की सम्भावना के बारे में भी किसी ने सवाल पूछा था। इसका जवाब उन्होंने इनकार में दिया और कहा, “कभी नहीं…”

स्मृति प्रधान सेवक से खुद को अलग करना भी नहीं चाहती और खुद प्रधान सेवक भी बनना नहीं चाहती। य पहेली भी अबझ बनी हुई है।

कभी स्मृति ईरानी ने गुजरात दंगे के दौरान मोदी सरकार की निष्क्रियता के विरोध में बगावत के सुर दिखाए थे। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री, गुजरात नरेंद्र मोदी को उनके पद से हटाए जाने की मांग भी की थी। मगर, बाद में दोनों राजनीति के सफर में एक ही राह के राही हो गये।

स्मृति ईरानी ने राज्यसभा उम्मीदवार का प्रस्तावक होने से लेकर राज्यसभा भेजने तक के लिए नरेंद्र मोदी का आभार प्रकट किया है। उन्हें केंद्र में एचआरडी जैसा मंत्रालय भी नरेंद्र मोदी ने उन्हें सौंपा। बागी शत्रुघ्न सिन्हा कभी इस दर्द को छिपा नहीं पाए कि उनके जैसा सिने स्टार को मंत्री नहीं बनाया गया लेकिन एक टीवी एक्टर को इतना बड़ा पद सौंप दिया गया।

अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव हार जाने के बावजूद स्मृति ईरानी को नरेंद्र मोदी ने केंद्र में मंत्री बनाने की पहल की। स्मृति ईरानी इन सब कारणों से नरेंद्र मोदी को राजनीति में अपना मेंटर मानती रही हैं।

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